3. फ़ॉलिंग नाइफ़ को पकड़ना

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एक मशहूर कहावत है “कभी भी गिरती तलवार को पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए ” इसका अर्थ है कि किसी भी स्टॉक या इंडेक्स को गिरते समय (उनके मूल्य में नीचे जाते समय) नहीं खरीदना चाहिए, पर हमें इसे खरीदने से पहले तब तक इंतजार करना चाहिए कि वह अपने गिरते हुए मूल्य से उछल कर वापिस से ऊपर की ओर जाना शुरू नहीं कर देता।  यह जानना कठिन है कि किसी शेयर ने अपनी गिरावट कब पूरी की है, और उनके मूल्य में कमी हमेशा ही चलती रहती है, और ऐसा भी लगता है कि यह तो शून्य तक भी गिर सकते है। हालांकि  यह बहुत मजेदार होता है जब आप किसी शेयर को उसके निम्नतम मूल्य पर खरीद लेते हैं और फिर उसकी बढ़त के पूरे सफर में भागीदार बनते हैं।  

गिरता चाकू या ‘फॉलिंग नाइफ’ का मतलब है कि बहुत ज्यादा गिरावट के समय बाजार में खरीदारी करना उतना ही खतरनाक हो सकता है जितना कि एक असली गिरते चाकू को पकड़ने की कोशिश करना। वैसे देखा जाए तो, फॉलिंग नाइफ से जुड़े कई अलग-अलग लाभ भी हैं। अगर बिलकुल अच्छे समय और सही तरह से चाकू को पकड़ा जाए तो वह व्यापारी जो डाउनट्रेंड पर स्टॉक को खरीदता है उसे कीमत के बढ़ने के समय काफी अच्छा मुनाफा होने की संभावना होती है। इसी तरह, कीमत गिरने और उसके वापिस ऊपर आने से पहले शॉर्ट पोजीशन जमा करने से मुनाफा कमाया जा सकता है। और इसके अलावा, खरीदने और होल्ड करने वाले निवेशक फॉलिंग नाइफ का उपयोग खरीदने के अवसर के रूप में कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास स्टॉक रखने के लिए एक फंडामेंटल केस होता है।

निवेश की दुनिया में, हमेशा यह सुझाव दिया जाता है कि "एक फॉलिंग नाइफ को पकड़ने की कोशिश मत करो!", खासकर अगर आप एक शुरुआती निवेशक हैं। वैसे भी अगर निवेशक इस प्रकार के शेयरों में निवेश करना चाहते है तो उन्हें बड़ी सावधानी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सामान्य तौर पर, अगर निवेशक इनमें गलत समय पर प्रवेश करता है तो यह बहुत खतरनाक हो सकता है और निवेशक को भारी नुकसान हो सकता है।

फॉलिंग नाइफ स्टॉक कैसे काम करते हैं ?

फॉलिंग नाइफ की श्रेणी के शेयरों की यात्रा बहुत सरल है। शुरू में, किसी कंपनी के बारे में नेगेटिव न्यूज़ की वजह से शेयर की कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, जब स्थिति में गिरावट जारी रहती है, तो इसकी वजह से बाजार में घबराहट और कीमतों में लगातार गिरावट आती रहती है। ऐसे मामलों के दौरान, दो संभावित परिणाम आते हैं -  

कुछ मामलों में, शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है अगर कोई पोसिटिव खबर आती है या कंपनी निकट भविष्य में नुकसान को नियंत्रित करने में सक्षम हो जाती है। इस तरह के परिदृश्य उन निवेशकों के लिए बेहद लाभदायक हो सकते हैं जिन्होंने शेयर को वापस उछलने से पहले उसे रियायती मूल्य पर खरीदा था।

हालांकि, ज्यादातर मामलों में, अगर कंपनी का प्रदर्शन कमजोर रहा हो तो निवेशकों को गंभीर नुकसान का सामना करना पड़ सकता है, भले ही उन्होंने स्टॉक को रियायती मूल्य पर खरीदा हो। सबसे खराब स्थिति में, अगर कंपनी दिवालिया हो जाती है, तो निवेशकों को अपने अधिकांश निवेशों को खोना पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, इस तरह के शेयर को अगर हम उनके गिरने के स्तर से पास खरीदते हैं तो हमें भारी लाभ हो सकता है क्योंकि हम उन्हें कम कीमत पर खरीदकर ज्यादा कीमत पर बेच देंगे। हालांकि, गलत समय पर इन कंपनियों में प्रवेश करने से एक आपदा हो सकती है और हमें बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं जहां इन शेयरों में दशकों से बेस प्राइस में तब से कोई बदलाव नहीं आया है जब से वह गिरने लगे थे।

 भारतीय बाजार में फॉलिंग नाइफ स्टॉक के कुछ हालिया उदाहरण

  • यस बैंक: यस बैंक के शेयरों में अगस्त 2018 से सितंबर 2019 के बीच की अवधि में 85% से अधिक की गिरावट आई है।
  • मनपसंद बेवरेज: मई 2018 से सितंबर 2019 के बीच की समय अवधि में मनपसंद बेवरेज के शेयरों में 95% की गिरावट आई है।
  • डीएचएफएल: दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेट लिमिटेड के शेयरों में सितंबर 2018 से सितंबर 2019 के बीच की समय अवधि में 90% से अधिक की गिरावट आई है।

फॉलिंग नाइफ का उपयोग कैसे करें?

