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डेरिवेटिव एक्सपायरी के बारे में जानने योग्य बातें

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अगर आप डेरिवेटिव मार्केट को बॉलीवुड मानें और फिल्मों को डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट, तो फिर एक्सपायरी डे वह दिन है जब पुरानी फिल्में सिनेमाघरों से बाहर जाती हैं और नई फिल्में रिलीज होते हैं। यह महीने का वह दिन, ज़्यादातर महीने का आखिरी गुरुवार होता है, जब डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायर होता है।

जैसा नाम से ही पता चल रहा है, एक्स्पायरी डेट वह तारीख है, जिस पर एक विशेष कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायर होता है। हर डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट, जो किसी अंतर्निहित सिक्योरिटी, जैसे स्टॉक, कमोडिटी या मुद्रा, पर आधारित होता है, उसकी एक एक्सपायरी डेट होती है, हालांकि अंतर्निहित सिक्योरिटी में आमतौर पर कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती है। 

एक अंतर्निहित सिक्योरिटी पर आधारित एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट केवल एक निर्दिष्ट अवधि के लिए मौजूद रहता है, जो इसकी एक्स्पायरी डेट पर समाप्त हो जाती है। एक्स्पायरी डेट पर, डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट अंततः खरीदार और विक्रेता के बीच सेटल होता है। सेटलमेंट नीचे दिये गए तरीकों में से किसी एक पर हो सकता है -

  1. भौतिक वितरण/ फिजिकल डिलिवरी: किसी विशेष कॉन्ट्रैक्ट के तहत अंतर्निहित सिक्योरिटी के भौतिक वितरण (आमतौर पर कमोडिटी के मामले में) के मामले में, कॉन्ट्रैक्ट का विक्रेता खरीदार को निर्धारित मात्रा वितरित करता है, जो इसके लिए पूरी कीमत चुकाता है।
  2. नकद निपटान/ कैश सेटलमेंट: इसका मतलब है मुद्रा के माध्यम से स्पॉट प्राइस और डेरिवेटिव मूल्य के बीच अंतर का सैटलमेंट, ना कि अंतर्निहित सिक्योरिटी के माध्यम से। वर्तमान में, भारत में नकदी/कैश द्वारा इक्विटी डेरिवेटिव का निपटान किया जाता है। 

भारतीय शेयर बाजारों के मामले में, कॉन्ट्रैक्ट की एक्स्पायरी डेट महीने का आखिरी गुरुवार होता है।

इस दिन क्या होता है ?

एक्सचेंज पर दो प्रकार के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट का कारोबार किया जाता है - फ्यूचर व ऑप्शन। यह कॉन्ट्रैक्ट व्यापारियों द्वारा भविष्य की तारीख में एक निश्चित मूल्य पर अंतर्निहित एसेट को खरीदने या बेचने के लिए एक समझौते के तौर पर किया जाता है। भविष्य की यह तारीख डेरिवेटिव एक्सपायरी का दिन है। इस दिन, फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट खरीदारों को एग्रीमेंट को पूरा करना पड़ता है, जो अनिवार्य है और ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट खरीदार या तो कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को पूरा कर सकता है या उसे एक्सपायर होने दे सकता है। 

यह सबसे महत्वपूर्ण व जरूरी दिन क्यों है?

जब कोई व्यापारी एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट खरीदता है, तो वह शेयर बाजारों में अंतर्निहित एसेट की मूवमेंट और ओपन इन्टरेस्ट, फ्यूचर प्राइस मूवमेंट, जैसे कई अन्य कारकों पर निगरानी रखते हैं। अपने अवलोकन के आधार पर वह यह तय करते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट को कब सेटल करना है। यह एक्स्पायरी की तारीख से पहले किसी भी समय किया जा सकता है।

एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने को सेटलमेंट कहा जाता है। वह मूल्य जिस पर उस कॉन्ट्रैक्ट का निपटान किया जाता है, उसे निपटान मूल्य या सेटलमेंट वैल्यू कहा जाता है। यह मूल्य अक्सर अंतर्निहित एसेट (स्टॉक, इंडेक्स, कमोडिटी या मुद्रा) के समापन मूल्य पर निर्भर करता है, जो कैश सेगमेंट में श्रृंखला के अंतिम दिन का मूल्य हो सकता है।

अगर व्यापारी कॉन्ट्रैक्ट को स्वेच्छा से सेटल नहीं करते है तो वह कॉन्ट्रैक्ट एक्स्पायरी डेट पर अपने आप ही समाप्त हो जाते हैं। फ्यूचर व इन-द-मनी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के मामले में व्यापारी को कैश में निपटान मूल्य का भुगतान करना या लेना होता है, जबकि आउट-ऑफ-द-मनी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट शून्य हो जाते हैं।

अगर हम हमारे फिल्म वाले उदाहरण पर वापिस आते हैं तो, किसी पिक्चर के सिक्वल की ही तरह, अगर व्यापारियों को किसी विशेष कॉन्ट्रैक्ट में संभावना दिखाई देती है, तो वह अगली सीरीज़ में ऑप्शन में नयी पोजीशन को ले सकते हैं या फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट को रोल-ओवर कर सकते हैं। यह एक एक्सपायरी के दिन पर पिछले महीने के रोलओवर डाटा के आधार पर तय किया जाता है।

