11. 20 अहम परिभाषाएं

1. निवेश

निवेश एक आर्थिक संपत्ति है, जिसे यह सोचकर ख़रीदा जाता है कि यह संपत्ति भविष्य में आय प्रदान करेगी या  बाद में इसे लाभ के लिए इसे ऊंची कीमत पर बेचा जा सकता है। इसका मतलब है कि यह लंबी अवधि में धन कमाने का एक अच्छा साधन है। निवेश के कुछ उदाहरण जैसे फिक्स्ड डिपोजिट, रियल एस्टेट और म्यूचुअल फंड आदि हैं।

2. पोर्टफोलियो विविधीकरण

पोर्टफोलियो विविधीकरण एक निवेश रणनीति है, जो रिस्क मैनेजमेंट में मदद करती है। अपने पोर्टफोलियो में विविधिकरण के लिए आपको अपनी पूँजी को अलग-अलग तरह के निवेशों में बाँटना होता है। पोर्टफोलियों में कई तरह के एसेट होने की वजह से इससे लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना अधिक रहती है। यह हर निवेश से जुड़े रिस्क को कम करता है।

3. वित्तीय बाज़ार

वित्तीय बाज़ार वह वर्चुअल या वास्तविक जगह है जहां फाइनेंशियल एसेट्स की खरीद-बिक्री होती है। इस बाज़ार में शेयर, डेरिवेरिव्स और बॉन्ड जैसे एसेट्स का कारोबार होता है।

4. डेट मार्केट

डेट बाज़ार में डेट इंस्ट्रूमेंट्स जैसे बॉन्ड और डिबेंचर्स की खरीद-बिक्री की जाती है। ये इंस्ट्रूमेंट्स कंपनियों और सरकारी संस्थानों द्वारा जारी किए जाते हैं।

5. इक्विटी बाज़ार

इक्विटी बाज़ार में पब्लिक लिमिटेड कंपनियों के शेयर्स का कोराबार किया जाता है। यहां आप इंट्राडे ट्रांजैक्शंस, डिलीवरी ट्रेड, इनिशियल पब्लिक ऑफर्स (आईपीओ) और  फॉलो ऑन पब्लिक ऑफर्स जैसी कई तरह की ट्रेडिंग कर सकते हैं। 

6. मुद्रा बाज़ार

वह बाज़ार जहां ट्रेजरी बिल, कमर्शियल पेपर और डिपोजिट के सर्टिफ़िकेट जैसी मुद्रा संबंधी एसेट की खरीद-बिक्री की जा सकती है। इन एसेट में निवेश की सीमा एक साल से अधिक नहीं होती है।

7. पूँजी बाज़ार (कैपिटल मार्केट)

पूँजी बाज़ार में मध्यम और लंबी अवधि  के निवेश समय वाले एसेट्स का कारोबार होता है। इसमें निवेशक इक्विटी शेयर कैपिटल और प्रेफरेंस शेयर कैपिटल जैसे एसेट खरीद सकते हैं और इसे लंबे समय तक अपने पास रख सकते हैं। पूँजी बाज़ार प्राइमरी मार्केट और सेकेंड्री मार्केट में विभाजित होते है।

8. नकद बाज़ार (कैश मार्केट)

नकद बाज़ार में लेन- देन वास्तविक समय के आधार पर निर्धारित होते हैं। यहां फाइनेंशियल एसेट नकद और तत्काल डिलीवरी के लिए बेचे जाते हैं। 

9. वायदा बाज़ार 

वायदा बाज़ार में आप लेन-देन करते समय पैसे का भुगतान कर सकते हैं लेकिन एसेट की डिलीवरी आगे की तारीख पर होती है।

10. एक्सचेंज ट्रेडेड मार्केट

एक्सचेंज ट्रेडेड मार्केट एक केंद्रीकृत बाज़ार है। इसका संचालन मुख्य रूप से मानकीकृत प्रक्रियाओं पर होता है। इस बाज़ार में लेन-देन एक्सचेंज के माध्यम से होता है।

11. ओवर द काउंटर मार्केट

यह एक विकेंद्रीकृत बाज़ार है जहां खरीदार और विक्रेता अपनी ज़रूरतों के अनुसार एक दूसरे के साथ संपर्क कर सकते हैं। जिसके बाद वे कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट का व्यापार करते हैं। यहाँ किसी की मध्यस्थता नहीं होती और लेन-देन इलेक्ट्रॉनिक रूप से काउंटर पर ही होता है।

