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मौलिक विश्लेषण

7. बैलेंस शीट पढ़ना– शब्दावली और परिभाषाएँ

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किसी भी कंपनी की प्रॉफिट और लॉस स्टेटमेंट आपको सिर्फ कंपनी के आय-व्यय और लाभकारिता के बारे में जानकारी देती है। दूसरी ओर बैलेंस शीट आपको बताती है कि कंपनी का किन चीज़ों पर मालिकाना हक है और कंपनी पर कितना बकाया है। यह आपको कंपनी की कुल एसेट्स और देनदारियों की पूरी जानकारी देती है, जिसमें उसके शेयर कैपिटल की जानकारी भी शामिल होती है।

बैलेंस शीट के दो भाग हैं:

  • एसेट
  • इक्विटी और देनदारियां/ लायाबिलिटीज़

अगर आप किसी कंपनी की बैलेंस शीट देखते हैं तो आप पाएंगे कि एसेट का कुल जोड़ इक्विटी और  लायाबिलिटी के जोड़ के बराबर होता है। यह एक बैलेंस शीट का मूल गुण है। दरअसल, कंपनी की बैलेंस शीट में, एसेट के हमेशा इक्विटी और लायाबिलिटी के बराबर होने के पीछे एक ठोस कारण है। किसी कंपनी के पास जो भी एसेट हैं, उसे या तो उधार (देनदारी) या सिर्फ शेयर पूँजी के माध्यम से फंड किया जाता है।  इसलिए  दोनों पक्ष हमेशा समान रूप से  संतुलित होते हैं।

कंपनी की बैलेंस शीट पढ़ना

जैसा हमने पिछले दो अध्यायों में किया था, हम इस बार भी हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के वर्ष 2019-2020 की बैलेंस शीट लेंगे। बैलैंस शीट को पढ़ने के लिए कुछ समय निकालें और लेआउट और संरचना से खुद को परिचित करें।

चूंकि इसकी लेआउट और संरचना P&L स्टेटमेंट के समान है, इसलिए हम सीधे मामले के मूल बिंदु पर चलते हैं। आइए बैलेंस शीट के प्रत्येक खंड को लें और उन्हें समझने की कोशिश करें। चलिए, एसेट से शुरू करते हैं।

एसेट

बैलेंस शीट के एसेट भाग में दो प्राथमिक श्रेणियां हैः

  • गैर-वर्तमान एसेट/ नॉन- करेंट एसेट
  • वर्तमान एसेट/ करेंट एसेट

आइए इन दोनों को थोड़ी गहराई से समझें।

गैर वर्तमान एसेट

इसे लंबी अवधि के एसेट या लॉन्ग टर्म एसेट के रूप में भी जाना जाता है।  ये वो एसेट हैं जो कंपनी के पास एक साल से ज्यादा समय से हैं। गैर-वर्तमान एसेट को आसानी से या जल्दी नकद में नहीं बदला जा सकता। एचयूएल की बैलेंस शीट में आपको निम्नलिखित गैर-वर्तमान एसेट मिलेंगे। 

प्रॉपर्टी, प्लांट और उपकरण

इस श्रेणी में ज़मीन, बिल्डिंग, प्लांट, उपकरण, फर्नीचर, और कंपनी का अपना और लीज़ पर लिया गया ऑफ़िस का दूसरा समान शामिल होता है। फाइनेंशियल स्टेटमेंट का नोट 3 एसेट के बारे में और जानकारी देता है। ये रही उस नोट की तस्वीर। 

नोट 3 आपको कंपनी के अपने और लीज़ पर लिए गए एसेट की विस्तृत जानकारी देता है। यह इन फिक्स्ड एसेट्स को उनकी प्रकृति के अनुसार वर्गीकृत करता है। इसके अलावा, ये नोट पूरे वर्ष में खरीदे गए नए एसेट, बेचे गए एसेट और एसेट के विमूल्यन की जानकारी भी देता है। चलिए, इन डीटेल्स पर एक नज़र डालें।

कैपिटल वर्क-इन-प्रोग्रेस (CWIP)

एक फिक्स्ड एसेट के उत्पादन या उसके निर्माण से जुड़ी सभी लागतों को कैपिटल वर्क-इन- प्रोग्रेस(CWIP) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। उदाहरण के तौर पर कंपनी द्वारा किसी बिल्डिंग के निर्माण में होने वाली सभी लागतों को कैपिटल वर्क-इन- प्रोग्रेस कहा जाता है।

गुडविल और अन्य अमूर्त एसेट

गुडविल, कंपनी द्वारा अपने अस्तित्व के कई वर्षों में बनाई गई प्रतिष्ठा है। यह आमतौर पर किसी कंपनी की बैलेंस शीट में इनटेंजिबल एसेट यानी अमूर्त एसेट के रूप में दिखाई जाती है। एसेट, प्लांट और उपकरण खंड की तरह ही फाइनेंशियल स्टेटमेंट के नोट 4 में गुडविल और अन्य अमूर्त एसेट का विस्तृत विवरण दिया गया है। 

