6. बीमा से जुड़े कर और वित्त

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"मौत और कर के अलावा इस दुनिया में कुछ भी निश्चित नहीं है, हालांकि मौत और कर भी अनिश्चित हैं क्योंकि किसी को नहीं पता कि वह कब मरेगा या कब कर बदलेगा" - बेंजामिन फ्रैंकलिन

आज के समय में बीमा सबसे अहम ज़रूरतों में से एक है। यह अचानक से आने वाले संकट के समय में, एकदम से आने वाले खर्चों को वहन करने में मदद करता है, और व्यक्ति और परिवार के लिए तुरंत सुरक्षा के साथ उनकी चिंताओं को कम करता है। आपके मन में सुरक्षा और शांति लाने के अलावा, बीमा आपके वित्त को तो संभालता ही है, साथ ही साथ वह कई प्रकार के टैक्स संबंधी लाभ व छूट भी दिलाता है।

हमें कितना अच्छा लगता है जब हम कुछ नया खरीदते हैं और उसके साथ ही हमें कुछ मुफ्त मिलता है। बस बीमा भी हमारे लिए बिलकुल ऐसा ही करता है। जीवन बीमा आपको एक फ्री टैक्स वाउचर देता है। इसका मतलब यह है कि यह आपको जीवन में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ-साथ टैक्स में भी आपको छूट दिलाता है और टैक्स बचाता है।

टैक्स को समझना मुश्किल हो सकता है। यहां तक ​​कि अल्बर्ट आइंस्टीन कहते थे कि आयकर समझने के लिए सबसे मुश्किल कॉन्सेप्ट है। खैर, टैक्स बचाने के लिए बीमा के उपयोग का कॉन्सेप्ट तुलनात्मक रूप से ज्यादा आसान है। आप इसे कुछ इस तरह समझ सकते है:

आप एक प्रीमियम का भुगतान करके एक जीवन बीमा पॉलिसी खरीदते हैं। इस चुकाए गए प्रीमियम की राशि को टैक्स की गणना करते समय आपकी आय में से काट लिया जाता है। आप जीवन बीमा खरीद कर अपनी आय में से 1.50 लाख रुपए तक की कटौती कर सकते हैं। इससे टैक्समैन की नज़र में आपकी आय 1.50 लाख रुपए कम हो जाती है।

इसके बाद, अपनी आय के प्रतिशत के रूप में टैक्स की गणना करें। कम आय के साथ, आपका कर भी कम हो जाता है। आप 1.50 लाख रुपए का जीवन बीमा खरीद कर ₹45000 तक अपना टैक्स बचा सकते है (1.50 लाख रुपए का 30%)। और यह सिर्फ यही खत्म नहीं होता, बीमा के साथ और भी कई कर-बचत सुविधाएं हैं, तो चलिए उनके बारे में और जानते हैं -

सबसे आम खंड -80 सी के तहत कटौती का उपयोग कर टैक्स की बचत

टैक्स बचाना चाहते हैं? फिर तो सीधे ही आयकर अधिनिमय की धारा 80सी को देखिये। यह वह जगह है जहां पर आपको सभी टैक्स-बचत निवेशों की लिस्ट मिल जाएगी।

क्या आपने होम लोन लिया है ? आपका दिया जाने वाला ब्याज आपकी छूट की 1.50 लाख रुपए की सीमा में एक जरूरी हिस्सा बन सकता है।  अगर आप एक बच्चे हैं तो आप ट्यूशन फीस का उपयोग करके कटौती क्लेम कर सकते हैं, हालांकि अगर आपको अपनी 1.50 लाख तक की छूट पाने के लक्ष्य को पूरा करना है तो आपके पास एक शानदार ऑप्शन है और वह है – जीवन बीमा। यहाँ तक कि आप अपने 1.50 लाख रुपए के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बीमा पॉलिसियों के मिश्रण का भी उपयोग कर सकते हैं, सीधे शब्दों में कहें तो आप कई अलग-अलग पोलिसियों को भी उपयोग में ले सकते है। 

आपको बस यह सुनिश्चित करना है कि प्रीमियम की राशि बीमा कवर के 10% से ज्यादा नहीं हो। इसे हम एक उदाहरण से समझ सकते हैं। मान लीजिए कि आपको 10 लाख रुपए का जीवन बीमा कवर मिलता है तो आपका प्रीमियम 10% से अधिक नहीं होना चाहिए, यानी की एक लाख रुपए, नहीं तो यह टैक्स-सेविंग के लिए काम में नहीं लिया जा सकेगा।

 यहां तक ​​कि बीमा के माध्यम से आपके निवेश से भी आपको कर लाभ मिलता है।

यूनिट-लिंक्ड बीमा प्लान, या यूलिप, आपको बीमा और मार्केट-लिंक्ड निवेश दोनों का फायदा पहुंंचाने में मदद करता है। 

आप एक  प्रीमियम का भुगतान करते हैं। इसका कुछ हिस्सा आपके टर्म बीमा प्रीमियम के रूप में उपयोग किया जाता है। बाकी बची हुई राशि को इक्विटी या डेट मार्केट में निवेश किया जाता है।

लेकिन टैक्समैन के नज़रिए से यह एक ही प्रीमियम है। तो, धारा 80 सी के तहत टैक्स कटौती क्लेम करने के लिए पूरी राशि का उपयोग किया जा सकता है।

धारा 80 डी का उपयोग कर, सही हेल्थकेयर कवर के साथ टैक्स बचत करें 

सरकार चाहती है कि आप अपने जीवन और स्वास्थ्य, दोनों का बीमा कराएं। दोनों ही बीमा आपके लिए समान रूप से जरूरी हैं। आखिरकार, स्वास्थ्य से जुड़ा एकलौता मामला भी आपकी पूंजी को खत्म कर सकता है। सिर्फ एक सही और उचित स्वास्थ्य बीमा ही इस नुकसान को होने से रोक सकता है।

और इसी वजह से सरकार स्वास्थ्य बीमा पर भी कर लाभ देती है।

अजय 50 साल के हैं और उनके पिता 71 साल के हैं। राहुल ने अपने और अपने पिता के लिए एक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली है, जिसके लिए वह क्रमशः ₹28000 और ₹37000 का भुगतान करता है। धारा 80D के तहत वह अधिकतम कितनी राशि क्लेम कर सकता है?

