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टैक्स की बचत

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धारा 80सी के अंतर्गत शामिल समावेशन की सूची

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परिस्थिति 1:

आपको ईशा तो याद ही होगी, अरे वही टेकी लड़की।

उसने अपनी सैलरी में हुई कटौती के बारे में अपने प्रश्नों के उत्तर ढूंढ लिए थे, वह कटौती भविष्य निधि (प्रोविडेंड फंड) और आयकर थे।

उसका अगला मिशन क्या है?

वह नैतिक रूप से अपने करों को बचाने और अपनी आय का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा खुद के लिए बचाने का प्रयास कर रही है। और यही कारण है कि वह भारत के आयकर अधिनियम की धाराओं के बारे में ज्यादा से ज्यादा जान रही है।

जानना चाहते हैं कैसे?

इस अध्याय में सेक्शन 80सी के बारे में जानें और उसे समझने का प्रयास करें।

 ऐसे कई खर्च और निवेश हैं, जिन्हें भारत के आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत आयकर से छूट दी गई है।  एक निवेशक की कुल कर योग्य आय पर हर साल 1.50 लाख रुपए तक की अधिकतम कटौती या छूट दी जाती है।

व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों की आय को सिर्फ सेक्शन 80 सी के तहत छूट दी गई है। व्यवसाय, कॉर्पोरेट निकाय, साझेदारी फर्म इस अधिनियम के तहत टैक्स में छूट पाने के योग्य नहीं हैं। धारा 80 सी के कुछ उपखंड हैं, आइए उन्हें समझते हैं।

सेक्शन 80सी के सबसेक्शन

कर बचत अनुभाग

कर छूट के लिए योग्य निवेश

धारा 80 सी

भविष्य निधि जैसे ईपीएफ, पीपीएफ में किए गए निवेश, जीवन बीमा प्रीमियम का भुगतान, इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम, होम लोन की मूल राशि, एसएसवाई, एनएससी, एससीएसएस, आदि के लिए किया गया भुगतान।

धारा 80सीसीसी

पेंशन योजनाओं और म्यूचुअल फंड का भुगतान।

धारा 80सीसीडी(1)

विभिन्न सरकारी समर्थित योजनाओं जैसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली, अटल पेंशन योजना, आदि के लिए भुगतान

धारा 80 सीसीडी (1B)

एनपीएस में ₹50,000 तक के निवेश को भी इस धारा के तहत छूट दी गई है।

Section 80 सीसीडी (2)

एनपीएस के प्रति नियोक्ता का योगदान (10% तक, जिसमें मूल वेतन और महंगाई भत्ता शामिल है) को छूट दी गई है।

आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत यह निवेश कटौती योग्य हैं -

ऐसे कुछ निवेश हैं जो आपको टैक्स बचाने में मदद कर सकते हैं क्योंकि उन्हें धारा 80 सी के तहत छूट दी गई है। हर निवेश विकल्प के साथ एक लॉक-इन-पीरियड और रिस्क फैक्टर जुड़ा हुआ है, आपको जो सबसे अच्छा लगे वह आप चुन सकते हैं। आपकी बेहतर समझ के लिए यहाँ निवेश विकल्पों की लिस्ट दी हुई है:

निवेश के विकल्प

ब्याज

न्यूनतम लॉक-इन-पीरियड

रिटर्न निश्चित 

संबंधित जोखिम

ईएलएसएस

12% से 15%

(बाजार में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है)

3 साल

नहीं

उच्च

एनपीएस

8% से 10%

जब तक निवेशक 60 वर्ष के होते हैं (रिटायरमेंट)

नहीं

उच्च

एससीएसएस

8.60%

5 वर्ष

हाँ

कम

पिपीएफ

7.90%

15 वर्ष

हाँ

कम

एनएससी

7.9%

5 वर्ष

हाँ

कम

यूलिप

8% से 10%

(बाजार में उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है)

5 वर्ष

नहीं

मध्यम

फ़िक्स्ड डिपॉजिट

8.40% तक

5 वर्ष

हाँ

कम

सुकन्या समृद्धि योजना

8.50%

8  वर्ष

हाँ

कम

 ईशा की दोस्त के साथ क्या हुआ ?

