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इंडेक्स फ्यूचर का व्यापार

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पिछले अध्याय में हम ने हेजिंग के बारे में सीखा और यह जाना कि यह कैसे आपको नुकसान से बचाने में मदद करती है। इस अध्याय में हम पूरी कोशिश करेंगे कि आपके ज्ञान में बढ़ोतरी हो। आइए, हम ओपन इंटरेस्ट को समझते हैं जो बेहतर ट्रेडिंग सत्र (सेशन) और मुनाफे के लिए आवश्यक है।

ओपन इंटरेस्ट, कुल बकाया डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट हैं जो किसी संपत्ति के लिए सेटल नहीं हुए होते।  ओपन इंटरेस्ट आमतौर पर फ्यूचर और ऑप्शंस से जुड़ा होता है। चलिए, हम समझते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट क्या है और फ्यूचर और ऑप्शंस के लिए कॉन्ट्रैक्ट कैसे बनाए जाते हैं। फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट बनाने के लिए एक खरीदार और विक्रेता होना चाहिए, जिन्होंने कॉन्ट्रैक्ट का पालन करना चुना हो। एक कॉन्ट्रैक्ट अंतर्निहित एसेट के सौ शेयरों के बराबर होता है। एक कॉन्ट्रैक्ट तब तक ओपन रहता है जब तक सामने वाली पार्टी ने इसे क्लोज करना ना चुना हो।  

 आपको ओपन इंटरेस्ट के बारे में इन महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखना चाहिए:

  • ओपन इंटरेस्ट कुल खरीदे या बेचे गए कॉन्ट्रैक्टों की संख्या है।
  • जब कॉन्ट्रैक्ट जोड़े जाते हैं, तो ओपन इंटरेस्ट बढ़ जाता है। और जब कॉन्ट्रैक्ट स्क्वेयर ऑफ कर दिए जाते हैं, तो ओपन इंटरेस्ट कम हो जाता है।
  • ओपन इंटरेस्ट में वृद्धि से बाजार में पैसा प्रवाहित होता है। और ओपन इंटरेस्ट में कमी के साथ, पैसा लिक्विडेट या आउटफ्लो हो जाता है।
  • ओपन इंटरेस्ट बाजार की गतिविधि का माप है क्योंकि यह बाजार में धन के प्रवाह को मापता है।

 व्यापार के दो पक्ष, कॉन्ट्रैक्ट की खरीद और बिक्री हैं। वॉल्यूम के साथ ओपन इंटरेस्ट की तुलना करने में-

  • ओपन इंटरेस्ट का मतलब है कि जो कॉन्ट्रैक्ट ओपन और लाइव है।
  • वॉल्यूम एक दिन में निष्पादित होने वाले ट्रेड की संख्या को बताता है।

आपको ध्यान देना चाहिए कि ओपन इंटरेस्ट में बदलाव से बाजारों पर कोई दिशात्मक दृष्टिकोण नहीं मिलता है। चूंकि ओपन इंटरेस्ट वह डाटा है जो निरंतर और संचयी होता है, इसलिए आपको उन घटनाओं पर ध्यान रखना चाहिए, जहां ओपन इंटरेस्ट हाई लेवरेज को दर्शाता करता है, जो सामान्य नहीं है।

 

निवेशक बी

निवेशक ए

ओपन

क्लोज 

ओपन

बढ़ोतरी

स्थिर

क्लोज

स्थिर

गिरावट

अब हम ओपन इंटरेस्ट को समझने के लिए एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिये कि राजेश, मोहित और प्रवीण समान फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट का कारोबार कर रहे हैं। अब, राजेश एक लॉन्ग ट्रेड में प्रवेश करने के लिए दो कॉन्ट्रैक्ट खरीदता है जो ओपन इंटरेस्ट को दो से बढ़ाता है। मोहित भी लॉन्ग ट्रेड में जाने का फैसला करता है और छह कॉन्ट्रैक्ट खरीदता है और ओपन इंटरेस्ट को बढ़ाकर आठ कर देता है। अगर प्रवीण भी बाजार में लॉन्ग करने और दो कॉन्ट्रैक्ट खरीदने का फैसला करता है तो ओपन इंटरेस्ट फिर से बढ़कर दस हो जाएगा।

