2. व्यापार के 12 महीने

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व्यवसाय, प्रकृति, ट्रेंड, इन तीनों चीज़ों में कॉमन बात क्या है? यह चक्रीय है, और कई मामलों मे मौसमी भी है, मतलब इनका आना या होना एक तरह से तय ही है चाहे वह एक चक्र की हिसाब से हो या फिर मौसम के हिसाब से हो। उदाहरण के लिए, हम गोवा बीच के एक रेस्तरां का उदाहरण लेते है। नवंबर-फरवरी के महीने में यह रेस्तरां काफी पैसा कमा सकता हैं। लेकिन अब मॉनसून आ गया है, और इसकी मांग या सेल अब एकदम से ही गिर जाएगी। और यह बात भी तो सही है, आखिर मॉनसून में गोवा कौन जाता है ?

अब, एक स्टॉक के बारे में सोचें। एक स्टॉक जो एक मौसमी उद्योग (सीजनल इंडस्ट्री) को दर्शाता है या उसका प्रतिनिधि है, वह साल के कुछ समय के दौरान तो उछाल पर रह सकता है, लेकिन फिर ऑफ सीजन के दौरान वह स्टॉक तुल्नात्मक तौर पर निष्क्रिय हो सकता है।

एक निवेशक के रूप में, आप संभावित रूप से इन मौसमी ट्रेंड को देख सकते हैं और इनकी वजह से स्टॉक प्राइस में होने वाली वृद्धि और गिरावट से मुनाफा कमा सकते हैं। इसमें कोई दोराय नहीं है कि, इसके लिए गहन विश्लेषण और अनुसंधान की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ेगी।

मौसमी शेयर निवेश, स्टॉक की कीमतों में होने वाले आवर्ती पैटर्न (बार-बार होने वाले) को समझने के बारे में है कि, कब इस स्टॉक को खरीदना है और कब किस स्टॉक को बेचना है। मौसमीपन इस अवधारणा पर आधारित है कि “इतिहास खुद को दोहराता है; इस सिद्धांत पर आधारित निवेश संभवतः आपको एक जैसे ही परिणाम दे सकता है, (लेकिन जरूरी नहीं है की हमेशा ऐसा ही हो)”

सीज़नेलिटी सिर्फ ग्रीष्म ऋतु, सर्दी, वसंत और बारिश जैसे प्राकृतिक मौसमों के बारे में ही नहीं है। स्टॉक की कीमतें कुछ गैर-प्राकृतिक मौसमों से भी प्रभावित होती हैं जैसे कॉरपोरेट अर्निंग, हॉलीडे सीज़न, चुनाव, बजट आदि। यह पूर्वानुमान योग्य परिवर्तनों को संदर्भित करता है, जो कैलेंडर या वाणिज्यिक सहित सीज़न के आधार पर एक वर्ष की अवधि में होते है।

इन शेयरों की विशेषता है साल के अलग-अलग समय में इनकी मांग। उदाहरण के लिए, स्विमिंग सूट बनाने में विशेषज्ञता रखने वाली कंपनी शायद मॉनसून और सर्दियों के महीनों के दौरान उतनी सक्रिय नहीं होती है, लेकिन वसंत और गर्मियों के समय में यही कंपनी काफी अच्छा मुनाफा कमाएगी।

तिमाही रिपोर्ट जारी होने के दौरान ट्रेडिंग:

जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम बहुत अच्छे आने की उम्मीद होती है, उनके शेयर की कीमतों में उछाल देखा जा सकता है। शॉर्ट-टर्म निवेशक दिसंबर या मार्च जैसे तिमाही के अंतिम महीने में शेयरों को खरीदकर इस ट्रेंड का लाभ उठा सकते हैं।

अगर आप सोच रहे हैं कि उन शेयरों को कैसे चुना जाए, तो पिछली तिमाही के दौरान विभिन्न कंपनियों द्वारा दिए गए आंकड़े, अगली तिमाही के लिए मैनेजमेंट की क्या उम्मीदें है, कंपनी के बारे में समाचार और इंडस्ट्री के मूड के बारे में सामान्य रूप से प्रसारित न्यूज़ – यह वह सभी कारक हैं, जिनपर अगर आप बारीकी से गौर करेंगे और ध्यान रखेंगे तो इनकी मदद से आप उन शेयर को चुन सकते हैं। 

केंद्रीय बजट के जारी होने के दौरान ट्रेडिंग:

केंद्रीय बजट फरवरी के महीने में वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। जिन कंपनियों को बजट के प्रावधानों की वजह से लाभ कमाने की उम्मीद है, उनके स्टॉक की कीमतों में बजट पास होने के दिन से ही बढ़ोतरी होने लग जाती है। निवेशक शॉर्ट-टर्म मुनाफे के लिए इन शेयरों को खरीद सकते है। अगर आपको ऐसे शेयर्स के बारे में कोई संकेत चाहिए हो तो आप उनका पता चैनलों और समाचार पत्रों में चलने वाली प्री-बजट चर्चाओं को सुनकर लगा सकते है।