ईशा की उम्र के ज़्यादातर युवा, जीवन बीमा पॉलिसी में कभी दिलचस्पी नहीं लेते थे। एक दोस्त के साथ घटे वाक्ये की वजह से उसने जाना कि कठिनाइयों के समय में बीमा पॉलिसी हमारी कितनी ज्यादा मदद करती है। अपने दादा की मृत्यु के बाद,  जीवन बीमा की वजह से उनकी दादी कुछ वर्षों तक परिवार चलाने में सक्षम रहीं, जब तक कि उसके पिता बड़े नहीं हो गए।

जीवन बीमा प्रीमियम

जो प्रीमियम आप जीवन बीमा पॉलिसी के लिए भरते हैं, उससे ना सिर्फ आपको सुरक्षा मिलती है, अप्रत्याशित परिस्थितियों में बचाव भी हो जाता है और इसी के साथ आप 80सी में बताई गयी सीमा के अनुसार कर लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

वह सभी नीतियां, जिनमें आप अपने, जीवनसाथी, आश्रित बच्चों के लिए निवेश करते हैं, वह छूट के पात्र हैं। हिंदू अविभाजित परिवार के सदस्यों को भी उन्हीं समान छूटों का लाभ मिल सकता है। वर्तमान में, पॉलिसी के तहत बीमित राशि के वार्षिक प्रीमियम के 10% को 80 सी के तहत छूट प्राप्त है।

एनी का एक सवाल है!

वह अपनी सैलरी में से प्रॉविडेंड फंड के लिए हो रही कटौती की वजह से परेशान है। वह ₹35,000 प्रति माह कमाती है जिसमें से ₹2,000 भविष्य निधि की कटौती में चले जाते है।  पर यह प्रॉविडेंट फंड आखिर क्या है ?

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सामान्य भविष्य निधि/ प्रॉविडेंट फंंड

यह कटौती आपको टैक्स को बचाने में मदद करती है। लोक भविष्य निधि के लिए जो योगदान किया जाता है, वह धारा 80 सी के तहत टैक्स में कटौती के लिए फाइल किया जा सकता है। पब्लिक प्रॉविडेंट के तहत अधिकतम जमा सीमा 1 लाख 50 हजार रुपए है।

यह आपको एक निवेशक के रूप में आपके द्वारा जमा की गई पूरी राशि को आयकर अधिनियम के तहत छूट के रूप में क्लेम करने की अनुमति देता है। इस फंड के लिए एक कर्मचारी के रूप में आप जो स्वैच्छिक योगदान करते हैं, वह आपको आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर बचाने में भी मदद करता है।

नाबार्ड ग्रामीण बॉन्ड

नाबार्ड, नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट या नाबार्ड रुरल बॉन्ड प्रदान करता है। अगर आप नाबार्ड द्वारा दिए गए ग्रामीण बॉन्ड में निवेश करते हैं, तो आप टैक्स बचाने में सक्षम होंगे क्योंकि ग्रामीण बॉन्ड भारत के आयकर अधिनियम के तहत कर छूट के पात्र हैं। धारा 80 सी के तहत अधिकतम कटौती योग्य राशि 1.5 लाख रुपए है।

क्या हम दिनेश की परेशानी को हल कर सकते हैं?

दिनेश, जो एक कामकाजी पेशेवर है, को एक ऐसा निवेश नहीं मिल रहा है जो लॉन्ग-टर्म तो हो ही, साथ ही साथ उसकी टैक्स बचाने में मदद भी करे। यही कारण है कि उसका दोस्त ,जो एक इनवेस्टमेंट बैंकर है, उसे यूलिप में निवेश करने का सुझाव देता है।

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP)

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत, आप यूलिप में निवेश कर 1.5 लाख रुपए तक की छूट प्राप्त कर सकते हैं।

 क्या दिनेश किसी और चीज़ में निवेश कर सकता है जो कम जोखिम भरा हो?

दिनेश नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में भी निवेश कर सकता ह, अगर वह तुलनात्मक रूप से शॉर्ट-टर्म निवेश करना चाहता है।

राष्ट्रीय बचत पत्र

राष्ट्रीय बचत पत्र, सबसे लोकप्रिय टैक्स-सेविंग साधनों में से एक है, जिसमें व्यक्तियों के लिए कम से कम रिस्क फैक्टर होता है। एनएससी में निवेश करने की सबसे शानदार बात यह है कि आपके द्वारा अर्जित ब्याज अर्ध-वार्षिक रूप से कम्पाउंड होता है। और साथ ही अधिकतम मैच्योरिटी अवधि केवल 5 से 10 वर्ष तक होती है।

आपको एक वित्तीय वर्ष में एनएससी के तहत कुल राशि पर किसी सीमा का पालन नहीं करना है। फिर भी, जो राशि धारा 80 सी के तहत छूट के अधीन है, वह अधिकतम 1.50 लाख रुपए है। 

अपने आसपास देखो !

