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बाजार और कराधान: बाजार और कराधान के लिए एक गाइड

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किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था, आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए वहाँ के नागरिकों से प्राप्त करों पर बहुत अधिक निर्भर करती है। कर देश के विकास की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सरकार की आय का प्राथमिक स्रोत है। विभिन्न संपत्तियों पर लगाए गए कर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हो सकते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि लोग आयकर विभाग से डरते हैं। नियमों और विनियमों की थोड़ी-सी जानकारी के माध्यम से इस डर को दूर किया जा सकता है।

आईटी विभाग हर साल जुर्माने के नियमों और शर्तों में बदलाव करता रहा है। इसके कारण आईटीआर फाइल न करने और गलत फाइलिंग के कारण दंड की संख्या में वृद्धि होती है। पैन और आधार नंबर हर जगह लिंक होने की वजह से सभी वित्तीय गतिविधियों के लिए समेकित विवरण भेजना अब बहुत आसान हो गया है। इसी तरह एनएसडीएल और सीडीएसएल डीमैट खातों की होल्डिंग के स्टेटमेंट आसानी से भेज सकते हैं।

स्टॉक और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए रिटर्न भरना आसान हो सकता है, लेकिन इंट्राडे ट्रेडिंग करते समय जटिलताएं आती हैं। आइए हम कराधान के विषय को आसान बनाएंं ताकि टैक्स टालने से होने वाली परेशानियां ना झेलनी पड़ें। 

शेयरों और म्यूचुअल फंड पर कराधान

परिस्थिति 1:

ABC नाम की एक कंपनी के पास 1,000 बकाया शेयर हैं। एक निवेशक के रूप में सतीश ने एबीसी में 100 शेयर खरीदे। इसका मतलब होगा कि सतीश के पास कंपनी की संपत्ति और कमाई में 10% हिस्सेदारी है।

इसलिए  शेयरों के स्वामित्व की मात्रा कुल बाकाया शेयरों की तुलना में  आपके द्वारा खरीदे गए शेयर की संख्या के तौर पर परिभाषित की जाती है।

 ध्यान रहे कि शेयरधारक संगठन पर मालिकाना हक के हकदार नहीं है। फिर भी, वे एक संगठन द्वारा बेचे गए शेयरों का एक अंश रखते हैं। शेयर के स्वामित्व और संगठन के स्वामित्व के बारे में इस अंतर को नोट करना आवश्यक है क्योंकि कॉर्पोरेट संपत्ति शेयरधारकों की संपत्ति से कानूनी रूप से अलग-अलग हैं।

शेयरों पर कराधान

आयकर विभाग द्वारा निर्धारित नए दिशा निर्देशों के अनुसार शेयर निवेश को पूंजीगत लाभ या व्यावसायिक आय (ट्रेडिंग) में विभाजित किया जा सकता है। निवेशक अपने निवेश को दोनों में से किसी एक तरीके से दिखाने का निर्णय ले सकते हैं।

  1. 1 वर्ष से अधिक के लिए रखे गए शेयरों को निवेश के रूप में माना जा सकता है क्योंकि तक तक लाभांश प्राप्त करने की संभावना होती है।
  2. शॉर्ट-टर्म इक्विटी डिलीवरी खरीदने / बेचने को निवेश के रूप में माना जा सकता है, जब तक खरीदने और बेचने की आवृत्ति कम हो।
  3. आपकी इक्विटी डिलीवरी ट्रेड को व्यावसायिक आय के रूप में भी दिखाया जा सकता है (लेकिन जो निर्णय एक बार ले लिया जाता है उसे भविष्य में उसी क्रम में जारी रखना चाहिए)

कराधान के बारे में जानने से पहले, खुद को निवेशक या एक व्यापारी के रूप में वर्गीकृत करने की आवश्यकता होती है, जिसके लिए कमाई गई आय को निम्नलिखित वर्गों में बांटना होता है –

  1. दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) (1 वर्ष से अधिक कीक्विटी होल्डिंग)
  2. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी) ( कम ट्रेडिंग के साथ, 1 दिन से 1 वर्ष के बीच इक्विटी होल्डिंग्स)
  3. प्रत्याशित व्यापार आय (इंट्राडे इक्विटी ट्रेड)
  4. गैर- प्रत्याशित व्यवसाय आय (एफ एंड ओ (इक्विटी, मुद्रा, कमोडिटी) ट्रेड)

पूंजीगत लाभ के विपरीत, व्यावसायिक आय के लिए कोई निश्चित टैक्स दर नहीं है। प्रत्याशित (स्पेक्यूलेटिव) और गैर- प्रत्याशित (नॉन- स्पेक्यूलेटिव) व्यापार आय को अन्य सभी आय (वेतन, अन्य व्यावसायिक आय, बैंक ब्याज, किराये की आय और अन्य) में जोड़ना होगा, और टैक्स स्लैब के अनुसार करों का भुगतान करना होगा।