एफ-एंड-ओ में ओपन इंटरेस्ट डाटा की अवधारणा

वह मुख्य पहलू जिसे विश्लेषक और व्यापारी अक्सर देखते हैं वह है ओपन इंटरेस्ट (ओआई) डाटा। ओआई सभी ओपन पोजीशन को संदर्भित करता है। इसे और अच्छे से समझने के लिए हम इस उदाहरण को देखते हैं -

परिदृश्य 1: राजेश ने निफ्टी फ्यूचर्स का 1 लॉट खरीदा। रवि ने निफ्टी फ्यूचर्स का 1 लॉट बेचा। यहां पर निफ्टी में मार्केट ओआई 1 लॉट है। अब राजेश और रवि अपनी स्थिति को आपस में बदलने का फैसला करते हैं जो निफ्टी के ओआई को 0 तक नीचे ले आएगा।

परिदृश्य 2: राजेश ने निफ्टी फ्यूचर्स का 1 लॉट खरीदा, और रवि ने 1 लॉट फ्यूचर्स  बेचा। यहां निफ्टी का मार्केट ओआई का 1 लॉट हो जाता है। राजेश अगले ही दिन मोहित को अपना लॉट बेच देता है। इस मामले में, निफ्टी 1 लॉट पर बना हुआ है क्योंकि पार्टी बदल गई है पर लॉट नहीं।

परिदृश्य 3: राजेश ने निफ्टी फ्यूचर्स के 1 लॉट को खरीदा और 1 लॉट बेचा। और वहीं रवि ने निफ्टी का 1 लॉट खरीदा और मोहित ने 1 लॉट बेचा। इसी तरह से प्रवीण ने निफ्टी के 8 लॉट खरीदे और सुषमा ने अपने 8 लॉट बेचे। इन संपूर्ण गतिविधियों में, निफ्टी फ्यूचर्स का कुल ओआई वही रहता है, यानी 10 लॉट।

इन परिदृश्यों में, हम उन चरणों को समझ गए हैं जो फ्यूचर्स से संबंधित ओपन इंटरेस्ट को बढ़ाने और कम करने के लिए उठाए गए हैं।

हम कह सकते हैं कि निफ्टी कॉन्ट्रैक्ट का ओआई  नए प्रतिभागियों के साथ विस्तार करेगा जो निफ्टी में नए पोजीशन की शुरुआत करेंगे।

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 एक व्यापारी को ओआई  का संकेत

वो व्यापारी और निवेशक जो इक्विटी में पोजीशन लेना चाहते हैं वे ओआई शिफ्ट का उपयोग करते हैं क्योंकि यह कुछ जरूरी और उपयोगी बात बताता है। ओआई शिफ्ट, इक्विटी में पोजीशन लेने की चाह रखने वाले व्यापारियों और निवेशकों तक के लिए कुछ दिलचस्प सुराग या कहें कि सूचना प्रदान कर सकते हैं। उसमें से कुछ संकेत यह हैं -

  • जब स्टॉक में रूचि बढ़ती है तो स्टॉक के ओआई में वृद्धि होती है। स्वामित्व बढ़ जाता है और ज्यादा नए निवेशक स्टॉक में पोजीशन लेते हैं।
  • ओआई में कमी आती है जब रैली कर चुके शेयर इस बात का संकेत देते हैं कि रैली खत्म होने वाली है।  