क्या आपने कभी ऐसे लोगों को सुना है जो आपसे उम्र में बड़े हैं और एफडी में निवेश करने की बात करते रहते हैं ? एफडी पैसे और करों को बचाने के लिए एक लोकप्रिय और विश्वसनीय उपकरण क्यों है?

टैक्स सेविंग एफडी

टैक्स सेविंग एफडी बैंकों और डाकघरों, दोनों द्वारा ऑफर की जाने वाली फ़िक्स्ड डिपॉडजिट स्कीम है जो धारा 80 सी के तहत कर कटौती की अनुमति देती है। इन एफडी में 5 साल की लॉक-इन अवधि होती है और अधिकतम 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट (मूल राशि पर) की पेशकश करते हैं। हालांकि, ऐसे उपकरणों के रिटर्न कराधान के योग्य होते हैं और यह कम से कम जोखिम के साथ आते हैं।

ईपीएफ

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से ब्याज सहित, आपको जो रिटर्न मिलता है उसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत छूट दी जाती है। हालांकि, ईपीएफ केवल उन कर्मचारियों के लिए होता है, जिन्होंने कम से कम 5 साल तक अपनी सेवा (सर्विस) जारी रखी है। आप ईपीएफ खातों में स्वैच्छिक योगदान भी कर सकते हैं,  और योगदान की हुई यह राशि धारा 80 सी के तहत कर छूट का पात्र  है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड

अगर आप ₹20,000 से ज्यादा पैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश करते हैं तो, आप आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कर छूट के पात्र हैं। इन लॉन्ग-टर्म सिक्योर्ड बॉन्ड के लिए भी 1.50 लाख रुपए की लिमिट लागू होती है।  

इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम

एक अन्य उपकरण जो धारा 80सी की छूट श्रेणी में आता है वह है इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम या ईएलएसएस। आप 1.5 लाख रुपये की अधिकतम सीमा तक टैक्स बचा सकते हैं। ईएलएसएस सेविंग स्कीम में 3 साल की अनिवार्य लॉक-इन अवधि होती हैं।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना

अगर कोई भी वरिष्ठ नागरिक, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) में निवेश करता है, तो वह सेक्शन 80सी में बताई गयी अधिकतम आवंटित सीमा तक के लिए छूट पा सकता है, जो 1.50 लाख रुपए है। कोई भी व्यक्ति जो 60 वर्ष से अधिक आयु का है और जो लोग स्वैच्छिक रिटायरमेंट योजना चुनते हैं, वे एससीएसएस से लाभ प्राप्त करने के लिए 55 वर्ष की आयु के बाद ही एससीएसएस में भाग ले सकते हैं। एससीएसएस के लिए 5 वर्ष की न्यूनतम लॉक-इन-अवधि निर्धारित है।

अगर आप लोन का भुगतान कर रहे हैं तो क्या आप टैक्स बचा सकते हैं?

आप तो सही में भाग्यशाली हैं, क्योंकि इसका जवाब हाँ है! चलिए, पता लगाइए कैसे!

होम लोन के लिए चुकाया गया मूलधन -

जब आप होम लोन के मूल धन की ईएमआई का भुगतान करते हैं, तो आप धारा 80 सी के तहत छूट के पात्र हैं। हालांकि, आपको इसका लाभ उठाने के लिए इन विशिष्ट खंडों को पूरा करना होगा:

1 - अगर प्रॉपर्टी का निर्माण पूरा हो गया हो तब ही छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है।

2 - अगर आप प्रॉपर्टी को 5 साल के भीतर ट्रांसफर करते हैं, तो वह इसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के तहत प्रदान की गई कर छूटों से बाहर कर देगा।