परिस्थिति 2:

अमित सालाना ₹10,00,000 कमाता है

डिलिवरी आधारित इक्विटी से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन - ₹1,00, 000 

एफ एंड ऑ ट्रेडिंग से लाभ- ₹1,00,000 

इंट्रा डे इक्विटी ट्रेडिंग की राशि- ₹1,00,000

अमित की कुल आय की गणना करके टैक्स लायबिलिटी का पता लगाया जा सकता है।

कुल आय की गणना वेतन और सभी स्पेक्यूलेटिव और नॉन-स्पेक्यूलेटिव व्यवसाय आय को जोड़कर की जा सकती है।

पूंजीगत लाभ के लिए कराधान की दरें तय हैं इसलिए उन्हें जोड़ा नहीं जा सकता है।

 कुल आय (वेतन + व्यवसाय) = ₹10,00,000 (वेतन आय) + ₹1,00,000 (एफ एंड ओ ट्रेडिंग से लाभ) + ₹1,00,000 (इंट्रा डे इक्विटी ट्रेडिंग) = ₹12,00,000 / -

 टैक्स स्लैब के आधार पर अमित को अब ₹12,00,000 /- कर का भुगतान करना होगा

0 – ₹2,50, 000: 0% - शून्य

₹250,000 – ₹5,00, 000: 5% - ₹12, 500 / -

₹500,000 – ₹10, 00,000: 20% - ₹100, 000 / -,

₹1,000,000 - ₹1,200,000: 30% - ₹.60, 000 / -

इसलिए कुल कर: ₹25,000 + ₹1,00,000 + ₹60,000 = ₹1,72,500 / -

अब, डिलीवरी आधारित इक्विटी से STCG के तहत ₹1,00,000 / - की अतिरिक्त आय को वर्गीकृत किया गया है। इस पर कर की दर 15% है।

STCG: ₹100,000/-, 15% की दर के हिसाब से कर देयता- ₹15,000/-

कुल टैक्स= ₹185,000 +₹15,000 = ₹200,000/- 

STCG: ₹1,00,000 /-, तो 15% पर, टैक्स लायबिलिटी ₹15000 /- है।

कुल टैक्स = ₹185,000 + ₹15,000 = ₹2,00,000 / -

अब हम उन महत्वपूर्ण कारकों की एक लिस्ट देखेंगे जिन्हें ट्रेडिंग को कराधान के लिए व्यापार आय घोषित करते समय ध्यान में रखना चाहिए।

म्यूचुअल फंड्स

म्युचुअल फंड को आज के समय में निवेश के लोकप्रिय विकल्पों में से एक माना जाता है।

यह बहुत बार देखा गया है कि निवेशक निवेश से संबंधित निर्णय लेते समय टैक्स पर अधिक ध्यान नहीं देते हैं। उस मामले में, म्यूचुअल फंड व्यक्तिगत निवेशकों के लिए एक शानदार निवेश विकल्प साबित होते हैं। क्यों? क्योंकि

  1. यह भारतीय निवेशकों के लिए उपलब्ध कर-अनुकूल निवेश विकल्प है
  2. यह एक विशेषज्ञ प्रबंधित पोर्टफोलियो का फायदा देता है।
  3. म्यूचुअल फंड में निवेश करके पोर्टफोलियो में विविधता लाई जा सकती है।

 लोगों का  म्यूचुअल फंड में निवेश करने की योजना बनाते समय टैक्स पर विचार नहीं करना गलत निर्णय हो सकता है। टैक्स के बारे में ना सोचने से नकदी प्रवाह प्रभावित होगा। कराधान के साथ, एक निवेशक को कुछ और कारकों पर ध्यान देना चाहिए जैसे लाभांश, रीडमशन आदि पर टैक्स।

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म्यूचुअल फंड पर कराधान

म्यूचुअल फंड इस सिद्धांत पर आधारित होते हैं कि "म्युचुअल फंड निवेश के माध्यम से अर्जित कमाई को कभी पूंजीगत लाभ के रूप में ना आंकें"। पूंजीगत लाभ कर योग्य हैं। पूंजीगत लाभ पर दिया जाने वाला कर निम्न के आधार पर निर्भर करता है:

  1.       म्यूचुअल फंड स्कीम की श्रेणी और
  2.     जिस अवधि के लिए निवेश किया गया था।

परिस्थिति 3:

अरुण ने 2018 में म्यूचुअल फंड स्कीम में 1 लाख रुपए का निवेश किया और उसके निवेश का मूल्य 2020 में 1.5 लाख तक पहुँच गया। उसके द्वारा अर्जित पूंजीगत लाभ ₹50,000।

