8. मानसून भारतीय बाजारों को कैसे प्रभावित करता है?

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यह समझना बहुत जरूरी है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत कृषि है। कृषि का प्रदर्शन निश्चित रूप से यह निर्धारित करने में मायने रखता है कि शेयर बाजार कितना स्वस्थ होगा। इस कारण यदि मॉनसून उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है तो यह निश्चित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव डालता है।

भारतीय कंपनियां देश के ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी कमाई का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्राप्त करती हैं। जबकि कुछ कंपनियां सीधे कृषि बाजार में काम कर रही हैं जैसे बीज, कृषि-रसायन, उर्वरक आदि। एफएमसीजी और ऑटो स्पेस जैसे क्षेत्रों में काम कर रही कुछ अन्य कंपनियां अप्रत्यक्ष रूप से एक मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था से लाभ कमाती हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की स्थिति से प्रभावित होने वाले अन्य क्षेत्र जैसे बैंकिंग, एनबीएफसी और माइक्रोफाइनेंस संस्थान हैं। एक स्वस्थ ग्रामीण अर्थव्यवस्था न केवल क्रेडिट के विस्तार में मदद करती है बल्कि यह स्थिरता और पुनर्भुगतान की विश्वसनीयता में भी सुधार करती है। दूसरी ओर, सूखा या अधिक बारिश से एनपीए होता है, क्योंकि किसान आय के नुकसान के कारण ऋण नहीं चुका पाते हैं।

इस तरह की घटना के बाद कभी-कभी सरकार ऋण माफी की घोषणा करती है। इससे न केवल बैंकों को नुकसान का सामना करना पड़ता है बल्कि यह उधारकर्ताओं के क्रेडिट अनुशासन में भी बाधा डालता है।

मॉनसून का खपत पर असर

एक अच्छा/सामान्य मॉनसून विदेशी संस्थागत निवेशकों सहित अन्य निवेशकों के बीच अर्थव्यवस्था के बारे में सकारात्मक धारणा बनाता है। यह ग्रामीण आय को बढ़ाने में मदद करता है जिससे अर्थव्यवस्था को संचालित करने वाली घरेलू खपत मजबूत होती है। दूसरी तरफ  खराब/कम मॉनसून से बुवाई में देरी होती है और फसलों की कम पैदावार होती है, जैसे कि खरीफ की फसलें, जिन सभी में पानी की अधिक मात्रा की जरूरत होती है, जो खाद्य की महंगाई को तेज कर सकती हैं। खराब/अधिक वर्षा से फसल की हानि होती है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को कम आय मिलती है, और ग्रामीण मांग और बिक्री कम होती है जिसके कारण अर्थव्यवस्था के लिए समस्या उत्पन्न होती है।

क्षेत्रों पर मॉनसून का असर

एक अच्छा/सामान्य मॉनसून या खराब/कम मॉनसून का शेयर बाजार में कुछ क्षेत्रों पर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है, जिसमें कुछ क्षेत्र सीधे कृषि बाजार में काम कर रहे हैं जैसे बीज, कृषि-रसायन, और उर्वरक जबकि कुछ अप्रत्यक्ष रूप से मॉनसून से लाभान्वित होते हैं जैसे एफएमसीजी और ऑटो स्पेस। माइक्रोफाइनेंस कंपनियां कम/अधिक बारिश से प्रभावित होती हैं, क्योंकि किसान आमदनी में हानि के कारण ऋण नहीं चुका पाते और इससे एनपीए होता है। इस तरह की घटनाओं के बाद कभी-कभी सरकार द्वारा ऋण माफी की घोषणा की जाती है जो उधारकर्ताओं के ऋण अनुशासन को संभावित रूप से खराब करता है।

अर्थव्यवस्था/बाजारों पर मॉनसून का प्रभाव

- मॉनसून की बारिश कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत की $ 2.5 टन अर्थव्यवस्था का लगभग 15% हिस्सा है, और यह देश के 130 करोड़ लोगों में से आधे से अधिक लोगों को रोजगार देता है।

- खराब मॉनसून रोपण में देरी करता है और चावल, मक्का, गन्ना और तिलहन (जिसे खरीफ फसलों के रूप में भी जाना जाता है) जैसी फसलों की कम पैदावार होती है। यह खाद्य महंगाई में तेजी ला सकता है,  जो ब्याज दरों को कम करने के लिए केंद्रीय बैंक का मुख्य फोकस होता है। 

- ग्राउंडवॉटर स्तर खतरनाक रूप से गिरना जारी रहेगा, और सूखा तब तक बना रहेगा जब तक कि कृषि क्षेत्र, जो पानी की 80% खपत के लिए जिम्मेदार है, पानी का उपयोग अधिक कुशलता से ना करने लगे। जलाशयों पीने का पानी, फसलों के लिए सिंचाई के लिए अहम हैं  और उद्योगों में उपयोग होने वाला बिजली और पानी की भरपाई भी मॉनसून द्वारा ही होती है।

- विदेशी बाजारों में भी इसका असर पड़ता है, क्योंकि कमोडिटी बाजार में भारतीय चीनी और चावल की कमी होने लगती है। भारत का कृषि मौसम जुलाई से जून तक चलता है। खरीफ फसल का मौसम जुलाई से अक्टूबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान होता है, और रबी फसल का मौसम अक्टूबर से मार्च (सर्दियों) तक होता है। मार्च और जून के बीच उगाई जाने वाली फसलें गर्मियों की फसलें हैं।

खराब मॉनसून का असर

एक असामान्य मॉनसून का प्रभाव भयानक हो सकता है और इसका नुकसान लाखों में हो सकता है। असामान्य मॉनसून के परिणामस्वरूप मौसमी रोजगार, भोजन की कमी और आय में कमी हो सकती है। अगर भारत में कृषि उत्पादन कम हो जाता है तो इसका सीधा असर लोगों की आय में गिरावट के तौर पर होगा। अर्थव्यवस्था और जीडीपी भी इससे प्रभावित होगी। यह कारक खाद्य पदार्थों के उत्पादन को कम कर सकता है जिससे आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

निष्कर्ष

इसलिए यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि मॉनसून का अर्थव्यवस्था में प्रचलित महंगाई दर पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसका असर सार्वजनिक निवेश दर, सरकारी बचत, राष्ट्र के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी पड़ने लगता है। जब अर्थव्यवस्था में मॉनसून की इतनी अधिक हिस्सेदारी है, तो यह स्पष्ट है कि शेयर बाजार का प्रदर्शन मॉनसून से प्रभावित होगा।

अब तक आपने पढ़ा

- कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की मुख्य ताकत है। कृषि का प्रदर्शन निश्चित रूप से यह निर्धारित करने में मायने रखता है कि शेयर बाजार कितना स्वस्थ होगा।

- यदि मॉनसून उम्मीदों से कम होता है तो यह निश्चित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करता है।

- कम/अधिक वर्षा से फसल की हानि होती है जिसके परिणामस्वरूप किसानों को कम आमदनी होती है, और ग्रामीण मांग और बिक्री कम होती है।

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