6. बोलिंगर बैंड

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बॉलिंगर बैंड एक तकनीकी विश्लेषण उपकरण है, जिसे जॉन बॉलिंगर द्वारा 1980 के दशक में व्यापारिक शेयरों के लिए विकसित किया गया था। इस बैंड में एक परिवर्तनशील इंडिकेटर होता है एक सिक्योरिटी की कीमत के उतार और चढ़ाव को पिछले ट्रेड की तुलना में मापता है। परिवर्तनशीलता को स्टैंडर्ड डीविएशन की सहायता से मापा जाता है, जो अस्थिरता के बढ़ने या घटने पर बदल जाती है। मापने के दौरान मूल्य वृद्धि होने पर बैंड चौड़ा हो जाता है और मूल्य घटने पर यह संकुचित हो जाता है। इस गतिशील स्वभाव के कारण ही बॉलिंगर बैंड को विभिन्न सिक्योरिटी के व्यापार में लागू किया जा सकता है।

बॉलिंगर बैंड बाजार की अस्थिरता को समझने के लिए व्यापारियों और निवेशकों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक उपकरण है। स्टैंडर्ड डीविएशन का उपयोग करते हुए एक मूविंग एवरेज  लाइन ग्राफ के ऊपर और नीचे दो मूल्य बैंड लगाए गए होते हैं। मूविंग एवरेज लाइन के बैंड के बीच के गैप, बाजार की अस्थिरता को दर्शाते हैं।

ट्रेडिंग बैंड का एक संक्षिप्त इतिहास

जॉन बॉलिंगर ने अपने विचार के प्रस्ताव को रखने से पहले बाजार की अस्थिरता को समझने के लिए कई अन्य प्रयास किए थे। 1960 की शुरुआत में विल्फ्रिड लडू ने लंबी अवधि तक बाजार-गतिविधि की भविष्यवाणी करने के लिए डॉव जोन्स के इंडस्ट्रियल एवरेज के मासिक उतार-चढ़ाव के तरीके का उपयोग किया। उसके बाद व्यापारिक बैंड का इतिहास कुछ समय के लिए कहीं खो गया, जब तक कि इसे हर्स्ट द्वारा पुनर्जीवित नहीं किया गया। हर्स्ट से प्रेरित होकर कई अन्य लोगों ने इसी तरह के व्यापार बैंड के निर्माण का प्रयास किया लेकिन बहुत कम को ही सफलता मिली। वहीं 70 के दशक में ‘प्रतिशत बैंड’ लोकप्रिय हो गए। इसका उपयोग करना आसान था और इसलिए लोगों ने इसे पसंद किया। यह उतार-चढ़ाव दिखाने वाला एक सिंपल मूविंग एवरेज ग्राफ था जो उपयोगकर्ता द्वारा दिखाए प्रतिशत के आधार पर कार्य करता था। आधुनिक बॉलिंगर बैंड को डॉन्कियन बैंड के आइडिया पर विकसित किया गया है। यह एक प्राइस एनवेलप बैंड है जो कई दिनों के लिए उच्चतम और निम्नतम मूल्य का अंतर दिखाता है। हालांकि डॉन्कियन बैंड केवल हाल के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हैं, जिसकी वजह से बॉलिंगर बैंड ज्यादा उपयोगी साबित होता। यह स्टैंडर्ड डीविएशन का उपयोग करता है जो इसे बाजार के मिजाज के लिए गतिशील और अनुकूल बनाता है।

बॉलिंगर बैंड का उपयोग कैसे करें

सबसे पहले, किसी समय-सीमा के लिए मूविंग एवरेज, आमतौर पर 20 दिनों की सिंपल मूविंग एवरेज के हिसाब से, मापा और एक लाइन ग्राफ पर रखा जाता है। फिर, स्टैंडर्ड डीविएशन पॉइंट्स को इसके साथ प्लॉट किया जाता । स्टैंडर्ड डीविएशन एक गणितीय प्रक्रिया है जो यह गणना करता है कि एक वैल्यू ग्रुप एवरेज से कितना भटकती या डीविएट होती है। 

