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पोर्टफोलियो प्रबंधन

1. रिटर्न से आगे: निवेश विक्लपों को आंकने के लिए रिस्क, तरलता और कीमतों में अस्थिरता को कैसे मापें

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कोच दयाल आने वाले इंटर कॉलेज मैच के लिए एक क्रिकेट टीम बना रहे हैं। आपको क्या लगता है कि वह अपने खिलाड़ियों को चुनते समय सबसे पहले क्या देखेंगे ?  जी हाँ, आपने बिलकुल सही अनुमान लगाया। कोच दयाल सबसे पहले एक खिलाड़ी का स्कोर-कार्ड देखेंगे, है ना?

अगर आप अपना इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो बना रहे हैं, तो आप निवेश करते समय सबसे पहले क्या सोचेंगे? अगर आप ज्यादातर लोगों की तरह हैं, तो आप मुख्य रूप से इस बात पर ध्यान देंगे कि आप अपने निवेश से कितना लाभ कमा सकते हैं, क्यों सही कहा ना ? दूसरे शब्दों में, यह आपके निवेश का रिटर्न है और आप इसे जैसे भी हो ज्यादा से ज्यादा बढ़ाने की इच्छा रखेंगे। 

अपेक्षित रिटर्न क्या हैं?

सीधे शब्दों में, यह वह रिटर्न हैं जिसकी उम्मीद आप आप अपने किए हुए निवेश से रखते हैं। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि आपके पास ₹10,000 हैं और आप आज टाटा कैपिटल के शेयर में इन्वेस्ट करने की योजना बना रहे हैं, इस उम्मीद के साथ कि यह एक साल के अंदर 20% तक बढ़ जाएगा।

इस मामले में, आपका अपेक्षित रिटर्न 20% होगा।

लेकिन अगर आप अपने ₹10000 को टाटा मोटर्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के शेयर मे निवेश करने की योजना बना रहे हों तो? और वह भी, 50-50 के रेशियो में?

और मान लीजिए कि आपको टाटा कैपिटल में अपने निवेश पर 20% और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ में अपने निवेश पर 25% के रिटर्न की उम्मीद है।

ऐसे में आपका अपेक्षित रिटर्न क्या होगा?

20%? 25%? या दोनों?

खैर, यह एक मुश्किल सवाल था! इसका उत्तर है ना तो 20% और ना 25%।

यहां बताया गया है कि आप इस मामले में अपेक्षित रिटर्न कैसे निकाल सकते हैं। आपको हर निवेश की राशि के रेशियो को उससे अपेक्षित रिटर्न से गुणा करना होगा।  गणितीय रूप से, इसे ऐसे दर्शाया जाता है:

E (RP) = W1R1 + W2R2 + W3R3 + ______ + WnRn

जहाँ पर

E (RP) का मतलब है पोर्टफोलियो से अपेक्षित रिटर्न

W = उस पोर्टफोलियो में प्रत्येक निवेश की राशि

R = व्यक्तिगत निवेश से अपेक्षित रिटर्न 

इस फॉर्मूला को हम अपने निवेश पर लागू करें तो हमें ये मिलता है:

E(आरपी) = (50% x 20%) + (50% x 25%)

= 10% + 12.5%

= 22.5%

रिटर्न से आगे: अस्थिरता, रिस्क और तरलता का परिचय

इसमें कोई संदेह नहीं है कि अपेक्षित रिटर्न वास्तव में बहुत अहम है। लेकिन क्या आपको एक निवेश विकल्प सिर्फ इसलिए चुनना चाहिए क्योंकि उसमें आपको अच्छा रिटर्न देने की क्षमता है? जी नहीं, यहां आपको तीन अन्य महत्वपूर्ण कारकों - जोखिम, अस्थिरता और तरलता का आकलन करने की भी ज़रूरत होती है।

चलिए, इन अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने के लिए, कोच दयाल के पास वापस चलते हैं।

अस्थिरता

कोच अब दो खिलाड़ियों के प्रदर्शन का आकलन कर रहे हैं, जिनके आंकड़े इस प्रकार हैं:

मैच नं.

