7. आशावादिता पूर्वाग्रह: अच्छे लोगों के साथ अच्छा होता है

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अगर मानव जाती आशावादी नहीं होती, तो यह इतनी विकसित नहीं होती जितनी आज हो चुकी है। जीवन कई प्रकार की अनिश्चितताओं, भय, और शंकाओं से घिरा हुआ है, इससे सिर्फ आत्मविश्वासी और आशावादी होने से ही मुक़ाबला किया जा सकता है और इन परेशानियों से बचा जा सकता है। पर यह आपको कभी-कभी इतना आत्मविश्वासी बना देता है कि आप तर्कहिन बातें करने लगते है और गलत निर्णयों के दलदल में अपने पैर फसाने लगते हैं। इसे ही आशावाद पूर्वाग्रह कहा जाता है।

आशावाद पूर्वाग्रह अक्सर हमें चीजों के प्रति एक अव्यवहारिक दृष्टिकोण की ओर ले जाता है। यह निवेशक को प्रक्रियाओं के प्रति तर्कहीन बनाता है, वह यह मानने लग जाते हैं कि उनके ज्ञान और अनुभव से बढ़ा और सही कुछ नहीं है और वह खुद को बेस्ट मानने लग जाते है। लेकिन ज़्यादातर, इस आशावाद और अति आत्मविश्वास पूर्वाग्रह की वजह से निवेशक अपने निवेश में कई बहुत बड़ी गलतियाँ कर बैठते हैं, जिनसे निपटना और उन्हें सुधारना बहुत मुश्किल हो जाता है।

जब बाजार बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा होता है और निवेश लाभदायक रिटर्न दे रहे होते हैं, तो निवेशक अपनी क्षमताओं और बुद्धिमत्ता के साथ बहुत ज्यादा आशावादी हो जाते हैं और भविष्य के मुनाफे के बारे में पूरी तरह सुनिश्चित हो जाते हैं कि उन्हें मुनाफा तो होगा ही होगा। और वह इतने ज्यादा आशावादी हो जाते है कि उन्हें  यह विश्वास हो जाता है कि उनके द्वारा किया गया कोई भी निवेश उनके लिए बुरा निवेश नहीं बन सकता है, मतलब उनके किए गए सभी निवेश उन्हें सिर्फ मुनाफा ही कमाकर देंगे।

परिस्थिति:

एक बार मनीष जैन ने 2019 में अपने निवेश पर 18% रिटर्न कमाया, जिससे उनके पास काफी अच्छा फंड या कहें कि पैसा जमा हो गया और इसके बाद उन्होंने वर्ष 2020 में 24% के प्रॉफ़िट रिटर्न की भविष्यवाणी की। पिछले आठ सालों में उनके निवेश मॉडल पर रिटर्न रेट धीरे-धीरे बढ़ा है, हर साल 3-4% की बढ़ोतरी होती है। पर अपने और मार्केट के ऊपर बहुत ज्यादा विश्वास की वजह से वह एक छलांग लगाते है और डबल रिटर्न की उम्मीद लगाकर दोगुना निवेश कर देते हैं। अब हम सब इसे अति आत्मविश्वास का नज़रिया कह सकते हैं। मार्च तक, मनोज काफी निश्चिंत थे, वो अपने परिवार के साथ अंतर्राष्ट्रीय अवकाश यात्रा पर अच्छे वर्ष का जश्न मना रहे थे, लेकिन मार्च के बाद तो मानो जैसे दुनिया ही पलट गयी, और पूरा साल ही लॉकडाउन में निकल गया, और इसी के साथ मनोज की अपेक्षाएं भी कम होती गयी।

जैसा कि आप समझ सकते हैं, ये पूर्वाग्रह उन परिणामों को जन्म दे सकते हैं जो किसी भी निवेशक के लिए हानिकारक हैं-

  • जोखिम कारकों को कम आंकना
  • अत्यधिक व्यापार
  • रिटर्न का अधिमूल्यांकन
  • किसी भी विरोधाभासी खबर को अनदेखा करना
  • बाजार से भी कम रिटर्न मिलना 

 जोखिम वाले कारकों को कम आंकना- आशावाद हर उस चीज़ से आंखे मूंद लेता है जो गलत हो सकती है। आशावाद पूर्वाग्रह के तहत आने वाले निवेशक अक्सर यह मानते हैं कि जब वह व्यवसाय करते हैं तो कुछ भी गलत नहीं हो सकता है। यह गलत आत्मविश्वास उन्हें अव्यवहारिक निर्णय की तरफ ले जाता है जो बहुत ही आवेश में आकर किए जाते है और बस इसी वजह से उन्हें इन निर्णयों में छुपा हुआ रिस्क दिखाई नहीं देता है।  

अत्यधिक व्यापार- आप जो नुकसान उठा सकते हैं या जितना नुकसान झेल सकते है, उससे ज्यादा निवेश करना एक गलती है और आशावाद पूर्वाग्रह की वजह से आप यह गलती बहुत आसानी से कर बैठते हैं। अत्यधिक व्यापार, जिसे आमतौर पर मंथन (चर्निंग) के रूप में जाना जाता है, आपके पोर्टफोलियो में आपके जोखिम झेलने की क्षमता से अधिक लेन-देन को संदर्भित करता है। यह ट्रेडिंग में एक खतरे की घंटी है जब ब्रोकर या सलाहकार  स्टॉक पर प्रत्येक लेनदेन के लिए एक निश्चित राशि लेते हैं और फिर प्रॉफ़िट मार्जिन घटने पर निवेश की हुई पूंजी अपने आप खत्म होने लगती है।