3 - अगर प्रॉपर्टी के कब्जे के 5 साल बाद उसे हैंडओवर किया जाता है तो कर कटौती के रूप में क्लेम की गई राशि ट्रांसफर वाले साल में कर योग्य होगी। इस नियम को पूरा करने में असफल रहने पर इसे धारा 80 सी के दिशानिर्देशों से अलग रखा जाएगा।

स्टैम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क

किसी भी संपत्ति का मालिक बनने के लिए दो सबसे बड़े खर्चे करने पड़ते है, वह हैं – स्टैम्प ड्यूटी  और रजिस्ट्रेशन चार्ज। धारा 80 सी के तहत, भारत सरकार स्टैम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क पर कर देयता में कटौती की अनुमति देती है बशर्ते भुगतान आपने घर की खरीद के लिए किया हो। हालांकि, आपको उस वर्ष में छूट का दावा करना होगा जब इन ड्यूटी और चार्ज का भुगतान किया जाता है; अन्यथा, यह धारा 80 सी कटौती का लाभ नहीं ले पाएगा।

क्या आपकी कोई बेटी है?

रेनू की एक बेटी है और वह उसके भविष्य को सुरक्षित करना चाहती है। जब वह अपने बेटी के लिए पैसे बचाने और निवेश करने के तरीकों की तलाश कर रही होती है, तो उसकी सहकर्मी, जिसकी भी एक बेटी है, उसे सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करने की सलाह देती है।

 सुकन्या समृद्धि योजना

सुकन्या समृद्धि योजना एक बचत योजना है। यह एक लड़की की शिक्षा और शादी के वक्त आने वाली वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक बेहतरीन उपकरण है। माता-पिता या बालिका के कानूनी अभिभावक इस खाते को खोल सकते हैं, बशर्ते वह बालिका 10 वर्ष से ज्यादा की ना हो। 2 या अधिक लड़कियों के माता-पिता भी जुड़वा लड़कियों के मामले में इस योजना में निवेश कर सकते हैं। इस निवेश योजना से अर्जित ब्याज धारा 80 सी के तहत कर छूट का पात्र है।

निवेश और टैक्स बचाने के दौरान आपको कुछ और बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • 80 सी कटौती के लिए क्लेम की अनुमति तब मिलती है जब उस मूल्यांकन वर्ष के अंत से पहले आय रिटर्न दाखिल की जाए। उदाहरण के लिए, अगर आप 30 अप्रैल 2021 को धारा 80 सी दिशानिर्देशों के अनुसार निवेश करते हैं, तो आप आकलन वर्ष 2021-2022 में इस तरह के निवेश पर कर छूट का दावा करने में सक्षम होंगे।
  • आप निजी बीमा एग्रीगेटर से जीवन बीमा खरीद सकते हैं और तब भी भुगतान किया गया प्रीमियम धारा 80 सी के तहत कटौती का पात्र होगा। सुनिश्चित करें कि बीमा एग्रीगेटर को IRDAI (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया) द्वारा मान्यता प्राप्त है।
  • आपके द्वारा विशिष्ट संस्थानों और निधियों को दिए गए दान इस खंड के तहत कर छूट के पात्र हैं।
  • संयुक्त रूप से कर-बचत साधनों की ओर किए गए सभी निवेशों में आपको धारा 80 सी के तहत ₹1,50,000 तक की अधिकतम कर छूट की अनुमति है।

निष्कर्ष

अब जब आप धारा 80सी को विस्तार से समझ गए हैं, तो हम अगले बड़े विषय पर चलते हैं - धारा 80डी। और जानकारी के लिए अगले अध्याय पर जाएँ।

अब तक आपने पढ़ा

  • विभिन्न प्रकार के खर्च और निवेश हैं जिन्हें भारत के आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत आयकर से मुक्त किया गया है।
  • हर साल, एक निवेशक की कुल कर योग्य आय पर छूट दी जाने की अधिकतम राशि 1.5 रुपए लाख होती है।
  • धारा 80 सी के तहत, आप करों से छूट प्राप्त करने के लिए ईएलएसएस, एनपीएस, एससीएसएस, पीपीएफ, एनएससी, यूलिप, फिक्स्ड डिपॉजिट और सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश कर सकते हैं। ये सभी उपकरण निवेश, जोखिम कारक और लॉक-इन अवधि की सीमा के साथ आते हैं।
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इस अध्याय के लिए प्रश्नोत्तरी लें और इसे पूरा चिह्नित करें।

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