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विकल्प और वायदा का परिचय

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ऑप्शंस और फ्यूचर्स से जुड़े 20 अहम शब्द

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1. मूलभूत संपत्ति/ अंडरलाइंग एसेट

वह संपत्ति जिस पर डेरिवेटिव का मूल्य आधारित है, उसे मूलभूत संपत्ति या अंडरलाइंग एसेट के रूप में जाना जाता है। यह शेयर और इंडेक्स से लेकर मुद्राओं और कमोडिटी तक कुछ भी हो सकती है।

2. स्पॉट प्राइस

स्पॉट प्राइस वह मूल्य है जिस पर स्पॉट (कैश) मार्केट में एसेट का कारोबार किया जाता है।

3. कॉल ऑप्शन

एक ऐसा ऑप्शन जो हमें पूर्वनिर्धारित मूल्य और पूवर्निधारित समय पर एसेट खरीदने का अधिकार देता है, वह कॉल ऑप्शन के रूप में जाना जाता है।

4. पुट ऑप्शन

एक ऐसा ऑप्शन जो हमें पूर्वनिर्धारित कीमत और पूर्वनिर्धारित समय पर एसेट बेचने का अधिकार देता है, वह पुट ऑप्शन के रूप में जाना जाता है।

5. बिड प्राइस/ बोली

वो उच्चतम मूल्य जिसका भुगतान करने को खरीदार तैयार है वह बोली या बिड प्राइस के रूप में जानी जाती है।

6. आस्क प्राइस

सबसे कम कीमत जो एक कॉन्टैक्ट का विक्रेता स्वीकार करने के लिए तैयार है, उसे आस्क प्राइस के रूप में जाना जाता है।

7. स्ट्राइक प्राइस

स्ट्राइक प्राइस वह कीमत होती है जिस पर एक ऑप्शन का मालिक, पूर्वनिर्धारित कीमत और पूर्वनिर्धारित समय पर अंडरलाइंग एसेट को खरीद या बेच सकता है।

8. लॉट साइज़

एक लॉट साइज़, एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट में शामिल एसेट की न्यूनतम मात्रा है। उदाहरण के लिए, HDFC बैंक के  सिंगल फ्यूचर या ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का लॉट  साइज़ 550 शेयरों का है।

9. प्रीमियम

इसे हम ऑप्शन प्रीमियम के रूप में भी जानते है, यह वह मूल्य है जो एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का खरीदार ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के विक्रेता को देता है।

10. एक्सपायरी

इसे कॉन्ट्रैक्ट एक्सपायरी के रूप में भी जाना जाता है, यह वह तारीख है जिस पर एक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो जाता है। अगर आप एक्सपायरी के दिन से पहले अपनी पोज़ीशन स्क्वेयर ऑफ नहीं करते हैं, तो आपको अपने कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार, अंडरलाइंग एसेट को खरीदना या बेचना होगा।

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11. लॉन्ग

लॉन्ग शब्द का उपयोग फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट या ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की खरीद के लिए किया जाता है।

12. शॉर्ट

शॉर्ट शब्द का उपयोग फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट या ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की बिक्री के लिए किया जाता है।

13. आंतरिक मूल्य

आंतरिक मूल्य मूलभूत संपत्ति के स्पॉट प्राइस और उसके ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट के स्ट्राइक प्राइस के बीच का अंतर है। कॉल ऑप्शन के आंतरिक मूल्य की गणना स्पॉट प्राइस से स्ट्राइक प्राइस को घटाकर की जा सकती है, जबकि पुट ऑप्शन के आंतरिक मूल्य के लिए स्ट्राइक प्राइस से स्पॉट प्राइस को घटाया जाता है।  

14. इन-द-मनी ऑप्शन

अगर एक ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का आंतरिक मूल्य, चाहे कॉल ऑप्शन हो या पुट ऑप्शन, एक पॉज़िटिव संख्या है, तो उसे इन-मनी ऑप्शन कहा जाता है।

15. एट दी मनी ऑप्शन

एक ऑप्शन जिसका स्ट्राइक प्राइस मूलभूत संपत्ति के स्पॉट प्राइस के बराबर है, तो उसे एट दी मनी ऑप्शन के रूप में जाना जाता है। वैसे तो, स्पॉट प्राइस और स्ट्राइक प्राइस दोनों के बराबर होने की संभावना कम है, इसलिए, एक ऑप्शन जिसका स्ट्राइक प्राइस, स्पॉट प्राइस के सबसे करीब है, उसे भी एट दी मनी ऑप्शन के रूप में माना जाता है।

16. आउट-ऑफ-द-मनी ऑप्शन

अगर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का आंतरिक मूल्य, चाहे कॉल ऑप्शन हो या पुट ऑप्शन, शून्य हो तो उसे आउट-ऑफ-द-मनी ऑप्शन कहा जाता है।

17. ओपन इंटरेस्ट

ओपन इंटरेस्ट किसी वित्तीय एसेट के बाज़ार में चालू कॉन्ट्रैक्ट्स की कुल संख्या है।

18. मार्जिन

किसी फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट को खरीदने या बेचने के लिए आप किसी एक्सचेंज को जो डिपॉज़िट जमा करते हैं, उसे 'मार्जिन' के रूप में जाना जाता है। यह मार्जिन मनी पूरे कॉन्ट्रैक्ट मूल्य का केवल एक प्रतिशत है और अंडरलाइंग एसेट के कीमत के साथ बदल भी सकती है।

19. मार्जिन कॉल

जब शुरुआती मार्जिन मनी, आपके मार्क टु मार्केट (MTM) के घाटे को कवर करने के लिए पर्याप्त नहीं होती, तो स्टॉक एक्सचेंज डिफ़ॉल्ट के जोखिम को कम करने के लिए एक अतिरिक्त मार्जिन जमा करने की मांग करता है। अतिरिक्त मार्जिन जमा करने की इस मांग को ही ‘मार्जिन कॉल’ के रूप में जाना जाता है।

20. लेवरेज

लेवरेज, एक ज्यादा मूल्य वाले कॉन्ट्रैक्ट को उसके कुल मूल्य के एक छोटे से हिस्से का भुगतान कर उसे नियंत्रित करने की क्षमता को कहते हैं। उदाहरण के लिए, जब आप कम मार्जिन या प्रीमियम राशि को जमा करके ज्यादा मूल्य वाले एक फ्यूचर या ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट को खरीदते या बेचते हैं, तो उसे लेवरेज इस्तेमाल करना कहते हैं।

टिप्पणियाँ (1)

nirav radia

25 Mar 2021, 01:05 AM

This is really helpful to clear your fundamentals. Strong fundamentals creates strong base. Thanks to team for working on this topic so beautifully.

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