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वायदा अनुबंध का मूल्य निर्धारण संरचना क्या है

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पिछले अध्यायों में हमने मार्जिन ट्रेडिंग, मार्जिन की गणना और मार्जिन ट्रेडिंग में शामिल जोखिमों के बारे में पढ़ा है। आइए, अब एक और महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा करते हैं जो फ्यूचर्स  कॉन्ट्रैक्ट है।

आइए, हम यह समझने से शुरुआत करते हैं कि फ्यूचर्स क्या हैं। डेरिवेटिव प्रोडक्ट जिनका मूल्य मुख्य रूप से अंतर्निहित शेयरों या सूचकांकों की कीमत पर निर्भर करता है, उसे फ्यूचर्स कहा जाता है। अंतर्निहित शेयरों या सूचकांकों की लागत प्रत्यक्ष नहीं होती है। अंतर्निहित संपत्ति की कीमत, नकद खंड और डेरिवेटिव खंड के बीच अंतर होता है। हम दो मूल्य निर्धारण मॉडल के माध्यम से फ्यूचर्स  कॉन्ट्रैक्ट के अंतर को समझ सकते हैं। इनके माध्यम से आप स्टॉक फ्यूचर्स की कीमत या सूचकांक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट कैसा व्यवहार कर सकता है, इसका अनुमान लगा सकते हैं।

मूल्य निर्धारण मॉडल ये रहे:

-  कॉस्ट ऑफ कैरी मॉडल 

-  एक्सपेक्टेंसी मॉडल

आपको यह समझना चाहिए कि ये मॉडल केवल एक मंच प्रदान करते हैं, जिसे आधार बनाकर आप फ्यूचर्स कीमतों के बारे में अपनी समझ को बढ़ा सकते हैं। आपको इन मॉडलों को समझने की आवश्यकता होती है ताकि आपको इस बारे में सही जानकारी मिल सके कि आपको किसी शेयर या सूचकांक के फ्यूचर्स के मूल्य से क्या उम्मीद करनी चाहिए।

आइए हम इन मॉडलों को अच्छी तरह समझते हैं।

कॉस्ट ऑफ कैरी मॉडल

कॉस्ट ऑफ कैरी मॉडल में नकदी और फ्यूचर्स कीमतों में कोई अंतर नहीं होता है। ऐसा क्यों है? इसका कारण यह है कि कॉस्ट ऑफ कैरी मॉडल यह मानता है कि बाजार पूरी तरह से ठीक है और यह व्यापारियों के दो या दो से अधिक बाजारों में मूल्य अंतर का लाभ उठाने (जिसे आरबिट्राज भी कहा जाता है) का अवसर खत्म कर देता है।

ऐसे परिदृश्य में जहां आरबिट्राज का कोई अवसर नहीं होता, सिवाय तब जब कोई निवेशक अंतर्निहित संपत्तियों को ट्रेड इन कर दे, तो उसे स्पॉट और फ्यूचर्स बाजार मूल्य का पता नहीं चलेगा। इसका कारण यह है कि अंतिम कमाई समान है। इसलिए हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं:

फ्यूचर्स  कॉन्ट्रैक्ट की कीमत (एफपी) = स्पॉट प्राइस (एसपी) + (कैरी कॉस्ट - कैरी रिटर्न)

कैरी कॉस्ट का मतलब है कि फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की मैच्योरिटी तक संपत्ति को होल्ड करने की लागत। इसमें स्टोरेज लागत, संपत्ति को प्राप्त करने और रखने व वित्तपोषण लागतों का भुगतान करने की लागत शामिल हो सकती है।

कैरी रिटर्न का मतलब किसी भी आय से होता है जो किसी एसेट को डिविडेंड और बोनस आदि के रूप में होल्ड करने के दौरान प्राप्त होती है। जब हम किसी सूचकांक के फ्यूचर्स मूल्य की गणना करते हैं, तो कैरी रिटर्न का मतलब औसत रिटर्न होता है जो सूचकांक द्वारा नकदी बाजार में इसकी होल्डिंग पीरियड के दौरान दिया जाता है।

कैरी की कुल लागत कैरी कॉस्ट और कैरी रिटर्न का कुल मूल्य है।

इस मॉडल के अनुसार, कॉस्ट से लाभ कमाया जा सकता है अगर नकदी बाजार में पोजिशन ओपन रखी जाए तो।

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फ्यूचर्स मूल्य निर्धारण का एक्सपेक्टेंसी मॉडल 

फ्यूचर्स मूल्य निर्धारण के एक्सपेक्टेंसी मॉडल के अनुसार, किसी संपत्ति का फ्यूचर्स मूल्य तकनीकी रूप से संपत्ति का भविष्य का स्पॉट मूल्य है। 

इसलिए अगर भविष्य में किसी संपत्ति के लिए समग्र बाजार की धारणा उच्च मूल्य की ओर जाती है तो परिसंपत्ति का फ्यूचर्स मूल्य सकारात्मक होगा।

इसी तरह जब बाजार में मंदी की भावनाओं में वृद्धि होती है, तो यह संपत्ति के फ्यूचर्स मूल्य में गिरावट का कारण होगा।

फ्यूचर्स मूल्य निर्धारण मॉडल का एक्सपेक्टेंसी मॉडल इस धारणा पर आधारित है कि संपत्ति की वर्तमान कीमत और इसकी फ्यूचर्स कीमत के बीच कोई संबंध नहीं है। यहां महत्वपूर्ण बात है संपत्ति के अनुमानित फ्यूचर्स स्पॉट कीमत क्या होने वाली है।

यही कारण है कि बहुत सारे शेयर बाजार प्रतिभागी नकदी खंड में मूल्य के उतार-चढ़ाव की आशंका के लिए फ्यूचर्स कीमतों में ट्रेंड देखते हैं।

अब तक आने पढ़ा

- डेरिवेटिव उत्पाद जिनके मूल्य अंतर्निहित स्टॉक या सूचकांकों की कीमत पर काफी हद तक निर्भर करते हैं उसे फ्यूचर्स  कहा जाता है।

- दो मूल्य निर्धारण मॉडल हैं जो स्टॉक फ्यूचर्स की कीमत का अनुमान लगाने या सूचकांक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट कैसे व्यवहार करेगा ये जानने के लिए उपयोग कर सकते हैं। उनके नाम कॉस्ट ऑफ कैरी मॉडल और एक्सपेक्टेंसी मॉडल हैं।

- कॉस्ट ऑफ कैरी मॉडल का मानना है कि बाजार पूरी तरह से कुशल हैं और यह व्यापारियों के लिए दो या दो से अधिक बाजारों में मूल्य अंतर का लाभ उठाने (जिसे आरबिट्राज भी कहा जाता है।) का अवसर खत्म कर देता है।

- कैरी रिटर्न का मतलब किसी भी आय से होता है जो किसी एसेट को डिविडेंड और बोनस आदि के रूप में होल्ड करने के दौरान प्राप्त होती है। 

- फ्यूचर्स मूल्य निर्धारण के एक्सपेक्टेंसी मॉडल के अनुसार, किसी संपत्ति का फ्यूचर्स मूल्य तकनीकी रूप से संपत्ति का भविष्य का स्पॉट मूल्य है ।

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