खिलाड़ी 1 के रन

खिलाड़ी 2 के रन

1

10

55

2

100

45

3

10

35

4

100

45

5

10

50

कुल रन

230

230

औसत रन

46 (230/5)

46 (230/5)

कोच दयाल दुविधा में हैं कि अपनी टीम के लिए किस खिलाड़ी को चुनें। खिलाड़ी 1 और खिलाड़ी 2, दोनों के औसतन 46 रन हैं। लेकिन उनके व्यक्तिगत रन काफी अलग हैं।

खिलाड़ी 1 में एक मैच में 100 रन बनाने की क्षमता है, लेकिन यह भी संभावना है कि वह बहुत कम स्कोर पर ही आउट हो जाए। खिलाड़ी 2, इस बीच, हर मैच में समान तरह से खेलने की क्षमता रखता है। वह खिलाड़ी 1 जितना अच्छा नहीं है पर उसके प्रदर्शन का अनुमान लगाया जा सकता है।

तो, कोच दयाल को क्या करना चाहिए ?

खैर, बहुत सोचने के बाद, उन्होंने खिलाड़ी 2 को चुना।

अगर आप सोच रहे हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो चलिए, जानते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्लेयर 2 अधिक अनुमानित है और कम अस्थिर है। ऐसे में कोच दयाल आसानी से अपनी बाकी की टीम चुन सकते हैं, क्योंकि उनके पास इस बात का बहुत सही आइडिया है कि खिलाड़ी 2 के कितने रन बनाने की संभावना है।

यहाँ जो आपने देखा उसी को अस्थिरता या वोलेटिलिटी कहते हैं।  

शेयर बाज़ार में अस्थिरता

शेयर बाज़ारों में, अस्थिरता से मतलब किसी सिक्योरिटी या शेयर की कीमत में एक निश्चित अवधि में आए बदलाव से है। सिक्योरिटी की कीमत में बार-बार भारी बदलाव का मतलब है कि वह ज्यादा अस्थिर या वोलाटाइल है (खिलाड़ी 1 की तरह), जबकि कीमत में मामूली बदलाव का मतलब है कि यह कम अस्थिर है, (खिलाड़ी 2 की तरह)।

यह हमें एक और अहम सवाल पर लाता है - आपको किस शेयर में निवेश करना चाहिए? ज्यादा अस्थिर या कम?  

खैर, इस सवाल का कोई सही जवाब नहीं है। यह पूरी तरह से आपके इनवेस्टमेंट प्रोफाइल पर निर्भर करता है कि आप बाज़ार से रिटर्न के साथ क्या हासिल करना चाहते हैं और किन लक्ष्यों को पूरा करना चाहते हैं। ज़रूरी बात यह है कि आप किसी भी निवेश में अपना पैसा लगाने से पहले उसकी अस्थिरता और उसके कारकों का आकलन ज़रूर करें।

 किसी शेयर या पोर्टफोलियो की अस्थिरता का आकलन करने के लिए, आपके पास पोर्टफोलियो स्टैंडर्ड डेविएशन जैसे कई गणितीय साधन मौजूद हैं।

रिस्क

आइए एक बार फिर से दो खिलाड़ियों और कोच दयाल का उदाहरण लेते हैं। पहले, हमने देखा कि कोच ने खिलाड़ी 2 को चुना क्योंकि वह कम अस्थिर था। लेकिन क्या हो अगर कोच दयाल एक जोखिम लेने वाले व्यक्ति हों? वह समझते हैं कि खिलाड़ी 1 के मैच प्रदर्शन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता, लेकिन वह यह भी समझते हैं कि खिलाड़ी 1 में शतक मारने की क्षमता है।

अब वह इन दोनों कारकों को मापते हैं - खिलाड़ी 1 की अस्थिरता और 100 रन बनाने की उसकी क्षमता - कोच दयाल इस जोखिम को लेने का फैसला करते हैं और खिलाड़ी 1 को टीम में शामिल कर लेते हैं।

इस स्थिति में,  आखिर वो कौन- सा रिस्क है जिसका हम आकलन कर रहे हैं? खिलाड़ी के अच्छा प्रदर्शन नहीं करने की संभावना है, क्यों सही कहा ना ? 

