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मार्जिन ट्रेडिंग क्या है? (एंजेल ब्रोकिंग से वास्तविक जीवन को शामिल करें)

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इस मॉड्यूल में  हम ट्रेडिंग के बारे में समझेंगे। आप बाजार में व्यापार करना चाहते हैं और अपने पैसे का निवेश करना चाहते हैं। ऐसा करने के लिए आपको मार्जिन खाते की आवश्यकता होगी। यह समझने के लिए कि एक मार्जिन खाता क्या है और आप इसे कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं, आइए जानते हैं-

मार्जिन क्या है?

आम आदमी की भाषा में किसी सेवा के बिक्री मूल्य और उसके उत्पादन की लागत के बीच के अंतर को मार्जिन कहा जाता है। हम कह सकते हैं कि यह मुनाफे के लिए राजस्व का रेशियो है। इसका मतलब यह है कि निवेशक के खाते में रखी गई प्रतिभूतियों के कुल मूल्य और ब्रोकर की ऋण राशि के मूल्य के बीच जो भी अंतर होगा। 

जब आप मार्जिन पर कुछ खरीदते हैं तो इसका मतलब है कि आप प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए पैसे उधार ले रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर आप मार्जिन पर संपत्ति खरीद रहे हैं तो आप एक खरीदार हैं। इसलिए आप संपत्ति के मूल्य का एक प्रतिशत का भुगतान करेंगे और बैंक या ब्रोकर से बाकी पैसे उधार लेंगे। यहां ब्रोकर एक ऋणदाता है और निवेशकों के खातों में मौजूद प्रतिभूतियां कोलैटरल या सिक्योरिटी डिपॉजिट हैं।

व्यापारी मार्जिन ट्रेडिंग का चयन क्यों करते हैं?

अब सवाल यह उठता है कि व्यापारी मार्जिन ट्रेडिंग का विकल्प क्यों चुनते हैं? इसे एक उदाहरण से समझते हैं - मान लीजिए कि ₹1,00,000 की राशि से आप XYZ के शेयरों को नकद बाजार में ₹1000 प्रति शेयर की दर से खरीद सकते हैं। डेरिवेटिव मार्केट में मार्जिन ट्रेडिंग के अनुसार आपको इस लेन-देन के लिए अपनी बकाया स्थिति के मूल्य का 30% मार्जिन जमा करना होगा। इस परिस्थिति में आप इस कंपनी के शेयरों को अपनी 1 लाख रुपए की पूँजी पर ही खरीद पाएंगे। 

इसके लिए गणना इस प्रकार होगी:

1 लाख रुपये ÷ (₹1000 का 30%) = 300 शेयर

वास्तव में, आपको इस मामले में 3.33 बार (100/30) की अनुमति है। अगर ABC लिमिटेड की कीमत ₹100 बढ़ जाती है तो आपके 100 शेयर कैश मार्केट में ₹10,000 का लाभ देंगे, इसका मतलब है आपके निवेश पर 10 प्रतिशत का रिटर्न। हालांकि डेरिवेटिव बाजार में आपका भुगतान बहुत अधिक होगा। डेरिवेटिव बाजार में ₹100 की समान वृद्धि पर आपको ₹30,000 प्राप्त होंगे, जो आपके 1 लाख रुपये के निवेश पर 33 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न होता है। 

तो आपको अधिक शेयर खरीदने के लिए लेवरेज संसाधन मिलते हैं; जो आप मार्जिन खाते के जरिए किसी भी समय उपयोग कर सकते हैं। मार्जिन ट्रेडिंग में आप ब्रोकर से उधार ली गई धनराशि का उपयोग करके अपने खाते में, नकदी की तुलना में, अधिक शेयर खरीद सकते हैं।

मार्जिन ट्रेडिंग की प्रक्रिया क्या है?

मार्जिन ट्रेडिंग की प्रक्रिया काफी सरल है। ऐसा करने के लिए ब्रोकर, जो पैसे उधार देता है, वह शेयरों को खरीदेगा और उन्हें कोलैटरल के रूप में रखेगा। आइए इसकी प्रक्रिया पर चर्चा करते हैं:

चरण 1- मार्जिन खाते के साथ व्यापार करने में सक्षम होने के लिए आपको ब्रोकर से अनुरोध करना होगा कि वह आपके लिए मार्जिन खाता खोले। आपको ब्रोकर को एक निश्चित राशि का भुगतान नकद में करना होगा, जिसे न्यूनतम मार्जिन कहा जाता है। ब्रोकर न्यूनतम मार्जिन का उपयोग करता है ताकि कुछ धनराशि को चुकता किया जा सके। वह उस स्थिति में न्यूनतम मार्जिन का उपयोग करता है जब व्यापारी को किसी शेयर पर नुकसान होता है और वह नकदी चुकाने में असमर्थ होता है। जब खाता खुल जाता है तो आपको एक प्रारंभिक मार्जिन (इनिशियल मार्जिन/ आईएम) देना होगा। आईएम कुल कारोबार मूल्य का एक निश्चित प्रतिशत है जो ब्रोकर द्वारा पूर्व निर्धारित होता है। न्यूनतम मार्जिन (मिनिमम मार्जिन/ एमएम) बरकरार रखने का ध्यान रखें। एक बहुत ही अस्थिर दिन पर, स्टॉक की कीमत आपके अनुमान से अधिक गिरने की संभावना रहती है। इस तरह की घटनाओं के लिए आपको पूरे सत्र में न्यूनतम मार्जिन बनाए रखना होगा।

उदाहरण के तौर पर - अगर ₹500 की कीमत वाला वर्लपूल शेयर 5% तक गिर जाता है। आईएम और एमएम  क्रमशः शेयरों के कुल मूल्य का 8% और 4%  है। तो ट्रेड ऑफ 8% - 5% , यानी 3% हुआ, जो कि एमएम से कम है। ऐसी परिस्थिति में  आपको मार्जिन बनाए रखने के लिए ब्रोकर को अधिक धनराशि देनी होगी या वह अपने आप ट्रेड को स्क्वेयर ऑफ कर देगा। 

चरण 2- प्रत्येक प्रशिक्षण सत्र के अंत में आपको अपनी पोजीशन को स्क्वेयर ऑफ करना होगा। अगर आपने शेयर खरीदा है, तो आपको उसे बेचना होगा, अगर आपने सत्र में शेयर बेचे हैं, तो आपको उन्हें अंत में खरीदना होगा। 

चरण 3- व्यापार के बाद इसे डिलिवरी ऑर्डर में परिवर्तित करने के लिए, आपको सत्र के दौरान खरीदे गए सभी शेयरों के लिए नकद तैयार रखना होगा। आपको ब्रोकरों की फीस और अतिरिक्त शुल्क भी चुकाने होंगे।

मार्जिन खाते के लिए आपको कितने पैसे की आवश्यकता है?

सेबी के दिशानिर्देशों के अनुसार, आपको प्रारंभिक मार्जिन के रूप में 50% और मेंनटेनेंस मार्जिन के रूप में 40%  बनाए रखना होगा, जिसे नकद में चुकाना होगा अगर आप मार्जिन खाता खोलना चाहते हैं। आइए प्रारंभिक मार्जिन और मेंटेनेंस मार्जिन पर नजर डालते हैं।

- प्रारंभिक मार्जिन: कुल निवेश के प्रतिशत के रूप में गणना की जाने वाली न्यूनतम राशि को प्रारंभिक मार्जिन कहा जाता है। ब्रोकर पूर्ण निपटान दायित्व को पूरा करने के लिए प्रारंभिक मार्जिन का उपयोग करेगा।

- मेंटेनेंस मार्जिन: ग्राहक द्वारा मार्जिन खाते में बरकरार रखने के लिए आवश्यक न्यूनतम राशि को मेंटेनेंस मार्जिन कहा जाता है। इसकी गणना कोलैटरेल के लिए रखी गई सिक्योरिटीज़ के लेटेस्ट क्लोजिंग प्राइस के अनुसार, बाजार मूल्य के प्रतिशत के रूप में की जाती है।

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कमोडिटी में मार्जिन ट्रेडिंग

अगर आप मल्टी कमॉडिटी एक्सचेंज जैसे कमोडिटी एक्सचेंज पर कमोडिटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस का कारोबार करना चाहते हैं, तो आप मार्जिन खाते का विकल्प चुन सकते हैं। कमोडिटी में व्यापार करते समय मार्जिन आमतौर पर लगभग 3% से 5% होता है।

एक व्यापारी के रूप में, लेवरेज के माध्यम से आप कमोडिटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस में एक अच्छी पोजीशन ले सकते हैं। लेवरेज में मुनाफे की क्षमता होती है, लेकिन इससे आपको नुकसान भी हो सकता है।  यह उन कमोडिटीज़ के मामले में अच्छा विकल्प है जिनकी कीमतें शेयरों की कीमतों की तुलना में अस्थिर होती हैं।

अब जब हम समझ गए हैं कि मार्जिन ट्रेडिंग क्या है, तो आइए, विभिन्न प्रकार के मार्जिन को समझते हैं।

स्टॉक एक्सचेंज के कैश मार्केट सेगमेंट में मार्जिन की गणना करने के कई तरीके हैं। ऐसा करने के तीन तरीके हैं- वैल्यू एट रिस्क (मूल्य पर जोखिम) मार्जिन, एक्सट्रीम लॉस (अत्यधिक नुकसान) मार्जिन और मार्क टू मार्केट मार्जिन।

