6. लॉन्ग स्ट्रैडल को समझना और उपयोग करना

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कई बार ऐसा होता है कि आप बाजार में कदम रखने से पहले उसका आकलन करने में बहुत समय बिता देते हैं और ऐसा होता है कि आप जैसे ही व्यापार शुरू करते हैं, बाजार अप्रत्याशित रूप से आगे बढ़ने लगता है, है ना? तब आपके द्वारा बनाई गई रणनीतियां, आपकी योजना और प्रयास व्यर्थ हो जाते हैं। 

एक अनुभवी निवेशक दिशात्मक दांव से परे रहता है। वह उन रणनीतियों की योजना बनाता है जो बाजार की अनिश्चितता से सुरक्षित हैं। ऐसी रणनीतियां जो बाजार की दिशा में अपनी लाभकारिता को आधार नहीं बनाती हैं उन्हें बाजार-निष्पक्ष या मार्केट न्यूट्रल रणनीति कहा जाता है। इनमें से एक लॉन्ग स्ट्रैडल है। लेकिन लॉन्ग स्ट्रैडल क्या है? चलिए जानते हैं।

एक लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति क्या है?

सभी मार्केट- न्यूट्रल रणनीतियों के मुकाबले,  लॉन्ग स्ट्रैडल लागू करने के लिए सबसे सरल रणनीति में से एक है। एक बार इसे लागू करने के बाद बाजार की गतिविधि की दिशा का, लाभ और हानि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। बाजार की गतिविधि दोनों दिशाओं में हो सकती है लेकिन जो चीज स्थिर रहती है वह है उसकी चाल। ट्रेंड से बेअसर, जब बाजार में कोई भी चाल जारी रहती है, तो एक पॉजिटिव मुनाफा या घाटा उत्पन्न होता है।

एक व्यापारी एक लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति में एक लॉन्ग कॉल और एक लॉन्ग पुट, दोनों को खरीदता है। उसे यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता होती है कि दोनों एक ही अंतर्निहित एसेट से संबंधित हों, एक्सपायरी एक हो और एक ही स्ट्राइक का हिस्सा हो। स्ट्राइक मूल्य एट-द-मनी के करीब या उसके समान होना चाहिए। कॉल पर मुनाफा तब होता है जब अंतर्निहित सिक्योरिटी की कीमत ऊपर की ओर जाती है और पुट पर मुनाफा तब होता है जब सिक्योरिटी की कीमत नीचे की ओर होती है। तो ये दो घटक किसी भी दिशा में छोटे बदलावों के प्रभाव को खत्म कर देते हैं। एक स्ट्रैडल का उद्देश्य अंतर्निहित एसेट द्वारा किसी भी दिशा में उचित रूप से मजबूत गतिविधि से लाभ कमाना है।

एक लॉन्ग स्ट्रैडल को समझना

एक लॉन्ग स्ट्रैडल एक शर्त है जिसके हिसाब से अंतर्निहित एसेट की कीमत में महत्वपूर्ण गतिविधि दिखेगी जो ऊपर या नीचे की ओर होगी। कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसकी दिशा क्या है, इसकी प्रॉफिट प्रोफाइल समान होती है। व्यापारी को भरोसा होता है कि एसेट की कीमत, महत्वपूर्ण नई जानकारी के आने पर कम अस्थिरता की स्थिति से ज्यादा अस्थिरता की ओर बढ़ेगी।

लॉन्ग स्ट्रैडल का उपयोग कब किया जाता है?

व्यापारी महत्वपूर्ण समाचार रिपोर्ट जैसे अर्निंग्स रिलीज, राजनीतिक कार्रवाई, एक नया कानून पारित होना या चुनाव परिणाम, से पहले एक लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति का उपयोग करते हैं। यह अनुमान लगाया जाता है कि बाजार की गतिविधियां इस तरह के कार्यक्रम से जुड़ी होती हैं, इसलिए व्यापार अस्थिर और छोटी रेंज में होने की संभावना होती है। कार्यक्रम के होते ही सभी रुकी हुई तेजी या मंदी शुरू हो जाती है, जो अंतर्निहित एसेट को तेजी से आगे बढ़ाती है। लेकिन चूंकि प्रभाव अज्ञात है इसलिए यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि इसका परिणाम बुलिश होगा या बेयरिश। ऐसे मामले में लॉन्ग स्ट्रैडल एक सही रणनीति है जिसका उपयोग करके किसी भी परिणाम से फायदा उठाया जा सकता है। लेकिन यह कहने की बात नहीं है कि हर निवेश रणनीति की तरह एक लॉन्ग स्ट्रैडल की भी अपनी कमियां और चुनौतियां हैं।

