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जानिए फंडामेंटल एनालिसिस कैसे आपके वित्त को बेहतर बनाने में आपकी मदद कर सकता है

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अब तक आपने देखा कि किसी कंपनी के फाइनेंशल्स और जनता के लिए उपलब्ध होने वाली रिपोर्टों को कैसे पढ़ें। पर उसके बाद क्या? एक बार जब आपने फाइनेंशल्स पढ़ लिए तो उनका आप क्या करोगे? आखिर उस सारी जानकारी को इकट्ठा किस उद्देश्य से कर रहे हैं?  इन सभी सवालों के जवाब आपको एडवांस फंडामेंटल एनालिसिस के बारे में जानते हुए मिलेंगे। हम इस अध्याय में इन्हीं के बारे में पढ़़ेंगे।

याद है कैसे, इस मॉड्यूल की शुरुआत में, हमने देखा कि किसी खिलाड़ी को क्रिकेट टीम के लिए चुनने और फंडामेंटल एनालिसिस करने में कितनी समानताएँ हैं? आइए एक बार फिर से उस उदाहरण की मदद से समझें कि फंडामेंटल एनालिसिस की तकनीकों को लागू करने के बाद क्या होता है।

कोई खिलाड़ी आपकी टीम का कप्तान बनने लायक है या नहीं, ये पता लगाने में पहला कदम है, उस खिलाड़ी के प्रदर्शन और ट्रैक रिकॉर्ड को देखना। एक बार जब आप  इस तकनीक से यह पहचान लेते हैं कि वह एक अच्छा खिलाड़ी है, तो फिर आप उसके व्यक्तिगत आँकड़ों को देखते हैं कि वह आपकी ज़रूरतों और उम्मीदों को पूरा कर सकता है या नहीं।

मानिए कि आपने यह पूरा विश्लेषण कर लिया है और आपको लगता है कि वरुण, जिसे 5 साल का अच्छा अनुभव है, वह कैप्टन बनने के लिए बिल्कुल परफेक्ट है। तो अब आपको पता लग गया है कि आप वरुण को कैप्टन बनाना चाहते है। लेकिन अब मुद्दे की बात यह है कि जब प्लेयर्स की नीलामी की बात आती है, तो आप वरुण को किस कीमत पर अपनी टीम का हिस्सा बनाने के लिए तैयार हैं?

  • वह आपकी टीम के लिए कप्तान का सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन वह इस पद के लिए कितना मूल्यवान है?
  • क्या आपको उसके लिए ₹10 करोड़ देने चाहिए?
  • या शायद, ₹100 करोड़?
  • अगर आपका कुल बजट लगभग ₹20 करोड़ है तो क्या होगा? और अगर आप अपनी टीम में वरुण को लेते हैं, तो क्या इसका मतलब यह हुआ है कि आप अपनी टीम के लिए किसी और अच्छे खिलाड़ी को नहीं खरीद सकते?
  • उस स्थिति में,  आप अपनी टीम में एक बढ़िया कप्तान, कुछ अच्छे बल्लेबाज़ों तो रख लेंगे, लेकिन इसी के साथ आपको अपनी टीम में औसत से कम प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज़ों को रखना पड़ेगा।
  • दूसरे शब्दों में, क्या यह प्लेयर उस कीमत के लायक है जो कीमत आप उसे टीम में रखने के लिए चुका रहे हैं?

जब आप ये सभी सवाल, कंपनी के शेयरों में निवेश करने के संबंध में उठाते हैं तो इसे ही एडवांस फंडामेंटल एनालिसिस कहते हैं। इससे पहले कि आप किसी कंपनी में निवेश करें, आपको यह पता लगाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी कि कंपनी के शेयर आपके इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में कैसे फिट बैठते हैं।

एडवांस फंडामेंटल एनालिसिस: एक नज़र में

फंडामेंटल एनालिसिस एक काफी बड़ा कोनसेप्ट है। यह सिर्फ किसी कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स की व्याख्या और विश्लेषण तक ही सीमित नहीं है। किसी शेयर की गुणवत्ता का आकलन करना तो सिर्फ पहला कदम है। आपको यह पता लगाना ज़रूरी है कि स्टॉक का मूल्य क्या है, और यह आपके पोर्टफोलियो में कैसे फिट बैठता है।

वास्तव में, एडवांस फंडामेंटल एनालिसिस का लक्ष्य किसी कंपनी के शेयरों के आंतरिक मूल्य का पता लगाना है। आंतरिक मूल्य का पता लगाकर, आप एक कंपनी के शेयर्स के वास्तविक मूल्य का निर्धारण कर सकते हैं और यह पता लगा सकते है कि कंपनी का स्टॉक ओवरवैल्यूड है या अंडरवैल्यूड।

कंपनी या इक्विटी रिसर्च करने के 3 मुख्य चरण हैं:

  • कंपनी के व्यापार, उसकी वित्तीय जानकारी और उसके संचालन को समझना
  • निवेशक चेकलिस्ट को अपनाना
  • मूल्यांकन

आइए देखें कि 30 वर्षीय निवेशक प्रवीण, जो एक कंपनी के शेयरों में निवेश करना चाहता है, वह इन चरणों से कैसे गुज़रता है।