इस निवेश की अवधि के आधार पर पूंजीगत लाभ को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है:

  1. अल्पकालिक पूंजीगत लाभ (खरीद की तारीख से एक वर्ष पूरा होने से पहले बेचे गए इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश)
  2. दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (एक वर्ष से अधिक निवेश)

इसलिए, अरुण द्वारा अर्जित पूंजीगत लाभ को दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कहा जाएगा।

इसके विपरीत, इक्विटी स्कीमों के अलावा डेट फंड या किसी अन्य श्रेणी के मामले में, अगर 2 साल पूरा होने से पहले निवेश पर मिली कमाई बेची जाती है, तो इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है और 2 साल पूरा होने के बाद निवेश बेचकर प्राप्त किए गए लाभ को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है।

म्यूचुअल फंड की कर-दक्षता उस अवधि पर निर्भर करती है जिस अवधि के लिए उन्हें रखा जाता है। जितने लंबे समय तक म्यूचुअल फंड की इकाइयाँ आयोजित की जाती हैं, उतना ही अधिक टैक्स बचाना मुमकिन होता है। शॉर्ट टर्म गेन की तुलना में लॉन्ग टर्म गेन पर टैक्स कम है।

लाभ / आय की प्रकृति

इक्विटी फंड पर कराधान

गैर-इक्विटी फंड पर कराधान

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स के लिए न्यूनतम होल्डिंग पीरियड

1 साल

3 साल

शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन

15% + 4% उपकर  = 15.60%

निवेशक की कर दर के अनुसार (उच्चतम कर स्लैब में निवेशकों के लिए 30% + 4% उपकर = 31.20%)

लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन

10% + 4% उपकर = 10.40% (अगर दीर्घावधि लाभ 1 लाख रुपए से अधिक है)

इंडेक्सेशन के साथ 20%

लाभांश वितरण कर

10% + 12% सरर्चाज+ 4% उपकर = 11.648%

25% + 12% सरचार्ज+ 4% उपकर = 29.120%

लाभांश (डिविडेंड) आय पर कराधान

लाभांश आय का एक हिस्सा है जो एक कंपनी प्राप्त करती है और अपने निवेशकों के बीच बांटती है।

डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) एक लायबिलिटी है जो एक संगठन को अपने निवेशकों के बीच वितरित लाभांश के अनुसार प्राधिकरण (सरकार) को चुकानी होती है। 

वित्तीय वर्ष 2019-20 के अनुसार, म्यूचुअल फंड का प्रबंधन करने वाले फंड हाउस को निवेशकों के बजाय सरकार को डीडीटी का भुगतान करना होता है। अधिकांश योजनाओं में आम तौर पर डीडीटी दर लगभग 30% होती है। दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2020-21 के बजट के अनुसार, डीडीटी का भुगतान निवेशक को करना होगा ना कि फंड हाउस को। इसलिए, डीडीटी को नई कर व्यवस्था के तहत समाप्त कर दिया गया है।

बजट 2020 के अनुसार कंपनियों या म्यूचुअल फंड द्वारा लाभांश वितरण पर एक टीडीएस लगाया जाता है। लाभांश आय पर प्रति निवेशक 10% टीडीएस लागू होता है। अगर लाभांश या म्यूचुअल फंड ₹5000 प्रति वर्ष से कम है तो कोई टीडीएस नहीं लगाया जाता। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए, 31 मार्च 2021 तक भुगतान किए गए लाभांश के लिए टीडीएस की दर 7.5% तक कम हो गई है।

परिस्थिति 4:

 शरद के एबीसी कंपनी में 50 शेयर हैं। वह लाभांश के ₹2,250 की राशि का जून, 2020 तक हकदार है। चूंकि लाभांश आय ₹5000 से कम है, उसे TDS का भुगतान नहीं करना होगा। 

अन्य मामले में, शरद के पास म्यूचुअल फंड की 100 इकाइयाँ हैं। मानिए कि वह लाभांश के रूप में ₹7,000 प्राप्त करता है। इस मामले में, लाभांश आय का 7.5% कर काटा जाना आवश्यक है, जो ₹525 है।

दोनों ही मामलों में, शरद की लाभांश आय, स्लैब रेट के अनुसार कर लगाने योग्य है।

टीडीएस से छूट:

  1. करदाता जिनकी सकल वार्षिक आय ₹2,50,000 की मूल छूट सीमा  से कम है
  2. वरिष्ठ नागरिक जिनका कर देय शून्य है

ध्यान रहे, वरिष्ठ नागरिकों को कंपनी या डिविडेंड फंड घोषित करने वाले म्यूचुअल फंड को फॉर्म 15H जमा करना आवश्यक है।