स्टैंडर्ड डीविएशन (एसडी) की गणना का फॉर्मूला

स्टैंडर्ड डीविएशन की गणना कुल जनसंख्या में संख्या के योग का वर्गमूल से औसत को सैंपल साइज द्वारा विभाजित करके की जाती है। बॉलिंगर में  ऊपरी और निचले बैंड की गणना एसडी को दो से गुणा करके और दोनों को क्रमशः ऊपरी और निचले मूल्यों को प्लॉट करने के लिए मूल्य से संख्या को जोड़ना और घटाना होता है। ये रहा फॉर्मूला:

बॉलिंगर बैंड फॉर्मूला

​BOLU=MA(TP,n)+m∗σ[TP,n]

BOLD=MA(TP,n)−m∗σ[TP,n]

कहां पर

​BOLU= बॉलिंगर ऊपरी बैंड

MA= गतिशीत औसत

TP= विशिष्ट मूल्य (उच्च + निम्न + क्लोज) / 3

N= मूविंग एवरेज में दिनों की संख्या (आमतौर पर 20)

M= SD की संख्या (आमतौर पर 2)

σ[TP, N] = TP के अंतिम N अवधि में SD

अपने सरल दृष्टिकोण के कारण बॉलिंगर बैंड का व्यापक रूप से यह अनुमान लगाने के लिए उपयोग किया जाता है कि बाजार का भाव कब बदल रहा है। यह लचीला है और इसे किसी विशेष शेयर या व्यापार के आकार की प्रकृति के अनुरूप बदला जा सकता है।

बॉलिंगर बैंड की व्याख्या कैसे करें

बॉलिंगर बैंड यह बता सकता है कि बाजार अधिक अस्थिर है या कम। मूविंग एवरेज लाइन से बैंड के बीच का अंतर बाजार की अस्थिरता का माप है। जब बाजार अस्थिर होता है तो बैंड मूविंग एवरेज ग्राफ से आगे निकल जाता है और अस्थिरता कम हो जाती है। इससे यह भी पता चलता है कि बाजार की धारणा कब बदल रही है। बॉलिंगर बैंड्स व्यापारिक रणनीति का उपयोग करके व्यापारी अनुमान लगा सकते हैं कि शेयर ओवरबॉट या ओवरसोल्ड है। जब शेयर की कीमत ऊपरी बैंड के करीब जाती है, तो यह अधिक खरीद को इंगित करता है। इसी तरह जब कीमत निचले बैंड के करीब जाती है, तो ये शेयर अधिक बिक्री का संकेत होता है। 

पैटर्न का अध्ययन कैसे किया जाता है, यहां देखें 

स्क्वीज : यह प्राइस एनवेलप का एक हिस्सा है जहां तीन लाइनें एक दूसरे के करीब आती हैं और कम अस्थिरता का संकेत देती हैं। व्यापारी भविष्य के बाजार की अस्थिरता और व्यापार के अवसर की आशा करने के लिए बॉलिंगर बैंड में स्क्वीज़ की तलाश करते हैं।

ब्रेकआउट : ये वो प्राइस पॉइंट हैं जो प्राइस बैंड के बाहर होते हैं। यह एक सामान्य घटना नहीं है और इसे बाजार के संकेत के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। यह आपको ये तक नहीं बताता है कि बाजार किस तरफ जाएगा।

डब्ल्यू बॉटम्स : यह एक तकनीकी विश्लेषण है जो बताता है कि जब शेयर मूल्य एक साथ दो कम कीमतों से टकराता है तो एक ग्राफ में डब्ल्यू आकृति बनाता है, इसलिए इसका नाम डब्ल्यू बॉटम्स है। यह आर्थर मेरिल के काम का एक हिस्सा है और बॉलिंगर द्वारा उपयोग किया जाता है। बॉलिंगर में एक डब्ल्यू की पहचान करने के लिए चार चरण हैं।

