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व्यक्तिगत वित्त

5. PF और PPF क्या हैं?

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पिछले अध्याय में आपको यह गणना करने की प्रक्रिया समझ में आई कि आपको आराम से रिटायर होने के लिए कितनी बचत की आवश्यकता है। रिटायरमेंट के समय आपके लिए ज़रूरी राशि बहुत बड़ी हो सकती और इसके लिए आपको सही निवेश विकल्पों को चुनना अहम है। और जब रिटायरमेंट के लिए बचत करने की बात आती है, तो PF और PPF विकल्प कई भारतीय निवेशकों की सूची में सबसे ऊपर आते हैं। इन दोनों को इंटरचेंज करना काफी आसान हो सकता है – आखिरकार दोनों ही विभिन्न प्रकार की भविष्य निधि हैं, है ना? 

लेकिन अगर आप इसकी गहराई में जाएंगे तो आप कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब चाहेंगे। जैसे- 

  • PF क्या है और PPF क्या है?
  • PPF खाता क्या है?
  • और PF और PPF में क्या अंतर है?

इस अध्याय में हम इन्हीं बातों पर चर्चा करेंगे। आइए शुरू करें। 

PF भविष्य निधि क्या है?

कर्मचारी भविष्य निधि जिसे PF या प्रॉविडेंट फंड भी कहा जाता है, यह मूल रूप से एक निवेश योजना है जिसे भारत सरकार द्वारा ऑर्गनाइज़्ड क्षेत्र के कर्मचारियों को उनके भविष्य के लिए बचत करने में मदद करने के लिए विकसित किया गया है। EPF का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों के पास रिटायरमेंट जीवन के दौरान धन की पर्याप्त राशि रहे।

EPF योजना की मुख्य विशेषताएं

  • 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली किसी भी कंपनी को सरकार द्वारा बनाए गए EPF नियमों का पालन करना चाहिए।
  • इस योजना के अनुसार  कर्मचारी और मालिक, दोनों कर्मचारी के  EPF खाते में योगदान करते हैं।
  • आमतौर पर  मासिक वेतन का 12% EPF भुगतान में जाता है। यह कटौती स्वतः और अनिवार्य रूप से होती है।
  • EPF खाते में जमा राशि पर  ब्याज दर आमतौर पर बचत बैंक खातों पर दी जाने वाली ब्याज दर से अधिक होती है।
  • वर्तमान में  EPF भुगतान पर प्रति वर्ष 8.5% की ब्याज दर है।

कौन EPF खाता खोल सकता है?

जो भी कर्मचारी 20 से अधिक लोगों को रोज़गार देने वाली कंपनी में काम करता है उसके पास अनिवार्य रूप से EPF खाता होना चाहिए। हालांकि 20 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए EPF खाता खोल सकती है।

EPF का एक उदाहरण

सुभाष (हां, वही जो पर्सनल फाइनेंस की प्रेरणा दे रहा है) एक बहुराष्ट्रीय कंपनी की भारत में स्थित एक शाखा में काम करता है। स्वाभाविक रूप से, यहां कर्मचारियों की संख्या 20 से अधिक थी। इसलिए उनके मालिक ने उनके करियर के शुरुआती दिनों में उनके लिए एक EPF खाता खोला। सुभाष लगभग 5 वर्षों से EPF खाते में योगदान दे रहा है। और वह तब तक ऐसा करता रहेगा जब तक वह रिटायर नहीं हो जाता। क्या जबर्दस्त व्यवस्था है, है कि नहीं? 

PPF क्या है?

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) भी एक ऐसी योजना है जो भारत सरकार द्वारा समर्थित है। और EPF योजना की तरह PPF भी एक रिटायरमेंट केंद्रित निवेश विकल्प है। PPF में कोई भी निवेश कर सकता है, चाहे वो वेतनभोगी हो या स्वरोजगार। PPF निवेश की राशि पर एक निश्चित दर से ब्याज भी मिलता है।

PPF योजना की मुख्य विशेषताएं

  • PPF पर भी औसत बचत बैंक खाते की तुलना में अधिक ब्याज दर मिलती है।
  • वर्तमान में PPF बैलेंस पर प्रति वर्ष 7.1% की ब्याज दर है। 
  • PPF खातों में 15 साल की लॉक-इन अवधि होती है।
  • एक निवेशक को प्रति वर्ष न्यूनतम ₹500 भुगतान करना अनिवार्य है, तब जाकर खाता सक्रिय रह सकता है।
  • निवेशक  प्रत्येक वर्ष ₹1,50,000 की अधिकतम राशि का योगदान कर सकता है। 
  • करदाता, आयकर अधिनियम की धारा 80C के अनुसार, उनकी कुल आय से कटौती के रूप में प्रत्येक वर्ष ₹1,50,000 तक का क्लेम कर सकते हैं।  

PPF खाता क्या है?

PPF खाता, एक खाता है जो आपको PPF योजना में निवेश करने में मदद करता है। आप इस तरह का खाता बैंक या पोस्ट ऑफिस में खोल सकते हैं। अपने PPF खाते को सक्रिय करने के लिए आपको कुछ दस्तावेज़ जैसे अपना पहचान प्रमाण, अपना पता प्रमाण, एक पासपोर्ट साइज़ फोटो और अन्य KYC दस्तावेज़ जमा करने होंगे।

कौन PPF खाता खोल सकता है?

