8. सूचना पूर्वाग्रह: जो आपने कहा वो मुझे पसंद नही, मुझे कुछ और पसंद है

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सरल शब्दों में, सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह का अर्थ है कि सूचना को उसके सही अर्थों में समझने की असमर्थता और सूचना को तर्कहीन और एकदम से बिना कुछ विचार किए समझना व सही मान लेना।  सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह कई कारणों से होता है, जिसे संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह के समान पॉइंट में देखा जा सकता है- निर्णय, तथ्यों और फैसलों को समझने में एक व्यवस्थित त्रुटि।

सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह, विश्वास दृढ़ता पूर्वाग्रह की तरह एक संज्ञानात्मक गलती है।  विश्वास दृढ़ता पूर्वाग्रह तब उत्पन्न होता है जब कोई व्यक्ति पिछले समाचार की वजह से किसी नई जानकारी को नहीं समझ पाता है। वह व्यक्ति किसी नयी जानकारी को मानने या उसकी प्रक्रिया को ही स्वीकार करने से इनकार कर देता है क्योंकि उसके किए किसी भी नयी स्थिति को समझना बहुत कठिन होता है। वह तो किसी भी खबर या सूचना से जुड़ी पुरानी जानकारी पर ही अड़े रहते हैं और यह मानते है कि उनके पास जो जानकारी है वही सही है। यहाँ तक कि अगर वह कोशिश भी करते हैं तो सिर्फ उसी जानकारी के ऊपर ध्यान देते हैं जो उनके खुद के विचारों के साथ मेल खाती हैं और उनकी समझ के साथ सहमत होती हैं।

सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह भी पुष्टि पूर्वाग्रह जैसा ही है। लोग स्वाभाविक रूप से सिर्फ उसी जानकारी पर ध्यान देते हैं जो उनकी पिछली मान्यताओं से सहमत होती है और हर उस जानकारी को अस्वीकार करते हैं जिसे वे मानना नहीं चाहते हैं। यह उनकी पसंद और नापसंद की चीजों पर चयनात्मक ध्यान (सिलेक्टिव अटेन्शन) देने जैसा है।

लेकिन पूर्वाग्रह को सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह या पुष्टि पूर्वाग्रह के बीच में वर्गीकृत करने से ज्यादा, संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह और भावनात्मक पूर्वाग्रह के बीच अंतर करना बहुत अधिक जरूरी है।

एक संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह एक प्रणालीगत त्रुटि को बताता है, जब कोई व्यक्ति एक नयी जानकारी को समझने की कोशिश करता है, और इस जानकारी को भविष्य के निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में लागू करने की कोशिश करता है।

जब भी किसी अच्छे निर्णय लेने की बात आती है, तो उसे लेने के दो तरीके होते हैं। पहला तो यह कि इससे संबंधित सारी जानकारी को इकट्ठा करें, तथ्यों का गहराई से विश्लेषण करें, आपके हाथ में जो वैकल्पिक निर्णय है उनके परिणामों की गणना करें और फिर आखिरी निर्णय लेना है कि क्या करना है और क्या नहीं। और दूसरा एक आज़माया और परीक्षण किया गया शॉर्टकट है, एक व्यापक अनुमान लगाना और बस इसी के साथ आगे बढ़ना।

दूसरा विकल्प ह्युरिस्टिक्स कहलाता है। समाजवादी हर्बर्ट साइमन ने बाउंडेड रैशनैलिटी के सिद्धांत को पेश किया, जिसमें कहा गया था कि अगर हम निर्णय लेने की प्रक्रिया को जानकारी जुटाने और समझने के समय और क्षमता की बाधाओं के अधीन रखते हैं। उस स्थिति में, प्रक्रिया ठीक से तर्कसंगत होने के बजाय संतोषजनक होगी। और अगर निर्णय ही पूरी तरह से सही नहीं है, तो निर्णय लिया कैसे जाता है?