12. स्टॉक एक्सचेंज

यह एक वित्तीय मध्यस्थ  है जो खरीदारों और विक्रेता को एक साथ जोड़ते हैं। यह उस एक्सचेंज पर सूचीबद्ध शेयरों के व्यापार की सुविधा मुहैया कराता है। भारत में दो मुख्य एक्सचेंज हैं बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज। इसके अलावा वर्तमान में दूसरे छोटे स्तर पर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज व मेट्रोपोलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया भी मौजूद है। 

13. डिपॉजिटरी

यह एक ऐसी इकाई है जो आपको एक डीमैट खाते  में डीमटीर्यलाइज़्ड (डिजिटल) शेयर सर्टिफ़िकेट जमा करने की सुविधा देता है। वर्तमान में भारत में दो डिपॉजिटरी हैं। उनके नाम नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (एनएसडीएल) और सेंट्रल डिपॉजिटरी लिमिटेड (सीडीएसएल) है। 

14. डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट

डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट एक पंजीकृत एजेंट होता है। यह आपके और डिपॉजिटरी के बीच मध्यस्थता का काम करता है। एक निवेशक के रूप में आप सीधे डिपॉजिटरी के साथ डीमैट खाता नहीं खोल सकते। आपको अपने तमाम लेन-देन के लिए सिर्फ डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट के माध्यम से ही आगे बढ़ना होगा।

15. स्टॉकब्रोकर

स्टॉकब्रोकर यानी वित्तीय मध्यस्थ, जो शेयर बाज़ारों में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। ये संस्थाएं स्टॉक एक्सचेंजों में ट्रेडिंग मेंबर के रूप में पंजीकृत होते हैं। स्टॉकब्रोकर स्टॉक एक्सचेंजों और निवेशकों के बीच एक कड़ी का काम करते हैं। इसलिए शेयर बाज़ार में शेयरों को खरीदने और बेचने के लिए आपको स्टॉकब्रोकर के साथ एक ट्रेडिंग खाता खोलने की ज़रूरत पड़ती है।

16. संस्थागत निवेशक/ इंस्टिट्यूशनल इनवेस्टर

यह कारपोरेट इकाइयां हैं जो शेयर बाज़ार में निवेश करती है। राष्ट्रीयता के आधार पर इसे दो श्रेणियों में बाँटा गया है:

  • विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई)
  • घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई)

17. खुदरा निवेशक/ रीटेल इनवेस्टर

यह व्यक्तिगत, गैर पेशेवर बाज़ार प्रतिभागी है जो आमतौर पर बड़े संस्थागत निवेशकों की तुलना में छोटी मात्रा में निवेश करते हैं। यह अपने आवासीय स्थिति के आधार पर तीन श्रेणियों में बाँटे गए हैं:

  • निवासी भारतीय खुदरा निवेशक
  • अनिवासी भारतीय (एनआरआई) खुदरा निवेशक
  • ओवरसीज़ सिटीज़न ऑफ इंडिया (ओसीआई) खुदरा निवेशक

18. हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स (एचएनआई)

ऐसे व्यक्ति जिनके पास 2 करोड़ रुपए से अधिक की निवेश पूँजी है और वे शेयर बाज़ार में निवेश और ट्रेडिंग गतिविधियों में भाग लेते हैं। उन्हें हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स के रूप में जाना जाता है।

19. शेयर बाज़ार सूचकांक

यह एक ऐसा संकेतक है जो बाज़ार के पूरे या एक निश्चित क्षेत्र के प्रदर्शन को दर्शाते हैं। स्टॉक मार्केट इंडेक्स ऐसी कंपनियों का समूह है जिनके शेयरों का एक एक्सचेंज पर कारोबार होता है। हर सूचकांक अपनी कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन को मापता है।

20. क्लियरेंस और सेटलमेंट

क्लियरिंग ट्रेड करने वालों के खातों को अपडेट करने और पैसे और सिक्योरिटीज़ के ट्रांसफर की व्यवस्था करने की प्रक्रिया है। जबकि सेटलमेंट व्यापार में शामिल लोगों के बीच पैसे और स्कियोरिटीज के वास्तविक ट्रंसफर की प्रक्रिया है।

टिप्पणियाँ (5)

Priyanka Patil

09 Feb 2021, 01:43 AM

Superb,very informative..

Pushvinder Joshi

24 Jan 2021, 02:07 PM

Super se bhi upper

Pushvinder Joshi

24 Jan 2021, 02:07 PM

Very helpful

Daksh shamji

26 Dec 2020, 07:53 PM

very easy to understand

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