5. सेबी से मुलाकात

icon

आपको याद होगा मॉड्यूल 1 में हमने आपको भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड/सिक्योरिटिस एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी/SEBI) के बारे में थोड़ी जानकारी दी थी ? अब इस शेयर मार्केट रेगुलेटर को बेहतर तरीके से जानने का समय आ गया है। सेबी क्या है ? इसकी वर्गीकृत संरचना कैसी है? और इसकी स्थापना क्यों हुई थी। आइए, इन सवालों के जवाब का पता लगाएँ।

सेबी क्या है?

आपको याद होगा कि सेबी एक संवैधानिक नियामक संस्था है जो भारत में सिक्योरिटी और कमोडिटी मार्केट को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए ज़िम्मेदार है। यह इकाई भारत सरकार के अधिकार में आती है और इसे 1988 में स्थापित किया गया था। हालांकि, 1992 तक, यह एक गैर-वैधानिक निकाय था, जिसका वास्तव में बाज़ारों पर अधिक नियंत्रण नहीं था। 30 जनवरी, 1992 को ही, SEBI को एक स्वायत्त निकाय घोषित किया गया था और SEBI अधिनियम, 1992 के माध्यम से संवैधानिक शक्तियाँ दी गई थीं।

सेबी का मुख्यालय मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में है, और देश भर के अन्य शहरों में कई क्षेत्रीय कार्यालय हैं, जैसे:

  • नई दिल्ली
  • कोलकाता
  • बेंगलुरु
  • चेन्नई
  • कोच्चि
  • अहमदाबाद
  • हैदराबाद
  • शिमला
  • जयपुर
  • लखनऊ

सेबी की स्थापना क्यों की गई?

1970 के दशक के अंत तक और पूरे 1980 के दशक के दौरान, पूँजी बाज़ार (कैपिटल मार्केट) और उनके द्वारा किए गए वादों ने कई निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित किया। कई व्यक्तियों के साथ-साथ निगमों ने भी इन बाज़ारों के ट्रेड में भाग लेना शुरू कर दिया। हालांकि, यह पूँजी बाज़ार कई तरह के भ्रष्टाचार व फ्रॉड का एक बड़ा केंद्र बन गए थे क्योंकि इन पर लगाम लगाने और इनको निर्देशित करने के लिए कोई भी नियम या विनियम नहीं थे।

अनौपचारिक तरीके से निजी तौर पर शेयरों का आवंटन हुआ, कीमतों में हेराफेरी की गई और कई स्वयंभू मर्चेन्ट-बैंकर उभरे। स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा बनाए गए नियमों का भी उल्लंघन हुआ और कंपनी अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।

इन सब चीज़ों की वजह से ऐसी स्थितियाँ पैदा हो गयी जहां शेयर बाज़ारों में लोगों का भरोसा कमज़ोर होने लगा। इन घटनाओं की वजह से हो रहे बुरे प्रभावों  का मुकाबला करने के लिए, सरकार ने एक नियामक संस्था को स्थापित करने की ज़रूरत को समझा और इसलिए सेबी की स्थापना की गई - बाज़ारों के कामकाज को विनियमित करने और छल-कपट को कम करने और समाप्त करने के लिए।

सेबी की संगठनात्मक संरचना कैसी है?

सेबी के बोर्ड में नौ सदस्य शामिल है -

  • एक अध्यक्ष, जिसे भारत सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है
  • दो बोर्ड सदस्य जो केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधिकारी हैं
  • भारतीय रिजर्व बैंक से एक बोर्ड सदस्य
  • भारत सरकार द्वारा नामित पांच सदस्य, जिनमें से कम से कम तीन पूर्णकालिक सदस्य होंगे

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) का काम -

आपके जैसे निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए, सेबी के मुख्य रूप से तीन प्रकार के कार्य हैं:

  • सुरक्षात्मक कार्य 
  • विनियामक कार्य 
  • विकासात्मक कार्य 

आइए इन कार्यों को थोड़ा और विस्तार से देखें।

सुरक्षात्मक कार्य

सेबी वित्तीय बाज़ारों में व्यापारियों, निवेशकों और अन्य प्रतिभागियों के हितों की रक्षा के लिए इन कार्यों को करता है। सुरक्षात्मक क्षेत्र में सेबी की भूमिका में नीचे दिए गए काम शामिल हैं:

  • कीमत में हेराफेरी की जाँच करते रहे
  • इनसाइडर ट्रेडिंग को प्रतिबंधित करना
  • अनुचित और कपटी व्यापार प्रथाओं को रोकना
  • निष्पक्ष प्रथाओं को बढ़ावा देना
  • निवेशकों के बीच बाज़ार से जुड़ी शिक्षा जागरूकता बढ़ाना

विनियामक कार्य

सेबी के विनियामक कार्यों से इसे यह जाँचने में मदद मिलती है कि बाज़ारों में कारोबार कैसे किया जा रहा है। नियामक क्षेत्र में सेबी की भूमिका में ये सभी काम शामिल हैं:

  • दलालों, उप-दलालों और व्यापारी बैंकरों समेत अन्यों का पंजीकरण, 
  • कंपनियों के अधिग्रहण को विनियमित करना
  • स्टॉक एक्सचेंजों की पूछताछ और ऑडिट आयोजित करना
  • वित्तीय मध्यस्थों के समुचित कार्य के लिए दिशा-निर्देश तैयार करना
  • क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का पंजीकरण और विनियमन

विकासात्मक कार्य

सेबी न केवल बाज़ारों को नियंत्रित करता है, बल्कि उन्हें विकसित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसीलिए इसके कार्यों में विकासात्मक भूमिकाएँ भी शामिल हैं। विकासात्मक कार्य में सेबी की भूमिका में ये सभी काम शामिल हैं:

  • वित्तीय मध्यस्थों की शिक्षा और प्रशिक्षण 
  • रिसर्च का संचालन
  • निष्पक्ष-व्यापारिक प्रथाओं को बढ़ावा देना
  • स्टॉक एक्सचेंजों में गतिविधियों को विकसित करना और उन्हें बढ़ावा देना
  • स्व-विनियमन संगठनों को प्रोत्साहित करना

सेबी के पास क्या शक्तियाँ हैं?