उदाहरण:

मान लीजिए कि एक कंपनी के बारे में अफवाह फैलती है कि वह दिवालिया होने वाली है। और जब यह जानकारी सामने आती है, तो निवेशक कंपनी में अपना स्टॉक बेचना शुरू कर देते हैं। स्वाभाविक रूप से, वे चीजों पर नज़र रखने के लिए कंपनी से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के बारे में खोजना करना शुरू करते हैं। कंपनी के दिवालिया होने की खबरों के बीच, निवेशक उस समाचार को देखना भूल जाते हैं जो एक लेटेस्ट प्रोडक्ट लॉन्च के बारे में बताती है जिसे उपभोक्ताओं से बहुत प्यार मिल रहा है और इससे कंपनी का प्रदर्शन बहुत अच्छा होने की संभावना है। इसलिए अगर निवेशकों ने स्टॉक को वापिस खरीद लिया होता, तो वह कंपनी को अभी तक मिलने वाली सबसे ज्यादा ऊंचाई और लाभ के हिस्सेदार बनते, जो कंपनी को अपने नए लाभकारी प्रोडक्ट लांच की वजह से मिलने वाला है।  

यह ह्युरिस्टिक्स (अनुभव पर आधारित) निर्णय लेने का एक उदाहरण है जिसपर सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह के कारण पहुंचा गया था। सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह में एंकरिंग और समायोजन पूर्वाग्रह, मानसिक लेखांकन पूर्वाग्रह, फ्रेमिंग पूर्वाग्रह, उपलब्धता पूर्वाग्रह, स्व-सक्रियता पूर्वाग्रह, परिणाम पूर्वाग्रह, और नवीनता पूर्वाग्रह जैसे कई अनुमान शामिल हैं। आइए उनकी आगे चर्चा करें-

एंकरिंग और समायोजन पूर्वाग्रह - इस मामले में, निवेशक "एंकर्स" या पहले से प्राप्त जानकारी पर टिक जाते हैं और फिर प्राप्त होने वाली किसी भी नई जानकारी को पुरानी जानकारी के हिसाब से समायोजित करते हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि जानकारी किस चीज़ पर केंद्रित है, या जानकारी से क्या चीज़ बताई जा रही है, पर पहले की जानकारी हमेशा नई जानकारी पर भारी पड़ती है। 

मानसिक लेखांकन पूर्वाग्रह - मानसिक लेखांकन पूर्वाग्रह दिए गए धन को उसके पहले से नियोजित उपयोग में बांटने पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए- स्कूल की फीस का पैसा, ट्यूशन का पैसा आदि।

फ्रेमिंग बायस - फ्रेमिंग पूर्वाग्रह में निवेशक की किसी वस्तु को खरीदने में रूचि उसे किस तरह से संपर्क किया गया है, इस पर पूरी तरह निर्भर करती है। अगर हम इसके शाब्दिक अर्थ को समझने की कोशिश करते हैं, तो पता चलता है कि जिस तरह से सवाल पूछा जाता है, निवेशक अपने जवाब को उसी हिसाब से बदल सकता है, चाहे सभी तथ्य समान रहें। उदाहरण के लिए- अगर कोई लॉटरी टिकट खरीदने का सुझाव देता है क्योंकि इसमें बहुत सारे पैसे मिल सकते हैं, तो किसी को इसे खरीदने में दिलचस्पी हो सकती है। पर अगर हम खरीददार को यह बता दें कि उसकी लॉटरी खुलेगी इसके कितनी कम संभावना है, तो यह सुनकर वह व्यक्ति निराश हो जाएगा और हो सकता है की लॉटरी खरीदने से ही माना कर दे।

उपलब्धता पूर्वाग्रह - इसका मतलब है कि लोग अपने उन निर्णयों का समर्थन करते हैं जो सुलभ होते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपनाया गया दृष्टिकोण कितनी आसानी से निर्णय लेने में मदद कर सकता है। 

निष्कर्ष

सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह को समझने के लिए परत दर परत संज्ञानात्मक और भावनात्मक त्रुटियों का अध्ययन करना पड़ता है। लेकिन अब जब हमने सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह के आधार को समझ लिया है, तो अगले अध्याय पर आगे बढ़ते हैं जो है भेड़चाल।

अब तक आपने पढ़ा

  • सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह का अर्थ है कि सूचना को उसके सही अर्थों में समझने की असमर्थता और सूचना को तर्कहीन और एकदम से बिना कुछ विचार किए समझना व सही मान लेना।
  • सूचना प्रसंस्करण पूर्वाग्रह, पुष्टि पूर्वाग्रह और विश्वास दृढ़ता पूर्वाग्रह के बीच पूर्वाग्रह को बांटने से पहले संज्ञानात्मक त्रुटि और भावनात्मक त्रुटि के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
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