चूंकि राहुल खुद एक वरिष्ठ नागरिक नहीं हैं, इसलिए वह अपनी पॉलिसी पर भुगतान किए गए प्रीमियम के लिए ₹28,000 तक क्लेम कर सकते हैं। अपने पिता की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के लिए, राहुल ₹50,000 तक क्लेम कर सकते हैं क्योंकि वह एक वरिष्ठ नागरिक हैं। दिए गए मामले में, वह ₹28,000 और ₹37,000 का कर लाभ उठा सकता है। इसलिए, कुल कर कटौती ₹60000 पर आ जाएगी।

हिंदू अविभाजित परिवार (एचयूएफ) के मामले में क्या होता है?

एचयूएफ, अपने किसी भी एचयूएफ सदस्यों के लिए ली गई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के लिए धारा 80 डी के तहत कटौती का दावा कर सकता है। अगर बीमित सदस्य 60 वर्ष से कम है तो  यह कटौती ₹25,000 होगी और अगर बीमित सदस्य 60 वर्ष या उससे अधिक है तो यह कटौती ₹30,000 (बजट 2018 में ₹50,000 तक बढ़ा दी गई थी) होगी।

कमाई ना करने वाले परिवार के सदस्य और आपका पूरा परिवार आपको एक इकाई  के रूप में टैक्स बचाने में मदद कर सकता है। 

हर कोई  खुद बीमा नहीं खरीदता है। आप अपने माता-पिता, एक गैर-कामकाजी जीवनसाथी या यहां तक कि अपने बच्चे के लिए बीमा खरीद सकते हैं। और जब आप ऐसा करते हैं, तो आप उनकी ओर से भी कर कटौती का दावा कर सकते हैं। 

उदाहरण के लिए, अगर आपने अपने परिवार के लिए प्रीमियम का भुगतान इस प्रकार किया है: 

– जीवन बीमा

  • स्वयं के लिए: ₹ 45,000
  • पति / पत्नी के लिए: ₹40,000
  • बच्चे के लिए: ₹15,000
  • बुजुर्ग माता-पिता के लिए: ₹50,000

– स्वास्थ्य बीमा

  • तीन सदस्यों के परिवार के लिए: ₹25,000
  • आश्रित माता-पिता के लिए: ₹40,000

ऐसा करके आप धारा 80 C के तहत जीवन बीमा के लिए कुल 1.5 लाख रुपये और धारा 80 D के तहत स्वास्थ्य बीमा के लिए ₹55,000 (₹25,000 + ₹30,000) की कटौती का दावा कर सकते हैं।

क्या आपको पता है आपके बीमा से मिलने वाला रिटर्न भी कर-मुक्त होता है?

हालांकि हम में से कई लोग इस सवाल का जवाब जानते हैं, फिर भी यह सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवालों में से एक है। "क्या आपको बीमा से प्राप्त भुगतान पर कोई टैक्स देना होता है?"

हम आपको भरोसा दिलाते हैं: आप बीमाकर्ताओं से जो पैसा प्राप्त करते हैं, वह चाहे बीमित राशि हो या बोनस हो, कर-मुक्त होता है। और इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपको पैसे का भुगतान मैच्योरिटी पर, पॉलिसी सरेंडर करने पर या  मृत्यु के दावे के दौरान किया जा रहा है, ये राशि टैक्स-फ्री ही रहेगी।

सिर्फ एक भुगतान जिसपर टैक्स लग सकता है वह है यूलिप के माध्यम से बाज़ार से जुड़े निवेश से की गई कमाई पर।

हालांकि, अगर इक्विटी-आधारित निवेश को एक वर्ष के बाद बेचते हैं तो इस पर किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगता। केवल ऋण-आधारित एसेट पर होने वाले कैपिटल गेन्स पर टैक्स लग सकता है, वह भी इस बात पर निर्भर करता है कि आपने इसे कितने समय तक अपने पास रखा है।

निष्कर्ष

तो इस तरह आपने जाना कि आप बीमा का उपयोग कर किस प्रकार कर बचा सकते हैं और साथ ही अपने वित्त का प्रबंधन कर सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज कई प्रकार के बीमा उपलब्ध हैं? इस बारे में जानने के लिए हमारे अगले अध्याय पर जाएँ।

अब तक आपने पढ़ा

  1. आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत, कटौती का उपयोग कर टैक्स बचाना आसान है।
  2. बीमा के माध्यम से भी आपके निवेश से आपको कर लाभ मिलता है।
  3. धारा 80 डी का उपयोग कर करों की बचत करते समय आप उचित स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।
  4. गैर-कमाई वाले परिवार के सदस्य और आपका पूरा परिवार एक इकाई के रूप में टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं।
  5. आपके बीमा से मिलने वाला रिटर्न भी कर-मुक्त है।
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