एक लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति का लाभ

लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति के प्राथमिक लाभों में से एक यह है कि यह सीमित जोखिमों के साथ असीमित मुनाफे का अवसर प्रदान करता है। इसमें लाभ की संभावना असीमित है क्योंकि घटना के परिणामस्वरूप शेयर की कीमतें बढ़ सकती हैं। जब शेयर की कीमतें नीचे की ओर जाती हैं, तब भी मुनाफे की क्षमता होती है क्योंकि शेयरों की कीमत शून्य तक गिर सकती है। निवेशक को कीमत किस दिशा में बढ़ेगी, इस बारे में परेशान होने की जरूरत नहीं होती। बस जरूरत होती है तो किसी भी दिशा में एक मजबूत और बड़ी अस्थिरता की।

शेयर के एक्सपायरी के पॉइंट पर इसके 2 संभावित ब्रेकईवन पॉइंट्स हो सकते हैं। एक स्ट्राइक मूल्य और कुल प्रीमियम एक साथ लेकर मिलता है। दूसरा, स्ट्राइक मूल्य से कुल प्रीमियम घटाकर मिलता है। एक लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति तब मुनाफा कमाती है जब अंतर्निहित शेयर मूल्य ऊपर उठकर ब्रेकईवन पॉइंट के ऊपरी बिंदु को पार कर देता है या निचले बिंदु से नीचे गिर जाता है।

लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति के जोखिम

लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन रणनीति में निहित खतरों में से एक यह है कि हो सकता है बाजार किसी घटना पर उतनी मजबूत प्रतिक्रिया ना दे जितनी की अपेक्षा थी। यह कारक इस तथ्य से और मजबूत हो जाता है कि घटना को होना तय था और ऑप्शन विक्रेता इस बात से अवगत हैं। इस तरह वे घटना का अनुमान लगाते हैं और पुट और कॉल विकल्प की कीमतें बढ़ाते हैं। तो  इसका मतलब यह है कि इस रणनीति का उपयोग करते समय जो लागत खर्च होती है वह किसी भी एक दिशा को चुनने और उसपर दांव लगाने की लागत के मुकाबले  ज्यादा होती है। यह सामान्य परिस्थितियों में, दोनों दिशाओं पर दांव लगाने की तुलना में भी अधिक महंगा है।

चूंकि ऑप्शन विक्रेताओं को यह पता होता है कि निर्धारित घटना ने इससे जुड़े जोखिमों को बढ़ा दिया है, इसलिए वे अनुमानित घटना के मोटे तौर पर 70% को कवर करने के लिए कीमतों में वृद्धि करते हैं, जिसका उन्होंने अनुमान लगाया होता है। तो यह वास्तविक चाल से मुनाफा कमाने की कठिनाई को बढ़ाता है, क्योंकि स्ट्रैडल की लागत में पहले से ही किसी भी दिशा में छोटी मूल्य गतिविधियों की लागत शामिल है। यदि भविष्यवाणी की गई घटना से अंतर्निहित सिक्योरिटी के मूल्य में अनुमान के अनुसार अहम परिवर्तन नहीं होता है, तो खरीदे गए ऑप्शन बेकार साबित हो सकते हैं और एक्सपायर हो सकते हैं। तब व्यापारी को नुकसान का सामना करना पड़ेगा।

आप एक लॉन्ग स्ट्रैडल का निर्माण कैसे करते हैं?

जैसा कि हम पहले देख चुके हैं कि लंबी अवधि में सीमित जोखिम पर असीमित लाभ मिलता है। अगर एसेट की कीमत बढ़ती है तो लाभ संभावित रूप से असीमित होता है। अगर एसेट की लागत शून्य को छूती है  तो आप जो लाभ कमाते हैं, वह स्ट्राइक मूल्य से आपके द्वारा भुगतान किए गए ऑप्शन प्रीमियम को घटाकर मिलने वाले आंकड़े के बराबर होगा। किसी भी परिदृश्य में आपके द्वारा लिया गया अधिकतम जोखिम पोजीशन में प्रवेश करने की कुल लागत होता है।

जब अंतर्निहित एसेट का मूल्य बढ़ता है, तो मुनाफे की गणना निम्न तरीके से की जाती है-

मुनाफा = अंतर्निहित एसेट की कीमत - कॉल ऑप्शन का स्ट्राइक मूल्य- भुगतान किया गया नेट प्रीमियम 