जो डाटा ओआई  प्रदान करता है, वह ट्रेंड या बाजार स्थिति में बदलाव के अहम मोड़ को पहचानने में मदद करता है। यह निर्धारित करने में सक्षम होना कि ट्रेंड कब बदल रहा है, निवेशकों और व्यापारियों को मुनाफा बनाने की अनुमति देता है। आपको कई मामलों में कुछ स्पष्ट संकेत मिल सकते हैं। जब स्टॉक अपने निम्नतम स्तर पर पहुंचने के बाद चढ़ाव की ओर बढ़ने लगता है, तो अधिक प्रमुख ओआई  के संस्थागत बिल्ड-अप के साथ, ताजा ओआई  बिल्ड-अप होने लगता है।

एमएफ और एफआईआई के मामले में, जब एक्सचेंज कुल जमा आंकड़ों को रिपोर्ट करते हैं, तो हमें टर्नअराउंड या ट्रेंड में बदलाव के बारे में एक महत्वपूर्ण संकेत मिलता है। अगर आप टॉप पर ट्रेंड रिवर्सल की पहचान कर रहे हैं तो इसका विपरीत भी हो सकता है।

ओआई डाटा और स्टॉक मूल्य के बीच तुलना

 अगर आप ओआई  मूवमेंट की प्रकृति और मध्यम अवधि के प्राइस ट्रेंड की तुलना कर रहे हैं, तो आपको स्टॉक के बारे में बेहतर आइडिया मिलेगा। और यह ओआई  डाटा का सबसे अच्छा उपयोग है। स्टॉक मूल्य के लिए ओआई  डाटा के उपयोग को समझने के लिए कुछ आवश्यक पॉइंट निम्नलिखित हैं:

  1. अगर स्टॉक का ओपन इंटरेस्ट बढ़ता है और कीमत भी लगातार बढ़ती है तो, इसे एक अच्छे संकेत के रूप में लिया जा सकता है।
  2. यह संकेत है कि निवेशकों को स्टॉक में दिलचस्पी है, और स्वामित्व का विस्तार भी हो रहा है। यह एक महत्वपूर्ण डाटा पॉइंट है जो व्यापारियों और निवेशकों को स्टॉक रैली की स्थिरता को परखने में मदद करता है।
  3. अगर स्टॉक गिर रहा है, लेकिन कीमत बढ़ रही है तो यह एक संकेत है कि बाजार कमजोर हो रहा है।
  4. जब शॉर्ट पोजिशन में फंसे होते हैं और घाटा बुक करते हैं, तो यह शॉर्ट कवरिंग का मामला होता है। इस मामले में, शॉर्ट कवरिंग खत्म होते ही स्टॉक की कीमतें सही हो जाएंगी।
  5. जब कीमत गिर रही होती हैं, लेकिन ओआई बढ़ रहा होता है, तो इसे एक अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। यह दर्शाता करता है कि नई शॉर्ट पोजीशन बन रही है, जिसका अर्थ है कि शेयर से बाजार की अपेक्षाएं नकारात्मक हैं। इसे कमजोरी का संकेत माना जाता है क्योंकि शॉर्टिंग उस स्थिति में होती है जहां व्यापारी बाजारों में गहन सुधार की उम्मीद कर रहे होते हैं।

 जब ओआई गिर रहा होता है, और कीमत भी गिर रही होती है, तो हमारे पास दो स्पष्टीकरण हो सकते हैं। पहला यह है कि लॉन्ग पोजीशन खत्म हो रही हैं जो बाजारों में तनाव का संकेत देता है। हालांकि, दूसरी ओर, यह भी पता चलता है कि एफएंडओ लेवरेज के संबंध में स्टॉक लाइट हो जाएगा। नकदी बाजार के निवेशक इसे सकारात्मक संकेत मानते हैं।

 हम कह सकते हैं कि ओआई  एक महत्वपूर्ण बाजार संकेतक है, जिसकी तुलना प्राइस मूवमेंट के साथ करने पर कुछ रोमांचक बाजार संकेत मिल सकते हैं।

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