कोई भी भारतीय नागरिक,  चाहे वह वेतनभोगी हो या स्व-नियोजित, वह PPF खाता खोल सकता है। यहां तक ​​कि अनियमित नौकरियों में काम करने वाले लोग भी PPF में निवेश कर सकते हैं। 

PPF: एक उदाहरण

जैसा कि हमने पहले देखा था, सुभाष एक वेतनभोगी कर्मचारी है । लेकिन वह अपनी रिटायरमेंट के लिए अधिक बचत करना चाहता है। और वह कर लाभ का आनंद भी लेना चाहता है इसलिए वह एक PPF खाता खोलता है (EPF खाते के अलावा)। और प्रत्येक वित्तीय वर्ष वह PPF खाते में कुछ राशि का योगदान करता है। इस राशि पर उसे लगातार ब्याज मिलता है। और वह आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत निवेश की गई राशि को अपनी कुल आय से कटौती के रूप में क्लेम कर सकता है।

PF और PPF में क्या अंतर है?

EPF और PPF कई मायनों में एक दूसरे से अलग हैं। इन अंतरों को बेहतर ढंग से समझने के लिए हमने उन्हें इस टेबल में लिस्ट किया है, ताकि आप एक नज़र में उनकी तुलना कर सकें और उसे समझ सकें।

अंतर

EPF 

PPF

पात्रता

20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संगठनों में काम करने वाले वेतनभोगी कर्मचारी

(अन्य वेतनभोगी कर्मचारी भी निवेश कर सकते हैं, बशर्ते उनके संगठन में यह नीति हो)

सभी भारतीय नागरिक, चाहे वे वेतनभोगी हों या स्व-नियोजित, और चाहे औपचारिक या अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हों

योगदान करने वाली पार्टी

कर्मचारी और नियोक्ता

व्यक्तिगत

न्यूनतम निवेश

वेतन का 12%

प्रति वर्ष ₹500 

अधिकतम निवेश

कर्मचारी के योगदान के लिए कोई ऊपरी सीमा नहीं

प्रति वर्ष ₹1,50,000 

ब्याज दर

8.5%

7.1%

कार्यकाल

रिटायरमेंट तक

15 वर्ष

कर लाभ

EPF से रिटर्न टैक्स-फ्री है (लेकिन 5 साल की निरंतर सेवा से पहले होने वाली कोई भी निकासी कर योग्य है)

PPF में निवेश और उससे मिलने वाले रिटर्न पर टैक्स छूट मिलती है


ऋण सुविधा

आप अपने EPF बैलेंस के 100% के बदले एडवांस ले सकते हैं

आपके PPF बैलेंस के बदले ऋण की अनुमति  तीसरे और 6 वें वर्ष के बीच की अवधि में दी जाती है

समय से पहले निकासी

अगर आप 2 महीने से अधिक समय से बेरोज़गार हैं, या शादियों, घर निर्माण या चिकित्सा आवश्यकताओं के उद्देश्य से अनुमति मिल सकती है

कार्यकाल के 7 वें वर्ष के पूरा होने के बाद अनुमति दी जाती है

निष्कर्ष

आपने देखा कि EPF और PPF कैसे एक दूसरे से अलग हैं। लेकिन इस अंतर के बावजूद दोनों ही, लंबी अवधि के दृष्टिकोण वाले निवेशकों के लिए बेहतरीन निवेश विकल्प हैं। इन योजनाओं के अलावा, भारत सरकार द्वारा समर्थित कई अन्य विकल्प भी हैं। हम स्मार्ट मनी के अगले अध्याय में इनमें से कुछ पर एक नज़र डालेंगे।

अब तक आपने पढ़ा

  • कर्मचारी भविष्य निधि एक निवेश योजना है जिसे भारत सरकार द्वारा संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों को उनके भविष्य के लिए बचत में मदद करने के लिए विकसित किया गया है।
  • आमतौर पर मासिक वेतन का 12% EPF भुगतान में जाता है। यह कटौती स्वतः और अनिवार्य रूप से होती है।
  • कोई भी कर्मचारी जो 20 से अधिक लोगों को रोज़गार देने वाली कंपनी में काम करता है उसके पास अनिवार्य रूप से EPF  खाता होना चाहिए।
  • हालांकि 20 से कम कर्मचारियों वाली कंपनियां भी अपने कर्मचारियों के लिए EPF खाते खोल सकती है।
  • सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) भी एक योजना है जो भारत सरकार द्वारा समर्थित है। और EPF योजना की तरह PPF भी एक रिटायरमेंट-केंद्रित निवेश विकल्प है।
  • PPF में कोई भी निवेश कर सकता है, चाहे वो वेतनभोगी हो या स्वरोजगार।
  • एक निवेशक को अपना खाता सक्रिय रखने के लिए प्रति वर्ष न्यूनतम ₹500 का भुगतान करना अनिवार्य है।  
  • निवेशक प्रति वर्ष ₹1,50,000 की अधिकतम राशि का योगदान कर सकता है।
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