जब अंतर्निहित एसेट का मूल्य कम हो जाता है, तो मुनाफे की गणना निम्न तरीके से की जाती है-

मुनाफा = पुट ऑप्शन का स्ट्राइक मूल्य – अंतर्निहित एसेट की कीमत - भुगतान किया गया

नेट प्रीमियम 

इसलिए अधिकतम नुकसान भुगतान किया गया कुल प्रीमियम और संबंधित व्यापार कमीशन है। जब अंतर्निहित एसेट की कीमत एक्सपायरी पर ऑप्शन के स्ट्राइक मूल्य के साथ मेल खाती है, तो आपको यह नुकसान उठाना पड़ता है।

एक लॉन्ग स्ट्रैडल का वैकल्पिक उपयोग

कई व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि  लॉन्ग स्ट्रैडल का उपयोग अलग तरीके से किया जा सकता है। यह प्रत्याशित अस्थिरता में संभावित वृद्धि का फायदा उठाकर किया जा सकता है। यह रणनीति घटना के घटित होने से कुछ सप्ताह पहले की अवधि के लिए लागू की जानी चाहिए, लेकिन घटना होने के ठीक एक या दो दिन पहले अपने मुनाफे को क्लेम कर लें। यह विधि ऑप्शन की डिमांड में वृद्धि से लाभ कमाने की एक कोशिश है। व्यापारी बढ़ती मांग का लाभ उठाते हैं जो इन ऑप्शन की नहित अस्थिरता को प्रभावित करता है।

निहित अस्थिरता वह वेरिएबल है जो ऑप्शन की कीमत पर सबसे अधिक प्रभाव डालती है। तो निहित अस्थिरता बढ़ने से हर ऑप्शन की कीमत में बढ़ोतरी होती है, चाहे वे पुट हो या कॉल। यदि आप कॉल और पुट दोनों रखते हैं, तो यह रणनीति के दिशात्मक जोखिम को दूर कर देती है। अब  जो बचता है वह केवल इसकी निहित अस्थिरता है। इसलिए ट्रेड को अस्थिरता बढ़ने से पहले शुरू किया जाना चाहिए, और निहित अस्थिरता के चरम पर पहुंचने पर बंद कर देना चाहिए। इससे ट्रेड लाभदायक ही होता है।

इस रणनीति की एक कमी है। यह स्वाभाविक है कि समय के साथ ऑप्शन अपना मूल्य खो देते हैं। कीमतों में इस प्राकृतिक कमी के प्रभाव को हटाने के लिए, आपको उन ऑप्शंस का चयन करना चाहिए जिनकी एक्सपायरी पर समय क्षय का सबसे कम प्रभाव पड़े।

अस्थिरता का प्रभाव

अस्थिरता शेयर मूल्य में उतार-चढ़ाव के प्रतिशत को मापती है। जब आप लॉन्ग स्ट्रैडल को अंजाम देने की योजना बनाते हैं तो अस्थिरता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कीमतों और लाभ में वृद्धि के साथ अस्थिरता में भी बढ़ोतरी होती है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह अस्थिरता ही है जो लॉन्ग स्ट्रैडल को बनाती या बिगाड़ती है। इसलिए लॉन्ग स्ट्रैडल को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अस्थिरता का गहन मूल्यांकन आवश्यक है।

आप स्ट्रैडल का उपयोग करके अपने धन को दोगुना कर सकेंगे अगर-

  1. आप महीने की शुरुआत में लॉन्ग स्ट्रैडल उपयोग करते हैं
  2. जब आप लॉन्ग स्ट्रैडल की शुरुआत करते हैं, तो अस्थिरता कम होती है
  3. स्ट्रैडल की स्थापना के बाद की अवधि में अस्थिरता दोगुनी हो जाती है

शेयर मूल्य में परिवर्तन का प्रभाव

जब शेयर की कीमत स्ट्रैडल की स्ट्राइक मूल्य के करीब पहुंचती है या उसको छू जाती है, तो कॉल का पॉजिटिव डेल्टा और पुट का नेगेटिव डेल्टा एक दूसरे को लगभग ऑफसेट कर देता है। इसलिए जब स्ट्राइक मूल्य के पास होने पर शेयर मूल्य में मामूली बदलाव होते हैं, तो स्ट्रैडल की कीमत केवल मामूली रूप से बदल जाती है। इस पॉइंट पर स्ट्रैडल के "निकट-शून्य डेल्टा" होने की बात कही जाती है। डेल्टा एक अनुमान है कि शेयर मूल्य परिवर्तन के एवज में ऑप्शन की कीमत कितनी बदलेगी।

