4. बेयर कॉल स्प्रेड को समझना और उपयोग करना

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बेयर कॉल स्प्रेड क्या है?

बेयर कॉल स्प्रेड एक दो-पैर वाली ऑप्शन ट्रेडिंग स्ट्रेटर्जी है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी का बाजार का नजरिया बेयरिश होता है । इस रणनीति की मदद से, निवेशक एक कॉल ऑप्शन (शॉर्ट कॉल लेग) बेचता है और इसी के साथ-साथ एक अलग कॉल ऑप्शन (लॉन्ग कॉल लेग) खरीदता है और वह इसे एक ही अंतर्निहित सिक्योरिटी और एक्सपायरी डेट पर खरीदता है, लेकिन उच्च स्ट्राइक मूल्य पर। इसलिए वह बेची गई कॉल पर एक उच्च ऑप्शन प्रीमियम की तुलना में खरीदे गए कॉल के लिए भुगतान की गयी राशि से नेट प्रॉफ़िट कमाता है ।  

और क्योंकि इस रणनीति का उपयोग ऑप्शन व्यापारियों द्वारा एसेट के प्रदर्शन के एक बेयरिश व्यू के साथ प्रीमियम उत्पन्न करने के लिए किया जाता है, इसीलिए इसे लोकप्रिय रूप से “बेयर कॉल स्प्रेड” कहा जाता है । हालांकि जब कोई बेयर कॉल स्प्रेड स्ट्रेटर्जी शुरू करता है तो उन्हें अपना प्रीमियम अपफ्रंट मिलता है। इसलिए, इसे 'शॉर्ट कॉल स्प्रेड' या 'क्रेडिट कॉल स्प्रेड' के रूप में भी जाना जाता है।

बेयर कॉल स्प्रेड की रणनीति कब उपयोगी होती है?

अब जब हम समझते हैं कि एक बेयर कॉल स्प्रेड क्या है, तो यहां कुछ परिस्थितियां दी गयी हैं जहां यह रणनीति उपयोगी साबित हो सकती है:

 - मामूली गिरावट की आशंका: अगर व्यापारी स्टॉक या इंडेक्स के प्रदर्शन में बड़ी गिरावट के बजाय मामूली गिरावट की उम्मीद करता है, तो यहाँ बेयर कॉल स्प्रेड की रणनीति बहुत उपयोगी है । ऐसा इसलिए है क्योंकि कम गिरावट से संभावित लाभ कम होते हैं और एक ऑप्शन के प्रीमियम तक सीमित होते हैं। अगर गिरावट बहुत ज्यादा होगी, तो संभावित लाभ बड़ा होगा। इसलिए, ट्रेडिंग रणनीतियों के रूप में एक पुट स्प्रेड, शॉर्ट सेल, या पुट खरीदना ज्यादा उपयुक्त होगा।

 - उच्च अस्थिरता: भले ही बेयर कॉल स्प्रेड के लॉन्ग व शॉर्ट लेग अस्थिरता के शॉक वैल्यू को पूरा करते हैं, लेकिन बाजार के अस्थिर होने पर यह रणनीति बेहतर भुगतान करती है या कहें कि बेहतर मुनाफा देती है । ऐसा इसलिए है क्योंकि जब निहित अस्थिरता अधिक होती है, तो प्रीमियम से ज्यादा आय उत्पन्न की जा सकती है ।

- रिस्क मैनेज करना: कॉल ऑप्शन बेचना, विक्रेता की ओर से पहले से तय स्ट्राइक मूल्य पर सिक्योरिटी प्रदान करने के लिए एक दायित्व को पूरा करता है । अगर कॉल की एक्सपायरी  से पहले सिक्योरिटी का बाजार मूल्य दोगुना या तिगुना हो जाता है, तो नुकसान होने की एक बड़ी संभावना रहती है । एक बेयर कॉल स्प्रेड स्ट्रेटर्जी एक कॉल ऑप्शन के अनकवर्ड शॉर्ट सेल पर होने वाले संभावित नुकसान को सीमित करती है।  हालांकि, यह रणनीति, लॉन्ग लेग कॉल विक्रेता द्वारा कमाई गयी प्रीमियम की राशि को कम कर देती है, जिससे रिस्क काफी कम हो जाता है जो इसकी लागत को सही ठहराता है।

बेयर कॉल स्प्रेड की गणना

यहां बेयर कॉल स्प्रेड रणनीति से जुड़ी कुछ गणनाएं दी गई हैं।

अधिकतम नुकसान: तब होता है जब स्टॉक या इंडेक्स लॉन्ग कॉल स्ट्राइक मूल्य पर  या उससे ऊपर ट्रेड करता है।

