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कमोडिटी बाज़ार का परिचय

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हम सभी चावल, गेहूं, तेल व अनाज आदि जैसी चीज़ें खरीदने के लिए लगभग हर सप्ताह सुपरमार्केट तो जाते ही हैं। हम वहाँ और भी कई चीज़ें खरीदते हैं। ये जितनी भी चीज़ें हम खरीदतें हैं ये सब क्या हैं? अगर हम इन चीज़ों का मतलब डिक्शनरी में देखते है तो आप इनके के लिए अलग- अलग शब्द मिलेंगे जैसे: -

प्रोडक्ट 

वस्तुएं 

कमोडिटीज़ 

हमारे आस-पास का सुपरमार्केट भी एक तरह का कमोडिटी बाज़ार है। यह एक छोटे स्तर पर चल रहा कमोडिटी बाज़ार है, जहाँ पर आप अपने प्रोडक्टस को खुदरा विक्रेताओं से खरीदते हैं। लेकिन अब हम जिन कमोडिटी बाज़ारों के बारे में पढ़ेंगे वो कुछ इस तरह के ही हैं - बस अंतर यह है कि वे बहुत बड़े पैमाने पर काम करते हैं, और यहाँ, व्यापारी कमोडिटीज़ को सीधे निर्माता या अन्य व्यापारियों से एक्सचेंज द्वारा खरीद सकते हैं।

इन बाज़ारों को ओर अच्छे से जानने के लिए मूल बातों से शुरुआत करते हैं।

कमोडिटी बाज़ार क्या है?

कमोडिटी बाज़ार एक ऐसी जगह है जहाँ कुछ चुनिंदा वस्तुओं का कारोबार नियम और कायदों के साथ किया जाता है। एक कमोडिटी बाज़ार में, ट्रेडिंग का उद्देश्य इन दोनों में से कोई एक हो सकता है:

  • उपयोग करने के लिए कमोडिटी को खरीदना, या
  • कमोडिटी की कीमत में उतार- चढ़ाव से मुनाफ़ा कमाना 

कमोडिटीज़ के कारोबार को नियंत्रित करने के लिए बाज़ार में कई कमोडिटी एक्सचेंज मौजूद हैं। मुख्य रूप से, भारत में 6 राष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज हैं,

  • मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX)
  • नेशनल कमोडिटी और डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX)
  • इंडियन कमोडिटी एक्सचेंज (ICX)
  • नेशनल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (NMCE)
  • ACE डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (ACE)
  • यूनिवर्सल कमोडिटी एक्सचेंज (UCX)

2018 में, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने भी अपने एक्सचेंजों पर कमोडिटी के व्यापार के लिए एक सेगमेंट लॉन्च किया था ।

कमोडिटी बाज़ार में ट्रेड की जाने वाली कमोडिटी के प्रकार

चलिए, एक बार फिर से अपने लोकल सुपरमार्केट को देखते हैं। यहाँ हमें अलग-अलग तरह के सामान बिक्री के लिए मिल जाएंगे। यहाँ हमें कई मैन्यूफैक्चर किए गए प्रॉडक्ट मिलेंगे जैसे स्टेशनरी, बर्तन और कपड़े आदि, और हमें ऐसे सामान भी दिखाई देंगे जो उगाए जाते हैं - जैसे फल और सब्ज़ियाँ। इस तरह, कोमोडिटी मार्केट में कारोबार करने वाली वस्तुओं भी दो प्रकार की होती हैं: 

1. हार्ड कमोडिटी

2. सॉफ्ट कमोडिटी

हार्ड कमोडिटी

हार्ड कमोडिटी की लिस्ट में धातु और तेल भंडार जैसे प्राकृतिक संसाधन शामिल हैं जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं। सोना, चाँदी, लोहा, स्टील, एल्यूमीनियम, तांबा आदि हार्ड कमोडिटी के कुछ अन्य उदाहरण हैं। देश के निर्यात व्यापार में इन धातुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन संसाधनों की आवश्यकता और उपलब्धता पर वैश्विक स्तर पर नज़र रखी जा सकती है क्योंकि इन कमोडिटीज़ की मांग और आपूर्ति का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। 

सॉफ्ट कमोडिटी

सॉफ्ट कमोडिटी वो वस्तुएँ हैं जो उगाई और पोषित की जाती हैं। सॉफ्ट कमोडिटीज़ के कुछ उदाहरण हैं - कृषि उपज, मवेशी और अन्य पशुधन व अन्य कृषि संबंधित उत्पाद। हार्ड कमोडिटीज के विपरीत, इनकी कीमत की चाल को समझना आसान नहीं है क्योंकि ये कई स्थानीय और वैश्विक कारणों से प्रभावित होती हैं। उदाहरण के लिए, मौसम में बदलाव कि वजह से फसल बहुत अच्छी भी हो सकती है और खराब भी। और इन बातों का पहले से बिलकुल सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।

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कमोडिटी बाज़ार की विशेषताएं

मुद्रा बाज़ार की तरह ही कमोडिटी बाज़ार की भी कई अलग-अलग विशेषताएं हैं। बाज़ार को अच्छे तरीके से समझने के लिए इन्हें समझना ज़रूरी है।

1. कमॉडिटी बाज़ार में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज़

कमोडिटी बाज़ार एक ऐसी जगह है जहां कई प्रकार की वस्तुओं का कारोबार होता है। अब आप सॉफ्ट और हार्ड कोमोडिटी के बीच का अंतर समझ गए हैं पर जब आप इनको करीब से देखते हैं तो कई तरह के प्रोडक्टस देखने को मिलते हैं। उनमें से कुछ ये हैं:

  • कॉफ़ी
  • पशु
  • गेहूँ
  • चावल
  • दूध
  • चीनी
  • पेट्रोल
  • कोको
  • कपास
  • कच्चा तेल
  • एल्युमीनियम
  • तांबा
  • सोना
  • निकेल

2. कीमत निर्धारित करने के लिए नियमित उपयोग

जिस तरह शेयर बाज़ार हमें शेयर की कीमत व उससे जुड़ी कंपनी के बारे में जानकारी देता है, कमोडिटी बाज़ार भी लगातार वस्तुओं की मौजूदा कीमतों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। कीमतों की चाल की जानकारी होने से और भविष्य का अनुमान लगाने से, व्यावसायिक निर्णय लेना आसान हो जाता है, खासकर उन मेन्युफेक्चरिंग संस्थाओं के लिए जो इन वस्तुओं का उपयोग कच्चे माल के रूप में करती हैं। थोक व्यापारी भी इस जानकारी का उपयोग अपने रीटेल सामान की कीमतें तय करने के लिए कर सकते हैं।

3. रिस्क हेजिंग के लिए उपयोग -

युद्ध या मंदी जैसे कठिन समय में, शेयर और बॉन्ड जैसी पारंपरिक वित्तीय संपत्तियों में अक्सर गिरावट आती है और व्यापारियों को नुकसान पहुंचने की संभावना होती है। लेकिन ऐसे समय में, कमोडिटीज़ इस निवेश जोखिम के लिए हेजिंग करने में मदद कर सकती हैं। यही नहीं, कमोडिटीज ट्रेडिंग एक रणनीति भी है जो अक्सर मुश्किल समय में बढ़ती महंगाई के लिए भी हेजिंग के काम आती है।

4. विभिन्न प्रकार के कान्ट्रैक्ट्स का ट्रेड -

कमोडिटीज़ मार्केट में कैश कान्ट्रैक्ट शामिल होते हैं, जहाँ आप पूरी कीमत देकर वस्तुओं को खरीदते और बेचते हैं। यहाँ फ्यूचर्स और ऑप्शंस कान्ट्रैक्ट भी मौजूद होते हैं जिन्हें कुल कीमत का छोटा प्रतिशत देकर भी ख़रीदा और बेचा जा सकता है, जिसके बारे में हम मॉड्यूल के पहले के अध्याय में पढ़ चुके हैं। इतने सारे कॉन्ट्रैक्ट्स विकल्पों के चलते, ऐसी कई ट्रेडिंग रणनीतियाँ हैं जिनका इस्तेमाल कमोडिटी बाज़ार में किया जा सकता है।

5. रोचक डेरिवेटिव सेगमेंट

कमोडिटी बाज़ार का डेरिवेटिव सेगमेंट, जिसमें फ्यूचर्स और ऑप्शनंस ट्रेड किए जाते हैं वह काफी रोचक है। इस सेगमेंट में हर रोज़ एक बड़ी मात्रा में कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार होता है, जिसका मतलब है कि यह बहुत तरल है। व्यापारी अक्सर जल्दी मुनाफ़ा कमाने के लिए इस लिक्विडिटी का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।

निष्कर्ष

ये तो कमोडिटी मार्केट का सिर्फ एक परिचय था। कमोडिटीज़ मार्केट कैसे काम करता है यह समझने के लिए हमें, ट्रेडिंग कैसे होती है, उसके उदाहरणों को देखना होगा। और अगले अध्याय में हम यही जानेंगे।

अब तक आपने पढ़ा

  • एक कमोडिटी बाज़ार एक ऐसा स्थान है जहां चुनिंदा वस्तुओं का कारोबार निश्चित नियमों और विनियमों के आधार पर किया जाता है।
  • एक कमोडिटी बाज़ार में ट्रेडिंग का उद्देश्य या तो वस्तुओं का उपयोग के लिए उसकी खरीद हो सकता है, या वस्तुओं की कीमत में बदलाव से मुनाफ़ा कमाना हो सकता है।
  • कमोडिटी व्यापार को नियंत्रित करने के लिए, बाज़ार में कई कमोडिटी एक्सचेंज हैं। मुख्य रूप से, भारत में छह राष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज हैं।
  • कमोडिटी बाज़ार की वस्तुओं को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है - हार्ड कमोडिटी और सॉफ्ट कमोडिटी।
  • हार्ड कमोडिटी में धातु और तेल भंडार जैसे प्राकृतिक संसाधन शामिल हैं जो देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी हैं। हार्ड कमोडिटी के कुछ अन्य उदाहरण हैं सोना, चांदी, लोहा, स्टील, एल्यूमीनियम, तांबा आदि।
  • सॉफ्ट कमोडिटीज़ मूल रूप से वो प्रोडक्ट हैं जो उगाए और पोषित किए जाते हैं। सॉफ्ट कमोडिटीज़ के कुछ उदाहरण हैं - कृषि उपज, मवेशी और अन्य पशुधन व अन्य कृषि संंबंधित उत्पाद।
  • कमोडिटीज़ बाज़ार का उपयोग मुख्य रूप से प्राइस डिस्कवरी के लिए किया जाता है।
  • अन्य निवेशों से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए भी कमोडिटी मार्केट का उपयोग किया जा सकता है।
  • कमोडिटीज़ बाज़ार में एक रोचक डरिवेटिव सेगमेंट भी हैष
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