यहां इस नोट की एक तस्वीर है:

वित्तीय/ फाइनेंशिल एसेट

वित्तीय एसेट में कंपनी द्वारा अपनी सहायक कंपनियों, सहयोगी कंपनियों और जॉइंट वेंचर  में किए गए सभी लंबी अवधि के निवेश शामिल होते हैं। इसके अलावा, लंबी अवधि के डिपॉज़िट, वित्तीय बाजार निवेश और अन्य कंपनियों को दिए गए कर्ज़ भी इसमें शामिल होते हैं। नोट 5 से आपको कंपनी के स्वामित्व वाली सभी गैर-वर्तमान वित्तीय एसेट के बारे में गहराई से जानकारी मिलती है। 

गैर-वर्तमान टैक्स एसेट और आस्थगित टैक्स एसेट

भविष्य के लिए अपनी टैक्स योग्य आय को कम करने के लिए किसी कंपनी द्वारा उपयोग की जा सकने वाली सभी लॉन्ग टर्म एसेट्स को या तो गैर-वर्तमान टैक्स एसेट या आस्थगित टैक्स एसेट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। उदाहरण के तौर पर,  टैक्स का अधिक भुगतान या टैक्स के अग्रिम भुगतान को गैर-वर्तमान टैक्स एसेट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, क्योंकि उनका उपयोग भविष्य में कंपनी के कर दायित्व को कम करने के लिए किया जा सकता है। 

अन्य गैर-वर्तमान एसेट

वो सभी सहायक और विविध लॉन्ग टर्म एसेट जिन्हें ऊपर बताए गई लॉन्ग टर्म एसेट की किसी श्रेणी में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता, उन्हें आमतौर पर अन्य गैर-वर्तमान संपत्तियों के तहत वर्गीकृत किया जाता है।

वर्तमान एसेट

किसी कंपनी के वो एसेट जिन्हें एक वर्ष के अंदर नकदी में बदला जा सकता है, उन्हें आमतौर पर वर्तमान एसेट या करेंट एसेट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसे शॉर्ट टर्म एसेट या  छोटी अवधि के एसेट के रूप में भी जाना जाता है और इसे आसानी से बेचा या नकद में परिवर्तित भी किया जा सकता है। एचयूएल की बैलेंस शीट में आप निम्नलिखित वर्तमान एसेट देख सकते हैं।

इनवेंट्री/ भंडार

कंपनी जिस सामान और सामग्रियों का स्टॉक रखती है उसे इन्वेंट्री के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इन्वेंटरी, कच्चे माल और पैकिंग सामग्री से लेकर तैयार हो रहे और तैयार हो चुके माल तक, कुछ भी हो सकती है। एचयूएल के फाइनेंशियल स्टेटमेंट का नोट 11 आपको वर्तमान वर्ष में कंपनी की सभी इनवेंट्री की विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।  

वित्तीय एसेट/  फाइनेंशियल एसेट

गैर-वर्तमान वित्तीय एसेट के विपरीत, इन वित्तीय एसेट्स में एक कंपनी द्वारा किए गए सभी छोटी अवधि के निवेश शामिल होते हैं। इसमें छोटी अवधि के वित्तीय बाजार निवेश, बैंक बैलेंस, नकद शेष और व्यापार प्राप्य शामिल होते हैं। 

व्यापार प्राप्य एक कंपनी द्वारा बेचे जाने वाले उत्पाद हैं, जिसके लिए भुगतान प्राप्त करना अभी बाकी है। एचयूएल के मामले में नोट  6, 8, 12, 13 और 14 में कंपनी के स्वामित्व वाले करेंट फाइनेंशियल एसेट्स की जानकारी मिलती है।

अन्य वर्तमान एसेट्स

अन्य सभी सहायक और विविध शॉर्ट टर्म एसेट, जिन्हें किसी भी उपर्युक्‍त श्रेणियों के तहत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता,  उन्हें आमतौर पर अन्य वर्तमान एसेट के तहत वर्गीकृत किया जाता है।

बिक्री योग्य एसेट/ एसेट हेल्ड फॉर सेल

वो गैर-वर्तमान एसेट जिसे कंपनी एक वर्ष की अवधि में बेच सकती है उसे बिक्री योग्य एसेट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। ऐसे एसेट को गैर-वर्तमान एसेट के खंड से ट्रांसफर कर वर्तमान एसेट के खंड में पुनर्वर्गीकृत किया जाता है।