  • वैल्यू एट रिस्क मार्जिन: स्टॉक की ऐतिहासिक मूल्य प्रवृत्ति के नुकसान के आधार पर हम वैल्यू एट रिस्क मार्जिन में संभावना का अनुमान लगाते हैं। यह सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली विधियों में से एक है। 
  • एक्सट्रीम लॉस मार्जिन: जो स्थितियां वैल्यू एट रिस्क  मार्जिन के तहत कवर नहीं की जाती, एक्सट्रीम लॉस मार्जिन उनके अपेक्षित नुकसान को कवर करता है।
  • मार्क टू मार्केट मार्जिन: ट्रेडिंग दिन के अंत में, इसकी गणना सभी ओपन पोजिशन पर की जाती है। इसकी गणना, उस दिन के लिए शेयर के लेनदेन मूल्य की तुलना समापन मूल्य के साथ करके की जाती है।

मार्जिन खाते के फायदे

मार्जिन खाते के विभिन्न फायदे हैं जिसका आप एक व्यापारी के रूप में आनंद ले सकते हैं, आइए हम उन्हें समझते हैं।

- आप अपने मौजूदा शेयरों को लेवरेज कर, ज्यादा निवेश करने के लिए मार्जिन का उपयोग कर सकते हैं। 

- मार्जिन खाते के लाभ के रूप में,  आप नकद निवेश के आधार पर ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

- गिरते बाजार के मामले में आप शॉर्ट सेलिंग के लिए मार्जिन का उपयोग करके लाभ कमा सकते हैं।

- आप अपनी निवेश क्षमता को बढ़ाने के लिए मार्जिन खातों का उपयोग करके, अपने मुख्य निवेश पोर्टफोलियो में विविधता ला सकते हैं।

- जब शुरुआती निवेश राशि बड़ी हो, तो एफ एंड ओ बाजार में निवेश करने के लिए मार्जिन खाते का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

- अगर ऋण की राशि प्रारंभिक मार्जिन से अधिक नहीं है, तो आप अपनी सुविधानुसार पुनर्भुगतान कर सकते हैं।

क्या आपके लिए मार्जिन ट्रेडिंग सही है?

अब जब हम समझ गए हैं कि मार्जिन और मार्जिन खाता क्या है, तो जानते हैं कि क्या यह आपके लिए सही विकल्प है। मार्जिन ट्रेडिंग खाता खोलने से पहले आपको अपनी आवश्यकताओं और निवेश लक्ष्यों को समझना चाहिए। मार्जिन ट्रेडिंग के कई फायदे हैं, हालांकि इसमें भी मुनाफे और नुकसान की काफी गुंजाईश होती है। अगर आप मार्जिन ट्रेडिंग के बारे में सोच रहे हैं, तो आपको निम्नलिखित पॉइंट को ध्यान में रखना चाहिए:

  1. आपके पास जोखिम की उच्च सहनशीलता होनी चाहिए।
  2. आपको अस्थिर स्थितियों में शांति रखने में सक्षम होना चाहिए।
  3. आपको लेवरेज का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

जो निवेशक जोखिम झेलने की कम क्षमता रखते हैं और रूढ़िवादी हैं, उन्हें मार्जिन ट्रेडिंग के बारे में नहीं सोचना चाहिए। मार्जिन ट्रेडिंग, अनुकूल परिस्थितियों में छोटी अवधि के व्यापार के लिए सबसे सही है। जब आपके पास एक कंपनी के बारे में ऐसी विश्वसनीय जानकारी होती है जो उसके शेयर की कीमत को प्रभावित कर सकती है, तो यहां मार्जिन कारोबार काम आता है क्योंकि आप उस कंपनी के शेयर में ज्यादा एक्सपोजर लेकर मुनाफा कमा सकते हैं।  मार्जिन ट्रेडिंग को लॉन्ग टर्म स्पेक्यूलेटिव ट्रेड के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

अब तक आपने पढ़ा

- किसी सेवा की बिक्री की कीमत और उसके उत्पादन की लागत के बीच के अंतर को मार्जिन कहा जाता है।

- मार्जिन ट्रेडिंग में आप ब्रोकर से उधार लिए गए फंड से, अपने खाते में मौजूद नकदी की तुलना में अधिक शेयर खरीद सकते हैं।

- सेबी के दिशा निर्देशों के अनुसार आपको प्रारंभिक मार्जिन के रूप में 50% और मेंटेनेंस मार्जिन के रूप में 40% बनाए रखना होगा। अगर आप मार्जिन खाता खोलना चाहते हैं, तो इस राशि को  नकद में चुकाना होगा।

- मार्जिन ट्रेडिंग शॉर्ट सेलिंग के लिए है और इसे लॉन्ग टर्म स्पेक्यूलेटिव ट्रेड के लिए उपयोग करने की सलाह नहीं दी जाती।

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