रिटर्न का अधिमूल्यांकन- यह एक समान्य गलती है जो तब होती है जब आपके आंखो पर आशावादिता की पट्टी बंधी होती है। ऐसा तब होता है जब आप अपने निवेश पर विश्वास करते हैं और उससे मिलने वाले प्रॉफ़िट मार्जिन को बहुत ही ज्यादा आंकने लगते है, क्योंकि पहले आपने शानदार ट्रेडिंग से अच्छा लाभ कमाया हुआ होता है। हर बार जब आप निवेश करते हैं तो अच्छे रिटर्न की उम्मीद करना गलत है, लेकिन रिटर्न को ज्यादा आंकना, मुनाफे से ज्यादा नुकसान कर सकता है। प्रत्येक निवेशक भविष्य के निवेश की योजना बनाता है और एक छोटे से निवेश के साथ भी अनिश्चितता रहती है। इस प्रकार, एक झूठे पूर्वानुमानित लेन-देन की वजह से हुआ नुकसान आपको निराशा की ओर ले जा सकता है और आपके भविष्य की निवेश योजना को भी बिगाड़ सकता है।

किसी भी विरोधाभासी खबर को अनदेखा करना - स्टॉक निवेश अनिश्चित और तेज़ी भरा कारोबार है। आमतौर पर निवेशकों की नजर सुबह सबसे पहले मार्केट रेट पर पड़ती  है। लेकिन आशावादी पूर्वाग्रह  एक निवेशक को वर्तमान परिदृश्यों की अनदेखी करने के लिए प्रभावित कर सकता है, चाहे वह कितना ही महत्वपूर्ण हों।  इस स्तर पर, निवेशक ऐसी किसी भी चीज की उपेक्षा और अवहेलना करते हैं जो उनके निवेशों का खंडन करती है यानि उन्हें निवेश करने से रोकती हैं और वे अपनी क्षमता और अनुभव में अति आत्मविश्वास दिखाते हैं। 

बाजार से कम रिटर्न मिलना- रिसर्च से पता चलता है कि एक औसत निवेशक लापरवाह फैसलों के कारण कुल 5.19% रिटर्न कमाता है और आसानी से पैसा खो देता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि समझदार वित्तीय निर्णय लेने के बजाय, निवेशक बाजार की प्रकृति पर भावनात्मक रूप से प्रतिक्रिया करते हैं और बढ़ते ओवरकॉन्फिडेंस के शिकार हो जाते हैं।

आशावाद पूर्वाग्रह से बचने के लिए, आपको आँखों से आशावाद की पट्टी उतारने और चीजों को उनके वास्तविक रूप में देखने की जरूरत होती है। ऐसी स्थितियों से बचने के तरीके हैं, जहां निवेशक आशावादी होकर मुनाफे को ज्यादा आंक सकते हैं।

1 - चुपचाप बैठें और कुछ भी न करें- अगर आपने लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निवेश की योजना बनाई है, तो हर दिन शेयरों को न देखें और बाजार के उतार-चढ़ाव की चिंता ना करें। इससे परेशान न हों क्योंकि बाजार में अल्पकालिक बदलाव निवेश के लॉन्ग-टर्म प्लान को प्रभावित नहीं करते।

2 - वैज्ञानिक तकनीक अपनाएं- निवेश का परिणाम शेयर बाजार के तरीकों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्राप्त सूत्रों के मुताबिक मिलता है। इसलिए, इन सूत्रों के अनुसार अपने निवेश की योजना बनाएं और उनके द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों पर भरोसा करें।

3 - बेचने की जल्दी न करें- जब बाजार नीचे जा रहा हो, तो जल्दबाजी में इक्विटी बेचना शुरू ना करें। अगर आपने निवेश की योजना इस तरह से बनाई है कि आप बाजार में तेजी वापस आने तक कायम रह सकते हैं, तो इंतजार करें। ऐसे निर्णय लेने में जल्दबाजी न करें जो आपके दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। 

निष्कर्ष

अब जब हम आशावाद पूर्वाग्रह की मूल बातें समझ चुके हैं, और ये भी कि हम इसे कैसे टाल सकते हैं, आइए एक और तरह के पूर्वाग्रह की ओर बढ़ते हैं, जिसे सूचना-प्रसंस्करण पूर्वाग्रह के रूप में जाना जाता है।

अब तक आपने पढ़ा

  1. आशावाद पूर्वाग्रह एक अलौकिक दृष्टिकोण के साथ चीजों को मापने को दर्शाता है, जिसके परिणामस्वरूप निवेश के वर्तमान और भविष्य के बारे में अवास्तविक सकारात्मक दृष्टिकोण बन जाता है। 
  2. आशावाद पूर्वाग्रह के कई कारण हो सकते हैं, इनमें प्रमुख हैं जो फलते-फूलते रिटर्न, बाजार में वृद्धि, अति आत्मविश्वास और लाभदायक निवेश करने का उत्साह जिससे निवेशक अपने विचारों को सर्वश्रेष्ठ समझने लगता है। 
  3. आशावाद पूर्वाग्रह के परिणाम अत्यधिक व्यापार, बाजार से कम रिटर्न और रिटर्न का अधिमूल्यांकन जितना घातक हो सकते हैं।
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