कुल एसेट

बैलेंस शीट के ‘एसेट’ पक्ष के जोड़ को 'कुल एसेट’ के रूप में दर्शाया गया है।

इक्विटी और लायाबिलिटीज़

बैलेंस शीट में इक्विटी और लायाबिलिटीज़ में तीन प्राथमिक श्रेणियां होती हैं:

  • इक्विटी
  • गैर-वर्तमान/नॉन- करेंट  लायाबिलिटी
  • वर्तमान/ करेंट लायाबिलिटी

आइए इन तीनों को थोड़ी गहराई से जानें।

इक्विटी

इक्विटी खंड में निम्नलिखित दो उप खंड होते हैं।

  • इक्विटी शेयर पूँजी/ इक्विटी शेयर कैपिटल

यह किसी कंपनी की इक्विटी शेयर पूंजी के कुल भुगतान मूल्य को दर्शाता है। फाइनेंशियल स्टेटमेंट के नोट्स सेक्शन में इक्विटी शेयर कैपिटल के अलग-अलग तत्वों की जानकारी दी होती है, जिसमें अधिकृत इक्विटी शेयरों की संख्या,  जारी किए गए और भुगतान किए गए इक्विटी शेयरों की संख्या शामिल होती है। 

  • अन्य इक्विटी:

इसमें अन्य इक्विटी बैलेंस जैसे कि सिक्योरिटी प्रीमियम और प्रमुख इम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन शामिल हैं। कंपनी के अन्य सभी रिज़र्व जैसे कि कैपिटल रिजर्व, कैपिटल रिडेम्पशन रिजर्व और प्रतिधारित आय भी इस टैब के अंतर्गत आती है। बैलेंस शीट के 'अन्य इक्विटी' टैब से जुड़ी बाकी जानकारी भी नोट्स अनुभाग में पाई जा सकती है।

लायाबिलिटीज़/ देनदारियां

बैलेंस शीट की एसेट पक्ष के समान ही लायाबिलिटीज़ के खंड में भी दो उप-श्रेणियां शामिल हैं:

  • गैर-वर्तमान लायाबिलिटीज़
  • वर्तमान लायाबिलिटीज़

यहां इन दोनों पर एक संक्षिप्त नजर डालते हैं। 

गैर वर्तमान देनदारियां/ नॉन- करेंट लायाबिलिटी

किसी कंपनी के जिन वित्तीय दायित्वों का भुगतान एक वर्ष में करने की उम्मीद नहीं की जाती है, उन्हें गैर-वर्तमान देनदारियों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। गैर-वर्तमान देनदारियों को आसानी से या जल्दी से निपटाया नहीं जा सकता है। एचयूएल की बैलेंस शीट में  आप निम्नलिखित गैर-वर्तमान देनदारियों को देख सकते हैं।

वित्तीय देनदारियां/ फाइनेंशियल लायाबिलिटी

ये वित्तीय देनदारियां किसी कंपनी के लंबी अवधि के चुकाए जाने वाले ऋण दायित्व हैं। सहायक और विविध वित्तीय देनदारियां जैसे कि लीज़ देनदारियां, कर्मचारी संबंधी देनदारियां और सिक्योरिटी डिपॉसिट, सभी को अन्य वित्तीय देनदारियों के तहत वर्गीकृत किया जाता है।

प्रावधान/ प्रोविज़न

एक कंपनी आमतौर पर अपने खातों में वर्तमान देनदारियों के लिए प्रावधान करती है। इन प्रावधानों का भविष्य में कंपनी द्वारा भुगतान किया जाना है। सभी लंबी अवधि के प्रावधानों को बैलेंस शीट के इस टैब के तहत वर्गीकृत किया गया है।

गैर-वर्तमान टैक्स देनदारियां

गैर-वर्तमान टैक्स देनदारियों में लंबी अवधि की टैक्स देनदारियां शामिल हैं जिन्हें कंपनी द्वारा चुकाया जाना है लेकिन इनका भुगतान अभी नहीं किया गया है। 

वर्तमान देनदारियां/ करेंट लायाबिलिटीज़

कंपनी की वो देनदारियों जिन्हें एक वर्ष की अवधि के अंदर चुकाया जाना है, उन्हें आमतौर पर वर्तमान देनदारियों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसे शॉर्ट टर्म लायाबिलिटी या छोटी अवधि की देनदारियों के रूप में भी जाना जाता है और इसे एक वर्ष के अंदर चुकाया जाता है। एचयूएल की बैलेंस शीट में  आप निम्नलिखित वर्तमान देनदारियों को देख सकते हैं।

वित्तीय देनदारियां/ फाइनेंशियल लायाबिलिटी

गैर-वर्तमान वित्तीय देनदारियों के विपरीत, इन वित्तीय देनदारियों में एक कंपनी द्वारा बकाया सभी छोटी अवधि की देनदारियां शामिल होती हैं। इसमें व्यापार देय राशियाँ भी शामिल हैं, ये किसी कंपनी के सप्लायरों को बकाया भुगतान होते हैं। 