इन तीनों तरह के कार्यों को करने के लिए, सेबी को काफी उपयुक्त शक्तियों की ज़रूरत होगी, है ना? सेबी अधिनियम के नियम इस स्वायत्त संस्था को तीन प्रकार की शक्तियाँ देते हैं। यहां सेबी की शक्तियों को काफी करीब से समझाया गया है -

अर्ध-न्यायिक शक्तियाँ:

जब कोई धोखाधड़ी या अनैतिक व्यापारिक व्यवहार होता है तो यह शक्तियाँ सेबी को सुनवाई करने और निर्णय सुनाने करने का अधिकार देती हैं,। इन शक्तियों का उपयोग करके, सेबी यह सुनिश्चित कर सकता है कि पूँजी बाज़ारों में पारदर्शिता और निष्पक्षता हो।

अर्ध-विधायी शक्तियाँ:

इन शक्तियों के साथ, सेबी मध्यस्थों या आप जैसे निवेशकों की सुरक्षा के लिए नियम और कायदे तैयार कर सकता है। इससे किसी भी आपराधिक या धोखाधड़ी वाली व्यापारिक गतिविधियों की संभावना को कम करने में भी मदद मिलती है।

अर्ध-कार्यकारी शक्तियाँ:

सेबी की अर्ध-कार्यकारी शक्तियाँ इसे किसी भी संदिग्ध गतिविधि के मामले में पार्टियों के खातों और अन्य दस्तावेज़ों का निरीक्षण करने की अनुमति देती हैं। जो भी सेबी के नियमों और कायदों का उल्लंघन करता है तो यह शक्तियाँ नियामक संस्था को उसके खिलाफ मामला दर्ज करवाने की अनुमति देती है।

एक निवेशक के रूप में, सेबी के साथ आपका क्या संबंध है?

बताए कार्यों के अलावा, सेबी की कुछ रिपोर्टिंग ज़रूरतें भी होती हैं जिन्हें सूचीबद्ध कंपनियों को पूरा करना होता है। यह रिपोर्ट आपके जैसे निवेशकों के लिए जानकारी का मूल्यवान स्रोत साबित हो सकती है, क्योंकि वे आपको कंपनी के फाइनेंशल और अन्य गुणात्मक पहलुओं की बहुत अच्छी जानकारी देती हैं।

हालांकि आप भारतीय वित्तीय बाज़ारों में एक निवेशक के रूप में सेबी के साथ सीधे संपर्क में नहीं रहते है , लेकिन सेबी की मौजूदगी और शक्तियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि आपको एक उचित और परेशानी मुक्त ट्रेडिंग अनुभव मिले। सेबी अन्य वित्तीय मध्यस्थों के हितों की भी रक्षा करता है और उनका भी ध्यान रखता है।

निष्कर्ष

वास्तव में, आपको एक मध्यस्थ के साथ सीधे संपर्क करने का मौका मिलेगा और वह है - स्टॉकब्रोकर। इसलिए, एक निवेशक के रूप में आपको स्टॉकब्रोकर कौन हैं और वे क्या करते हैं, इस जानकारी से काफी मदद मिलेगी। इनके बारे में अधिक जानने के लिए अगले अध्याय पर जाएँ।

अब तक आपने पढ़ा

  • सेबी एक संवैधानिक नियामक संस्था है जो भारत में सिक्योरिटीज़ और कमोडिटी बाज़ारों को विनियमित करने के लिए ज़िम्मेदार है।
  • सेबी की स्थापना बाज़ारों के काम को विनियमित करने और फ्रॉड को कम करने और खत्म करने के लिए की गई थी।
  • सेबी के बोर्ड में नौ सदस्य होते हैं।
  • सेबी में मुख्य रूप से तीन प्रकार के कार्य होते हैं: सुरक्षात्मक कार्य, विनियामक कार्य, विकासात्मक कार्य
  • सेबी अधिनियम के नियम इस स्वायत्त निकाय को तीन प्रकार की शक्तियाँ प्रदान करते हैं: अर्ध-न्यायिक, अर्ध-विधायी और अर्ध-कार्यकारी।
  • हालांकि आप भारतीय वित्तीय बाज़ारों में एक निवेशक के रूप में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से सीधे संपर्क नहीं करते, लेकिन सेबी की मौजूदगी और शक्तियाँ यह सुनिश्चित करती हैं कि आपके पास एक उचित और परेशानी मुक्त ट्रेडिंग अनुभव हो।
icon

अपने ज्ञान का परीक्षण करें

इस अध्याय के लिए प्रश्नोत्तरी लें और इसे पूरा चिह्नित करें।

टिप्पणियाँ (0)

एक टिप्पणी जोड़े

Get Information Mindfulness!

Catch-up With Market

News in 60 Seconds.


The perfect starter to begin and stay tuned with your learning journey
anytime and anywhere.

Visit Website
logo logo

Get Information Mindfulness!

Catch-up With Market

News in 60 Seconds.

logo

The perfect starter to begin and stay tuned with your learning journey anytime and anywhere.

logo
logo

के साथ व्यापार करने के लिए तैयार?

logo