1.  कंपनी के व्यापार, उसकी वित्तीय जानकारी और उसके कामकाज को समझना

सबसे पहले प्रवीण कुछ समय कंपनी की फाइनेंशियल स्टेटमेंट और वार्षिक रिपोर्ट पर रिसर्च करता है। फिर वह अपनी रिसर्च के बाद विश्लेषकों और विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई अन्य रिपोर्टों से कंपनी के बारे में  और जानने का प्रयास करता है। इसके बाद, प्रवीण इस फैसले पर आता है की वह जिस कंपनी में निवेश करने की सोच रहा है, वह एक मूलभूत रूप से मजबूत इकाई है, जिसमें निवेश करना एक अच्छा विकल्प है।

इसके बाद, उसे यह देखने की ज़रूरत है कि क्या कंपनी के शेयर उसके पोर्टफोलियो में फिट होते हैं और उसके निवेशक प्रोफाइल से मेल खाते हैं? यहीं पर उसकी व्यक्तिगत निवेशक-चेकलिस्ट काम आती है।

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2. निवेशक चेकलिस्ट अपनाना

प्रवीण ने एक फॉर्म के रूप में अपनी चेकलिस्ट बनाकर सभी अपेक्षाओं को लिख दिया है और वह यह जाँचने की कोशिश कर रहा है कि जो कंपनी उसने चुनी है वह उसके लिए सही है या नहीं। चलिए, उसकी उम्मीदों और उससे जुड़े तर्कों पर एक नज़र डालते है।

 

प्रवीण की उम्मीदें

उसका तर्क 

1

PAT मार्जिन: 15% से अधिक

अधिक से अधिक मुनाफा, यानी  शेयरधारकों के लिए अधिक रिटर्न

2

संचालन राजस्व: वर्ष-दर-वर्ष बढ़ना चाहिए

संचालन राजस्व में वृद्धि दर्शाती है कि कंपनी बढ़ रही है।

3

प्रति शेयर आय: वर्ष-दर-वर्ष बढ़नी चाहिए

EPS में वृद्धि का सीधा फायदा शेयरधारकों को मिलता है

4

नियोजित पूँजी पर रिटर्न: 40% से अधिक

एक उच्च ROCE संकेत करता है कि एक कंपनी अपनी पूँजी का उपयोग करने में कुशल है। 

5

इक्विटी टू डेट रेशियो: 1 से कम

इक्विटी टू डेट रेशियो का मतलब है कि कंपनी ऋण पर बहुत अधिक निर्भर नहीं है। 

6

औसत वसूली अवधि: 15 दिनों से अधिक नहीं

एक कम औसत वसूली अवधि दर्शाती है कि कंपनी अपने देनदारों से अक्सर लंबित भुगतान वसूल करती है। 

7

ऑपरेटिंग कैश फ्लो रेशियो: 1 से अधिक

एक उच्च ऑपरेटिंग कैश फ्लो रेशियो का मतलब है कि कंपनी अपने सभी वर्तमान ऋण दायित्वों का भुगतान करने के लिए पर्याप्त नक़दी उत्पन्न करती है। 

3. मूल्यांकन

यह पुष्टि करने पर कि कंपनी, उनकी उम्मीदों की चेकलिस्ट को सफलतापूर्वक पूरा करती है, प्रवीण कंपनी के मौजूदा बाजार मूल्य पर एक नज़र डालते हैं। यह वर्तमान में शेयर बाजार में ₹325 पर कारोबार कर रही है।

क्रिकेट टीम के लिए सही कप्तान चुनने की तरह ही, प्रवीण यहाँ कैसे निश्चित करेगा कि ₹325 शेयर के लिए सही कीमत है? और वह यह कैसे निश्चित करेगा कि उस कंपनी के शेयर लेने लायक भी है या नहीं?  

बस यहीं पर शेयरों का मूल्यांकन काम आता है।

निष्कर्ष

मूल्यांकन आपको कंपनी के वास्तविक आंतरिक मूल्य की पहचान करने में मदद करता है। फिर आप इस जानकारी का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए कर सकते हैं कि जिन कंपनी के शेयरों का मूल्यांकन हुआ है वह ओवरवैल्यूड है या अंडरवैल्यूड। स्मार्ट मनी के अगले मॉड्यूल में, हम मूल्यांकन के कॉन्सेप्ट और किसी कंपनी के शेयरों के मूल्य निर्धारण के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न तरीकों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

अब तक आपने पढ़ा 

  • फंडामेंटल एनालिसिस काफी बड़ी कॉन्सेप्ट है। यह किसी कंपनी के फाइनेंशियल स्टेटमेंट की व्याख्या और विश्लेषण पर खत्म नहीं होता है।
  • किसी शेयर की गुणवत्ता का आकलन करना केवल पहला कदम है। आपको यह देखने की ज़रूरत होती है कि स्टॉक कितना मूल्यवान है, और यह आपके पोर्टफोलियो में कैसे फिट बैठता है।
  • एडवांस फंडामेंटल एनालिसिस का लक्ष्य किसी कंपनी के आंतरिक मूल्य का पता लगाना है।
  • आंतरिक मूल्य का पता लगाकर, आप एक कंपनी के वास्तविक मूल्य का निर्धारण कर सकते हैं और मूल्यांकन कर सकते हैं कि कंपनी का स्टॉक ओवरवैल्यूड या अंडरवैल्यूड है।
  • कंपनी या इक्विटी एनालिसिस के 3 मुख्य चरण होते हैं: कंपनी के व्यवसाय, उसके फाइनेंस और उसके कामकाज को समझना, निवेशक चेकलिस्ट को अपनाना और मूल्यांकन
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अपने ज्ञान का परीक्षण करें

इस अध्याय के लिए प्रश्नोत्तरी लें और इसे पूरा चिह्नित करें।

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