इसके अलावा, सहायक और विविध छोटी अवधि की देनदारियां जैसे बकाया डिविडेंड, वेतन, मजदूरी, बोनस, और वर्तमान लीज़ देनदारियां, सभी को अन्य वित्तीय देनदारियों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।

अन्य वर्तमान देनदारियां

जिन वर्तमान वित्तीय दायित्वों को किसी भी उपर्युक्त श्रेणियों के तहत वर्गीकृत नहीं किया जा सकता उन्हें आमतौर पर अन्य वर्तमान देनदारियों के तहत वर्गीकृत किया जाता है। ग्राहकों द्वारा दिया गया एडवांस और वैधानिक बकाया राशि जैसे स्रोत पर कर कटौती (TDS) और प्रॉविडेंट फंड भुगतान इसके तहत दिखाए जाते हैं।

प्रावधान

सभी छोटी अवधि वाले और वर्तमान प्रावधानों को बैलेंस शीट के इस टैब के तहत वर्गीकृत किया गया है।

कुल देनदारियां

किसी कंपनी की बैलेंस शीट की इक्विटी और लायाबिलिटीज़ के पक्ष के जोड़ को कुल इक्विटी और देनदारियों के रूप में दर्शाया जाता है।

निष्कर्ष

ये सभी आंकड़े बहुत अधिक महत्व रखते हैं और इसका उपयोग कई रेशियो की गणना करने के लिए किया जा सकता है। यह आपको बताते हैं कि किसी कंपनी की क्या स्थिति है। यह बैलेंस शीट रेशियो, फंडामेंटल  एनालिसिस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और स्मार्ट मनी के अगले अध्याय में  हम इन आंकड़ों के बारे में और जानकारी हासिल करेंगे।

अब तक आपने पढ़ा

  • बैलेंस शीट के दो भाग हैं: एसेट और देनदारियां/ लायाबिलिटीज़।
  • एक बैलेंस शीट के एसेट पक्ष में दो प्राथमिक श्रेणियां होते हैं: गैर-वर्तमान एसेट और वर्तमान एसेट
  • गैर-वर्तमान एसेट वे एसेट हैं जो एक वर्ष से अधिक समय तक किसी कंपनी के पास हैं। उसे आसानी से या जल्दी से नकद में परिवर्तित करना संभव नहीं होता। इसे लंबी अवधि के एसेट के रूप में भी जाना जाता है।
  • गैर-वर्तमान एसेट में प्रॉपर्टी,  प्लांट, उपकरण, कैपिटल वर्क-इन-प्रॉग्रेस, गुडविल, अन्य एसेट, वित्तीय एसेट और गैर-वर्तमान टैक्स एसेट शामिल है।
  • किसी कंपनी के वो एसेट जिसे एक वर्ष के अंदर नकदी में परिवर्तित किया जा सकता है उसे वर्तमान एसेट के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसे शॉर्ट टर्म एसेट के रूप में भी जाना जाता है  और साथ ही उसे आसानी से बेचा या नकद में परिवर्तित भी किया जा सकता है।
  • वर्तमान एसेट में इन्वेंट्री, वित्तीय एसेट, अन्य वर्तमान एसेट और बिक्री योग्य एसेट शामिल हैं।
  • बैलेंस शीट की इक्विटी और लायाबिलिटी खंड में तीन प्राथमिक श्रेणियां होती हैं: इक्विटी, गैर-वर्तमान देनदारियां और वर्तमान देनदारियां।
  • इक्विटी खंड में दो उप-खंड होते हैं: इक्विटी शेयर पूँजी और अन्य इक्विटी।
  • कंपनी की जो देनदारियाँ एक वर्ष के दौरान नहीं चुकानी होती उन्हें गैर-वर्तमान देनदारियों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। गैर-वर्तमान देनदारियों को आसानी से या जल्दी से निपटाया नहीं जा सकता है।
  • गैर-वर्तमान देनदारियों में लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल लायाबिलिटी, प्रावधान और गैर-वर्तमान टैक्स लायाबिलिटी शामिल हैं।
  • एक वर्ष की अवधि के अंदर चुकाए जाने वाली कंपनी की देनदारियों को वर्तमान देनदारियों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इन्हें शॉर्ट टर्म लायाबिलिटी के रूप में भी जाना जाता है और इन्हें आमतौर पर एक वर्ष के भीतर चुकाया जाता है।
  • वर्तमान देनदारियों में शॉर्ट टर्म फाइनेंशियल लायाबिलिटी और वर्तमान प्रावधान शामिल हैं।
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