मॉनसून के दौरान ट्रेडिंग:

यह समझना जरूरी है कि कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत है। देश में कृषि या खेती का प्रदर्शन निश्चित रूप से यह निर्धारित करने में बहुत बड़ा हाथ रखता है कि शेयर बाजार कितना अच्छा व मजबूत रहेगा। और इसी वजह से, अगर मॉनसून हमारी उम्मीद के हिसाब से नहीं आता है और देश में अच्छी बारिश नहीं होती है तो यह बात तय है कि इस वजह से भारत की अर्थव्यवस्था पर नेगेटिव प्रभाव होगा।

भारतीय कंपनियां देश के ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी कमाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्राप्त करती हैं। जबकि कुछ कंपनियां सीधे कृषि बाजार में काम कर रही हैं जैसे बीज, कृषि-रसायन, उर्वरक आदि, एफएमसीजी और ऑटो स्पेस की कुछ अन्य कंपनियां अप्रत्यक्ष रूप से एक मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था से लाभ कमाती हैं।

मॉनसून का अर्थव्यवस्था में फैली हुई मुद्रास्फीति दर या महंगाई पर सीधा प्रभाव पड़ता है। और इसी के साथ ,कहीं ना कहीं इसका प्रभाव सार्वजनिक निवेश दर, सरकारी बचत, राष्ट्र के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ता है। जब हमारी अर्थव्यवस्था में मॉनसून इतना बड़ा हाथ रखता है , तो यह तो स्पष्ट है ही कि शेयर बाजार का प्रदर्शन मॉनसून से प्रभावित होगा।

निवेश करने के लिए एक अच्छा महीना क्या है ?

 माफ करें, पर किसी के भी पास इस बात का कोई पुख्ता जवाब नहीं है। आमतौर पर, निवेश के लिए एक स्टॉक को चुनना हमारे कॉमन सेंस पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, तेल जैसी वस्तुओं के बारे में सोचें। गर्मियों की महीने में, जब कारों को छुट्टियों के समय घूमने के लिए ज्यादा उपयोग किया जाता है तो इस वजह से तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं। इस प्रकार, यह समझ में आता है कि तेल स्टॉक की कीमतें भी इसी राह पर चलती हैं। 

तो, इस स्थिति में, अगर आप एक तेल स्टॉक को चुनते हैं और इस सीजन की ऊंचाई यानि की मूल्यों मे होने वाली बढ़ोतरी से पहले स्टॉक को खरीद लेते हैं और सीजन खत्म होने से पहले उसे बेच देते हैं तो आप “कम में खरीदो, ज्यादा में बेचो” सिद्धांत पर आधारित अच्छा लाभ कमा सकते है।

स्टॉक मार्केट में छुट्टियां

हर दूसरे क्षेत्र के पेशेवरों की तरह, शेयर बाजार के पेशेवरों की भी छुट्टियां होती हैं। हर साल, राष्ट्रीय या राज्य की छुट्टियों पर व्यापारियों के लिए कुछ दिन बाजार बंद रहते हैं। अगर आप एक नए व्यापारी हैं,  तो आपको स्टॉक मार्केट हॉलिडे कैलेंडर के बारे में जानकारी रखने की जरूरत है। कुछ छुट्टियां ये हैं:

  • गणतंत्र दिवस
  • महाशिवरात्रि
  • होली
  • गुड फ्राइडे
  • अम्बेडकर जयंती
  • राम नवमी
  • ईद-उल-फ़ितर या रमज़ान ईद
  • बकरी ईद
  • मुहर्रम
  • गणेश चतुर्थी
  • दशहरा
  • दिवाली
  • गुरुनानक जयंती

 निष्कर्ष

अब जब आप इसकी बारीकियों को समझते हैं, तो हम अगले बड़े विषय पर आगे बढ़ सकते है - क्या ट्रेडिंग का एक मासिक पैटर्न है ? इसके बारे में और जानने लिए, अगले अध्याय पर जाएँ।

अब तक आपने पढ़ा

  • सीज़नेलिटी, पूर्वानुमानित परिवर्तनों को संदर्भित करती है जो एक व्यवसाय या अर्थव्यवस्था में कैलेंडर या वाणिज्यिक सत्रों के आधार पर, एक वर्ष की अवधि में होते हैं।
  • एक स्टॉक जो मौसमी उद्योग का प्रतिनिधि है, वह वर्ष के कुछ समय के दौरान उछल सकता है, लेकिन ऑफ-सीजन के दौरान निष्क्रिय हो सकता है।
  • मॉनसून का अर्थव्यवस्था में प्रचलित मुद्रास्फीति दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • केंद्रीय बजट फरवरी के महीने में वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत किया जाता है।
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