60 साल से कम उम्र के करदाताओं को टीडीएस से छूट का दावा करने के लिए फॉर्म 15 जी जमा करना आवश्यक है।

इक्विटी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF)

विक्की ने तीन अन्य दोस्तों के साथ मछली पकड़ने का प्लान बनाया। वे कुछ स्नैक्स साथ ले जाने का फैसला करते हैं। इन चारों ने अलग-अलग स्नैक्स लाने का फैसला किया। मछली पकड़ने के बाद, वे अपनी टोकरी खोलते हैं और तरह-तरह के स्वादिष्ट स्नैक्स खाते हैं। विक्की और उसके दोस्तों ने मछली पकड़ने के इस अच्छे प्लान में अच्छी दावत की। जब स्नैक्स की कीमत को प्रति व्यक्ति में बराबर बाँट दिया जाता है, तो लागत कम हो जाती है और एक ही समय पर अलग-अलग प्रकार के स्नैक्स का मज़ा ले सकते हैं।

इसी तरह ईटीएफ वे फंड होते हैं जो तब एकत्रित किए जाते हैं जब लोगों के समूह के वित्तीय संसाधनों को शेयरों, ऋण प्रतिभूतियों (बॉन्ड और डेरिवेटिव) सहित विभिन्न पारंपरिक मौद्रिक परिसंपत्तियों की खरीद के लिए उपयोग किया जाता है। ETF को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा नियंत्रित किया जाता है। यह शेयर बाजार में सीमित या बिना विशेषज्ञता वाले निवेशकों के लिए सबसे अच्छे विकल्पों में से एक है।

 ईटीएफ म्यूचुअल फंड से बेहतर विकल्प क्यों है?

  • खर्चों में कमी। इसमें म्यूचुअल फंड के विपरीत, कोई अतिरिक्त शुल्क शामिल नहीं होता है, जो कि म्यूचुअल फंड पर खर्च की गई कुल लागत बढ़ जाती है।
  • म्यूचुअल फंड के विपरीत,  ईटीएफ के मूल्य में होने वाले बदलाव तुरंत देखे जा सकते हैं और इन्हें व्यापारिक दिन के दौरान किसी भी समय खरीदा और बेचा जा सकता है।
  • म्यूचुअल फंड की तुलना में अधिक तरलता।
  • निवेश के ज्यादा विकल्प 
  • म्यूचुअल फंड की तुलना में कर-अनुकूल
  • म्यूचुअल फंड की तुलना में निवेश से कम जोखिम

ईटीएफ की कमियाँ

  • अगर आप फंड मैनेजर को शामिल नहीं करना चाहते हैं तो डीमैट खाते की आवश्यकता होती है। एक डीमैट खाते को संचालित करने के लिए शेयर बाजार के लेन-देन के बारे में बुनियादी जानकारी आवश्यक है, जो एक नौसिखिए के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
  • बाजार के रुझान के अनुसार कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। सरकारी बांड के विपरीत, ये अस्थिर होते हैं। शेयर बाजार की स्थितियों पर लाभ और हांनि अत्यधिक निर्भर करती है।
  • अक्सर, उच्च क्षमता वाले छोटे पैमाने के संगठनों की अनदेखी हो जाती है। इसलिए ईटीएफ में मध्यम विविधता है।

निष्कर्ष

अब जब आप निवेशकों के लिए बाजार और कराधान को समझते हैं तो, हम अगले बड़े विषय पर चलते हैं - व्यापारियों के लिए बाजार और कराधान।

अब तक आपने पढ़ा

  • कराधान तब होता है जब एक प्राधिकरण (आमतौर पर एक राष्ट्र की सरकार) नागरिकों और कंपनियों द्वारा उस प्राधिकरण को भुगतान किए जाने के लिए शुल्क लेता है।
  • प्राधिकरण द्वारा लगाया गया कर अनैच्छिक है, और अन्य भुगतानों के विपरीत, किसी विशेष सेवा के साथ जुड़ा नहीं है।
  • यह भौतिक परिसंपत्तियों (संपत्ति और स्टॉक, या अचल संपत्ति की बिक्री जैसे अन्य लेनदेन) पर लागू होता है
  • लाभांश आय का एक हिस्सा है जो एक कंपनी प्राप्त करती है और अपने निवेशकों को बांटती है।
  • ईटीएफ वे फंड होते हैं जो तब एकत्रित किए जाते हैं जब लोगों के समूह के वित्तीय संसाधनों को शेयरों, ऋण प्रतिभूतियों (बॉन्ड और डेरिवेटिव) सहित विभिन्न व्यापार योग्य मौद्रिक परिसंपत्तियों की खरीद के लिए उपयोग किया जाता है।
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