जैसा कि बताया गया है, फॉलिंग नाइफ से आप कई तरीकों से लाभ कमा सकते हैं। ट्रेडिंग के कई दृष्टिकोण, समय के प्रति संवेदनशील होते हैं और इसमें किसी शेयर में एक तेज गिरावट पहचानने के मुकाबले ज्यादा टूल की जरूरत होती है। हालांकि, फॉलिंग नाइफ को पकड़ने का एक मौलिक मामला कीमत में गिरावट के आधार पर हो सकता है।

फॉलिंग नाइफ के कई संभावित कारण हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अर्निंग्स रिपोर्ट: कंपनियां जो अपनी कमाई को रिपोर्ट करती हैं, वे अक्सर अस्थिर उतार-चढ़ाव के अधीन होती हैं। अगर वित्तीय परिणाम उम्मीद से कम हैं, तो स्टॉक फॉलिंग नाइफ बन सकता है जब तक बाजार एक संतुलन तक नहीं पहुंच जाता।
  • आर्थिक रिपोर्ट: प्रमुख सूचकांक अक्सर आर्थिक रिपोर्टों से प्रभावित होते हैं, जैसे कि रोजगार रिपोर्ट या एफओएमसी बैठकें। अगर यह रिपोर्ट नेगेटिव होती हैं, तो प्रतिक्रिया में स्टॉक तेजी से नीचे जा सकते हैं।
  • टेक्निकल ब्रेकडाउन: कुछ फॉलिंग नाइफ मूलभूत कारकों के बजाय तकनीकी कारकों के कारण होते हैं। यदि कोई सिक्योरिटी की कीमत मुख्य सपोर्ट लेवल से नीचे आ जाती है, तो निचला सपोर्ट खोजने से पहले, कीमत तेजी से कम हो सकती है।
  • मौलिक गिरावट: यह तब होता है जब स्टॉक की अंतर्निहित कंपनी बिक्री या कमाई जैसे महत्वपूर्ण प्रदर्शन संकेतक से बुरी तरह से चूक जाती है। ऐसा तब भी होता है जब मीडिया में कंपनियों की धोखेबाजी या नुकसान की खबरें सामने आती हैं।  

अगर फॉलिंग नाइफ की परिस्थितियां पैदा करने वाले कारक अस्थायी हैं या निवेशक के खरीद या होल्ड की स्थिति पर असर नहीं डालते, तो फॉलिंग नाइफ खरीदने का अवसर हो सकता है। व्यापारियों और छोटी अवधि वाले निवेशकों के लिए, ट्रेड को सही ढंग से समय देना मुश्किल है।

कंपनी की कीमत गिरने के कारण:

कंपनी के शेयर की कीमत घटने के कई कारण हो सकते हैं। यहाँ कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं:

  1. निरंतर समय अवधि में राजस्व और मुनाफे में बड़ी गिरावट।
  2. नकारात्मक रिपोर्ट और कंपनी का लगातार बाजार के अनुमान / लक्ष्यों से चूकना।
  3. कंपनी की बुनियादी मूल्यों की गिरावट
  4. कंपनी में भ्रष्टाचार, सेबी द्वारा धोखाधड़ी के आरोप
  5. मुख्य प्रबंधकों, प्रमोटरों आदि के इस्तीफे जैसे प्रबंधन में बदलाव

यहां, यदि कीमत में गिरावट अस्थायी कारणों से होती है, तो दीर्घकालिक निवेशक को स्टॉक को होल्ड करना चाहिए या अधिक शेयर खरीदने चाहिए। हालाँकि, अगर इसका कारण कंपनी के मूल सिद्धांतों में बदलाव है, तो शेयर से बाहर निकलने का समय है, भले ही आपको नुकसान झेलना पड़े।

निष्कर्ष

अब जब आप समझ गए हैं कि वास्तविक दुनिया और शेयर बाजार में फॉलिंग नाइफ को क्यों नहीं पकड़ना चाहिए, तो हम अगले बड़े विषय पर आगे बढ़ते हैं- औसत की सारी जानकारी। इसके बारे में और जानने के लिए अगले अध्याय पर जाएँ।

अब तक आपने पढ़ा

  • फॉलिंग नाइफ एक तेज गिरावट को संदर्भित करता है, लेकिन फॉलिंग नाइफ बनने से पहले, गिरावट की मात्रा और अवधि निर्धारित नहीं होती।
  • एक फॉलिंग नाइफ का उपयोग आमतौर पर गिरावट के दौरान स्टॉक या अन्य परिसंपत्ति में निवेश ना करने की सावधानी के रूप में किया जाता है।
  • व्यापारी एक तेज गिरावट पर व्यापार करेंगे, लेकिन वे आमतौर पर एक शॉर्ट पोजीशन में रहना पसंद करते हैं और अपने ट्रेड का सटीक समय तय करने के लिए तकनीकी संकेतकों का उपयोग करेंगे।
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