लेकिन अगर शेयर की कीमत काफी तेजी से बढ़ती या गिरती है, तो स्ट्रैडल की कीमत बढ़ जाती है। जब एक शेयर की कीमत बढ़ जाती है, तो कॉल की कीमत, पुट की कीमत में गिरावट से अधिक बढ़ जाती है। जब शेयर की कीमत गिरती है, तो पुट का मूल्य, कॉल की कीमत में गिरावट से अधिक बढ़ जाता है।

समय का प्रभाव

ऑप्शन की कुल कीमत का वो भाग जिसकी टाइम वैल्यू होती, वह एक्सपायरी के करीब आने के साथ कम होती जाती है। समय क्षय या टाइम डीके का अर्थ यही होता है। चूंकि लॉन्ग स्ट्रैडल में दो लॉन्ग ऑप्शन होते हैं, इसलिए यह सिंगल ऑप्शन वाली पोजीशन की तुलना में टाइम डीके के प्रति ज्यादा संवेदनशील होता है। शेयर की कीमत में बदलाव नहीं होने पर समय बीतने के साथ लॉन्ग स्ट्रैडल तेजी से पैसे खोने लगते हैं।

एक्सपायरी के बाद क्या होता है?

एक्सपायरी पर तीन परिणाम संभव हैं। स्टॉक की कीमत स्ट्रैडल के स्ट्राइक मूल्य के समान हो सकती है, या इसके ऊपर या नीचे हो सकती है। अगर एकसपायरी पर शेयर मूल्य और स्ट्रैडल का स्ट्राइक मूल्य समान है, तो कॉल और पुट दोनों बेकार ही एक्सपायर हो जाते हैं। इस मामले में कोई शेयर पोजीशन नहीं बनाई जाती।

अगर शेयर की कीमत स्ट्राइक मूल्य से ऊपर है, तो पुट बेकार हो जाता है, और लॉन्ग कॉल का उपयोग किया जाता है, और शेयर को स्ट्राइक मूल्य पर खरीदा जाता है। इस मामले में एक लॉन्ग पोजीशन बनाई जाती है।

यदि शेयर की कीमत स्ट्राइक मूल्य से कम है, तो कॉल एक्सपायर हो जाती है। फिर लॉन्ग पुट का उपयोग किया जाता है, और स्ट्राइक मूल्य वह मूल्य होता है जिस पर शेयर बेचा जाता है। इससे शेयर में शॉर्ट पोजीशन बनती है।

निष्कर्ष

अब जब हम लॉन्ग स्ट्रैडल ऑप्शन के महत्वपूर्ण पहलू को समझ गए हैं तो हम अगले अध्याय में शॉर्ट स्ट्रैडल के बारे में जानने के लिए तैयार हैं!

अब तक आपने पढ़ा

  1. ऐसी रणनीतियां जो बाजार की दिशा को आधार नहीं बनाती, उन्हें ‘बाजार निष्पक्ष’ या 'डेल्टा निष्पक्ष' कहा जाता है।
  2. लॉन्ग स्ट्रैडल जैसी बाजार निष्पक्ष रणनीति, बाजार के किसी भी दिशा में जाने पर मुनाफा कमाती हैं।
  3. लॉन्ग स्ट्रैडल के लिए आपको एटीएम कॉल और पुट ऑप्शन को एक साथ खरीदना होगा। ऑप्शन एक ही अंतर्निहित, एक ही स्ट्राइक और एक ही एक्सपायरी से संबंधित होने चाहिए।
  4. कॉल और पुट खरीदकर  व्यापारी दिशा पर दांव लगाता है।
  5. अधिकतम नुकसान नेट प्रीमियम भुगतान के बराबर है और यह उस स्ट्राइक पर होता है जिस पर लॉन्ग स्ट्रैडल की शुरुआत की गई होती है।
  6. ऊपरी ब्रेकईवन ‘स्ट्राइक + नेट प्रीमियम’ होता है। निचला ब्रेकईवन 'स्ट्राइक - नेट प्रीमियम'  होता है।
  7. लॉन्ग स्ट्रैडल में डेल्टा शून्य हो जाता है।
  8. रणनीति के उपयोग के समय अस्थिरता कम होनी चाहिए।
  9. रणनीति की होल्डिंग अवधि के दौरान अस्थिरता बढ़नी चाहिए।
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