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एक्सपायरी और ऑप्शन मूल्य 

सामान्य तौर पर, किसी शेयर के एक्सपायर होने में जितना ज्यादा समय होता है, उसके  पास स्ट्राइक प्राइस तक पहुंचने के लिए उतना ही अधिक समय होता है और इसलिए उसकी टाइम वैल्यू ज्यादा होती है। 

दो प्रकार के ऑप्शन होते हैं, कॉल और पुट। कॉल, धारक को शेयर के एक्सपायरी पर पहुँचने से पहले अगर वह स्ट्राइक प्राइस तक पहुंचता है तो उसे खरीदने का अधिकार देती है, दायित्व नहीं। इसी तरह पुट भी धारक को अधिकार देता है, लेकिन दायित्व नहीं, कि अगर शेयर एक्सपायरी तिथि तक एक निश्चित स्ट्राइक मूल्य तक पहुंच जाता है तो वह शेयर को बेच सकता है। दोनों ही केस में, धारक के पास अधिकार है कि वह शेयर को खरीद या बेच सकता है पर यह उसका दायित्व (लाइबलिटी) नहीं है कि उसे ऐसा करना ही है।

यही कारण है कि एक्सपायरी तिथि ऑप्शन व्यापारियों के लिए इतनी जरूरी क्यों है। ऑप्शन का मूल्य निर्धारित होने में समय एक अहम भूमिका निभाता है। पुट या कॉल के एक्सपायर होने के बाद, टाइम वैल्यू मौजूद नहीं रहती। दूसरे शब्दों में, एक बार डेरिवेटिव के एक्सपायर होने पर निवेशक के पास ऐसा कोई भी अधिकार नहीं होता है जो उसके पास कॉल या पुट होल्डर होने के वक्त था।

एक्सपायरी और फ्यूचर मूल्य 

फ्यूचर, ऑप्शन से इस तरह अलग हैं कि फ्यूचर के एक आउट-ऑफ-द-मनी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट एक्स्पायरी के बाद भी अपनी वैल्यू रखता है। उदाहरण के लिए, एक तेल कॉन्ट्रैक्ट, तेल के बैरल का प्रतिनिधित्व करता है। अगर कोई व्यापारी उस कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त होने तक होल्ड करता है, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि वे या तो कॉन्ट्रैक्ट में बताए तेल को खरीदना या बेचना चाहते हैं इसलिए, फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट बेकार नहीं एक्सपायर होता है, और इसमें शामिल पक्ष कॉन्ट्रैक्ट के अपने पार्ट को पूरा करने के लिए एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी होते हैं। जो लोग कॉन्ट्रैक्ट को पूरा करने के लिए उत्तरदायी नहीं होना चाहते हैं, उन्हें आखरी ट्रेडिंग डे पर या उससे पहले अपनी पोजीशन को रोलओवर या क्लोज करना होगा।

एक्सपायर हो रहे कॉन्ट्रैक्ट रखने वाले वायदा कारोबारियों को अपने लाभ या हानि को हासिल करने के लिए, एक्सपायरी से पहले या एक्सपायरी के दिन, जिसे अंतिम व्यापारिक दिन भी कहा जाता है, क्लोज कर देना चाहिए। वैकल्पिक रूप से, वे कॉन्ट्रैक्ट को होल्ड कर सकते हैं और अपने ब्रोकर को उस अंतर्निहित एसेट को खरीदने / बेचने के लिए कह सकते हैं जिसका कॉन्ट्रैक्ट प्रतिनिधित्व करता है। खुदरा व्यापारी आमतौर पर ऐसा नहीं करते हैं, पर ट्रेडर ऐसा करते हैं। उदाहरण के लिए, तेल बेचने के फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट का उपयोग करने वाला एक तेल उत्पादक अपने टैंकर को बेचना चुन सकता है। फ्यूचर व्यापारी अपनी पोजीशन को "रोल" भी कर सकते हैं। यह उनके वर्तमान व्यापार का समापन है, और एक्सपायरी से दूर वाले कॉन्ट्रैक्ट के लिए तत्काल बहाली है।

निष्कर्ष

अब जब आप इस सवाल का जवाब जानते हैं - क्या आपको एक्सपायरी गुरूवार पर व्यापार करना चाहिए ? तो अब हम अगले बड़े विषय पर आगे बढ़तें हैं - मुहूर्त व्यापार क्या है?  इसका उत्तर को जानने के लिए, अगले अध्याय पर जाएँ।

अब तक आपने पढ़ा

  • डेरिवेटिव के लिए एक्सपायरी की तारीख वह अंतिम तिथि है जब तक एक कॉन्ट्रैक्ट वैध रहता है। उस समय के बाद, कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायर हो जाता है।
  • डेरिवेटिव के प्रकार के आधार पर, एक्सपायरी तिथि अलग-अलग परिणाम दे सकती है।
  • ऑप्शन के मालिक ऑप्शन को उपयोग करना चुन सकते हैं (और लाभ या हानि हासिल कर सकते हैं) या इसे बेकार समाप्त होने दे सकते हैं।
  • फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के मालिक भविष्य की तारीख में कॉन्ट्रैक्ट को रोल करने या अपनी पोजीशन को क्लोज करने और एसेट या कमोडिटी की डिलीवरी लेने का विकल्प चुन सकते हैं।
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इस अध्याय के लिए प्रश्नोत्तरी लें और इसे पूरा चिह्नित करें।

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