पहले अवसर पर इसके पलटने से पहले मूल्य निचले बैंड से नीचे चला जाता है। उसके बाद दूसरी गिरावट आती है जो निचली सीमा से ऊपर होती है। फिर एक मजबूत उछाल होता है जो डब्ल्यू आकृति को पूरा करते हुए एक रेसिस्टेंस स्तर को तोड़ता है।

एम टॉप्स : यह डब्ल्यू-बॉटम के विपरीत है। यह तब होता है जब एक शेयर की कीमत ऊपर की ओर जाती है। यह फिर से ऊपर बढ़ने करने और गिरने के लिए एक प्रमुख एम आकृति का प्रतिनिधित्व करता है। यह ऊंचाईयां या चढ़ाव समझने में अधिक जटिल होते हैं। ऊपरी बैंड तक पहुंचने के लिए दूसरा-उच्च विफल हो जाता है जो मोमेंटन के कम होने का संकेत है और एक ट्रेंड रिवर्सल का संकेत देता है। यहां एम-पैटर्न का एक उदाहरण दिया गया है।

बॉलिंगर ने चेतावनी दी है कि ऊपरी या निचली सीमाएं तोड़ने वाली कीमतें ट्रेंड बदलने आ ट्रेडिंग के संकेत नहीं देती हैं। किसी शेयर के मजबूत या कमजोर होने पर बैंड दिखते हैं। एक गति दोलक भी उसी तरह काम करता है। ऊपरी सीमा के करीब की कीमतें तेजी के रुझान या इसकी विपरीत स्थिति का संकेत नहीं देती हैं।

बॉलिंगर बैंड्स की कमियां

यह एक सटैंड अलोन उपकरण नहीं है। बॉलिंगर ने सही बाजार संकेतों को प्राप्त करने के लिए दो या तीन अन्य गैर-कोरिलेशन वाले व्यापारिक उपकरणों के साथ इसका उपयोग करने का सुझाव दिया।

चूंकि इसकी गणना एक सिंपल मूविंग एवरेज  के आधार पर की जाती है, इसलिए नए आंकड़ों की तुलना में पुराने आंकड़ों को अधिक वेटेज दी जाती है। यह नए डेटा के महत्व को कम करता है और निर्णय लेने को प्रभावित कर सकता है। व्यापारियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप इसे समायोजित करना चाहिए और व्यापारिक निर्णय लेते समय वर्तमान जानकारी को भी ध्यान में रखना चाहिए।

निष्कर्ष

अब जब आप बॉलिंगर बैंड की अवधारणा को समझ गए हैं, तो हम अगले बड़े विषय मूविंग एवरेज का उपयोग पर चलते हैं। इसके बारे में और जानने के लिए अगले अध्याय पर जाएं।

अब तक आपने पढ़ा

- बॉलिंगर बैंड एक व्यापारिक उपकरण है जिसका उपयोग किसी व्यापार के लिए प्रवेश और निकास बिंदुओं को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

- बैंड का उपयोग अक्सर अधिक खरीद और अधिक बिक्री की स्थितियों को निर्धारित करने के लिए किया जाता है।

- व्यापार के लिए केवल बैंड का उपयोग करना एक जोखिम भरी रणनीति है क्योंकि सूचक कीमत और अस्थिरता पर ध्यान केंद्रित करता है, जबकि बहुत सारी अन्य प्रासंगिक जानकारी को अनदेखा करता है।

- बॉलिंगर बैंड एक सरल व्यापार उपकरण है और पेशेवर और घरेलू व्यापारियों के बीच लोकप्रिय है।

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इस अध्याय के लिए प्रश्नोत्तरी लें और इसे पूरा चिह्नित करें।

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