अधिकतम लॉस = शॉर्ट कॉल और लॉन्ग कॉल स्ट्राइक प्राइस के बीच अंतर - नेट प्रीमियम प्राप्त + भुगतान किया गया कमीशन 

अधिकतम लाभ: यह तब होता है जब स्टॉक या इंडेक्स लॉन्ग कॉल स्ट्राइक मूल्य पर या उससे नीचे ट्रेड करता है।

अधिकतम लाभ = नेट प्रीमियम प्राप्त - भुगतान किया गया कमीशन 

ब्रेक-इवन = शॉर्ट कॉल स्ट्राइक प्राइस + प्राप्त हुआ नेट प्रीमियम

बेयर कॉल रणनीति उपयोग करने के लाभ

- आप अनकर्वड कॉल ऑप्शन बेचने की तुलना में, बेयर कॉल स्प्रेड रणनीति का उपयोग करके कम रिस्क की संभावना के साथ ऑप्शन प्रीमियम आय अर्जित कर सकते हैं ।

- यह रणनीति 'समय क्षय' के सिद्धांत को लागू करती है जो एक समय अवधि के दौरान एक ऑप्शन के मूल्य में आई गिरावट है । यह ऑप्शन रणनीति में शामिल करने के लिए एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। यहां तक ​​कि अगर अधिकांश ऑप्शन का उपयोग नहीं किया जाता है या वे एक्सपायर नहीं होता है, तो बेयर कॉल स्प्रेड धारक को लाभ होता रहता है क्योंकि वे अपने पिछले ऑप्शन को बेचने की तुलना में अधिक स्ट्राइक मूल्य पर कॉल ऑप्शन खरीद चुके होते हैं।

- जो बेयर कॉल स्प्रेड चुना जाता है वह शॉर्ट लेग कॉल और लॉन्ग लेग कॉल की स्ट्राइक कीमतों के बीच का अंतर होता है। यह स्प्रेड आपकी जोखिम झेलने की क्षमता के हिसाब से हो सकता है। उदाहरण के लिए, कुछ हद तक रूढ़िवादी व्यापारी एक लीन स्प्रेड चुन सकता है, जिसमें कीमतों के बीच अंतर सबसे कम होता है। यह अधिकतम मुनाफे की क्षमता को कम करते हुए अधिकतम जोखिम को कम करेगा। दूसरी तरफ, अधिक आक्रामक व्यापारी एक वाइड बेयर कॉल स्प्रेड को पसंद कर सकता है जो जोखिम को तो बढ़ाता है पर इसकी वजह से ज्यादा से ज्यादा लाभ भी मिलता है ।

- स्प्रेड रणनीति के रूप में, बेयर कॉल स्प्रेड में, अनकवर्ड ऑप्शन के मुकाबले, कम मार्जिन की आवश्यकता होती है।

बेयर कॉल स्प्रेड की कमियां

- एक बेयरिश रणनीति होने के नाते, बेयर कॉल स्प्रेड पर रिटर्न सीमित हो सकता है और इसके मध्यम से उच्च जोखिम से ऑफसेट हो सकता है ।

- अगर शॉर्ट कॉल लेग का अंतर्निहित स्टॉक तेजी से बढ़ता है, तो उस पर असाइनमेंट का एक महत्वपूर्ण जोखिम रहता है । व्यापारी के पास अपने स्ट्राइक मूल्य की तुलना में बहुत अधिक कीमत पर स्टॉक खरीदने के अलावा कोई ऑप्शन बचता है, और इसी वजह से व्यापारी को एक बड़ा नुकसान होता है ।  

 - अच्छी स्थितियां, जिसके दौरान इस रणनीति का उपयोग करना उचित है यानी बाजार में अस्थिरता और प्रदर्शन में मामूली गिरावट की उम्मीद, वो सीमित होती हैं।

निष्कर्ष

अब जब हम बेयर कॉल स्प्रेड की बारीकियों को समझते हैं, तो चलिए, हम अगले लेसन में इसके बारे में और जानें।

अब तक आपने पढ़ा

  • बेयर कॉल स्प्रेड में दो कॉल ऑप्शन, एक लॉन्ग और एक शॉर्ट, अलग-अलग स्ट्राइक कीमतों पर, लेकिन एक ही एक्सपायरी के साथ खरीदे जाते हैं।
  • बेयर कॉल स्प्रेड को सीमित जोखिम और सीमित-रिवार्ड माना जाता है क्योंकि व्यापारी इस रणनीति का उपयोग करके अपने नुकसान को कम कर सकते हैं या कम लाभ कमा सकते हैं। उनके मुनाफे और नुकसान की सीमा उनके कॉल ऑप्शन के स्ट्राइक प्राइस से निर्धारित होती है।
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