11. शब्दावली

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  1. भौतिक वितरण: किसी विशेष कॉन्ट्रैक्ट में अंतर्निहित सिक्योरिटी के भौतिक वितरण के मामले में, कॉन्ट्रैक्ट का विक्रेता खरीदार को सिक्योरिटी की वह मात्रा उपलब्ध कराता है, जिसके लिए कीमत चुकाई जाता है।
  2. नकद निपटान: इसका मतलब है कि मुद्रा के माध्यम से स्पॉट मूल्य और डेरिवेटिव मूल्य के बीच अंतर का निपटान, न कि अंतर्निहित सिक्योरिटी के माध्यम से। फिलहाल, भारत में इक्विटी डेरिवेटिव का निपटान नकदी द्वारा किया जाते हैं।
  3. सामान्य सत्र: यह भारतीय शेयर बाजार का प्राथमिक समय है जो सुबह 9.15 बजे से 3.30 बजे तक चलता है। इस समय के दौरान किया गया कोई भी लेनदेन एक द्विपक्षीय ऑर्डर मिलान प्रणाली का अनुसरण करता है, जिसमें मांग और आपूर्ति बलों के माध्यम से मूल्य निर्धारण किया जाता है।
  4. मुहूर्त ट्रेडिंग: यह दीवाली पर एक घंटे के लिए होने वाली शुभ स्टॉक मार्केट ट्रेडिंग है। यह एक प्रतीकात्मक और पुरानी परंपरा है जिसे व्यापारिक समुदाय द्वारा लम्बे समय से जारी रखा गया है।
  5. कम रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो: जब मार्जिन अधिक होता है, तो व्यापारी अधिक जोखिम और कम रिवॉर्ड की उम्मीद करते हैं।
  6. अर्निंग्स सीजन: यह वह अवधि है जिसके दौरान बड़ी संख्या में सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनियां अपनी तिमाही अर्निंग्स रिपोर्ट जारी करती हैं। सामान्य तौर पर, प्रत्येक तिमाही के अंतिम महीने के एक या दो सप्ताह बाद अर्निंग्स सीजन शुरू होता है।
  7. मौसमी स्टॉक निवेश: यह किसी विशेष स्टॉक को खरीदने / बेचने के लिए मूल्यांकन के लिए स्टॉक की कीमतों में दोहराने वाले पैटर्न को समझने के बारे में है।
  8. लाइन चार्ट: ये साधारण वित्तीय चार्ट हैं जो सामान्य मूल्य गतिविधि को दिखाने के लिए क्लोजिंग कीमतों के बीच बनाए जाते हैं।
  9. बार चार्ट: बार ट्रेडिंग चार्ट पैटर्न को OCHL चार्ट भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है ओपनिंग, क्लोजिंग, हाई और लो। लाइन चार्ट के विपरीत, यह अधिक विस्तृत हैं, जो व्यापारियों और निवेशकों को एसेट मूल्य गतिविधि के बारे में अधिक जानकारी देते हैं।
  10. कैंडलस्टिक चार्ट: कैंडलस्टिक चार्ट लोकप्रिय ट्रेडिंग चार्ट हैं जो बार चार्ट की तरह दिखते हैं, लेकिन स्पष्ट रूप से दिन के उतार-चढ़ाव को दिखाते हैं। हर बेलनाकार बॉडी दिन के ओपनिंग और क्लोजिंग कीमत को अंकित करता है, जबकि ऊपरी और निचली शैडो एसेट के उस दिन का उच्च और निम्न पॉइंट को दिखाती है।
  11. हेड एंड शोल्डर फॉर्मेशन: यह एक खास फॉर्मेशन है जो बीच में एक बड़ी चोटी और इसके दोनों तरफ दो छोटी चोटियों को जोड़ता है। व्यापारी तेजी-से-मंदी के ट्रेंड रिवर्सल का अनुमान लगाने के लिए पैटर्न को देखते हैं।
  12. डबल टॉप और बॉटम पैटर्न: ये शेप ट्रेंड रिवर्सल से पहले दिखाई देते हैं। इन चरणों के दौरान, एसेट की कीमत ट्रेंड लाइन के दूसरी तरफ पार करने से पहले दो बार बढ़ती या गिरती है।
  13. वेजेस: ये एक चार्ट पैटर्न हैं जहां दो ढलान वाली ट्रेंड लाइन अंत में मिल जाती हैं। यह पैटर्न या तो बढ़ने वाला हो सकता है या घटने वाला।
  14. सिमिट्रिकल टाइएंगल: यह एक ट्रेंड पैटर्न की निरंतरता है। यह तब दिखता है जब बाजार लगातार उतार-चढ़ाव से गुजरता है, जिससे चोटियों और गर्तों की एक सीरीज बनाती है जो एक पॉइंट पर जाकर मिल जाती है।

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