 किसी एसेट या पोर्टफोलियों में भी यही रिस्क रहता है।

शेयर बाज़ार में रिस्क

आम शब्दों में, किसी निवेश से जुड़ा रिस्क उस चीज़ में निवेश करने पर पैसा खोने की संभावना को कहते हैं। रिस्क दो प्रकार के हो सकते हैं:

  • व्यवस्थित/ सिस्टमैटिक रिस्क
  • व्यवस्थित/ अनसिस्टमैटिक रिस्क 

इसे समझने के लिए, चलो खिलाड़ी 1 पर एक और नज़र डालें। मानिए कि उसके पैर में मामूली चोट लगी है। यह चोट एक मैच के दौरान उसके शतक बनाने की संभावना को काफी कम कर सकती है, है ना?

अब, दूसरी परिस्थिति पर ध्यान दें। मानिए कि क्रिकेट टीम को एक नई जगह पर मैच खेलना है, जहाँ टीम खेलने की आदि नहीं है। इस मामले में, इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दे पाएगी, क्योंकि वे इस नए खेल के मैदान के लिए तैयार नहीं हैं। यह कारक मैच के दौरान खिलाड़ी 1 के शतक बनाने की संभावनाओं को भी कम करता है।

दोनों ही मामलों में, खिलाड़ी के शतक मारने की संभावना कम हो जाती है। लेकिन दोनों मामलों में क्या अंतर है?

आप देखते हैं, पहली स्थिति में, इस जोखिम का कारण खिलाड़ी से जुड़ा हुआ है। यह एक अव्यवस्थित रिस्क है।

लेकिन दूसरे मामले में, यह बाहरी कारकों से जुड़ा है। यह एक व्यवस्थित रिस्क है।

रिस्क के रूपों की परिभाषा

तो चलिए बाज़ार और निवेश के संबंध में इन दोनो शब्दों को परिभाषित करते हैं।

  • अव्यवस्थित रिस्क स्वाभाविक रूप से किसी उद्योग, खंड या सिक्योरिटी के साथ जुड़ा होता है।
  • व्यवस्थित रिस्क पूरे बाज़ार या कंपनी से जुड़े सेगमेंट में नुकसान की संभावना है।

 सिक्योरिटीज़ या पोर्टफोलियो के रिस्क का आकलन करने के लिए कई संख्यात्मक तकनीकें हैं, जैसे वेरिएंस और कोवेरिएंस, वेरिएंस कोवेरिएंस मैट्रिक्स और पोर्टफोलियो स्टैंडर्ड डेविएशन कैलक्यूलेटर।

तरलता/ लिक्विडिटी

अब तक आपने जाना की अस्थिरता और रिस्क क्या हैं। अब समय आ गया है की हम तरलता के बारे में जानें। सीधे शब्दों में कहें, तो यह बिना मार्केट वैल्यू पर असर डाले किसी भी एसेट को आसानी से बेचकर नक़दी में बदलने की क्षमता है।

चलिए तरलता को बेहतर तरीके से समझने के लिए दो अलग-अलग निवेशकों और उनके निवेश के विकल्पों पर नज़र डालते हैं।

राम ने पिछले साल रियल एस्टेट में निवेश किया था। ज्यादा डीटेल में जाएँ तो, उसने पुणे के बाहरी इलाके में एक शानदार बंगला ख़रीदा, इस उम्मीद से कि वह उसे किराए पर देकर कुछ आय अर्जित करेगा। लगभग उसी समय, राम के भाई गौरव ने सोने में निवेश किया।

आज, एक साल बाद, राम को अपनी प्रॉपर्टी के लिए एक किरायेदार खोजने में अभी भी मुश्किल आ रही है। और अचानक, उसके परिवार में एक मेडिकल इमरजेंसी आने की वजह से उन्हें कुछ पैसों की ज़रूरत पड़ती है। दोनों भाई तरल नक़दी के बदले अपने निवेश को बेचने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उनमें से केवल एक ही सफल होता है।

खैर, ये जानना कोई मुश्किल बात नहीं है कि कौन-सा भाई इसमें सफल हुआ। पिछले साल सोने में निवेश करने वाले गौरव को आसानी से खरीदार मिल गया। दूसरी ओर, राम को इतने कम समय मे अपनी प्रॉपर्टी बेचने के लिए कोई खरीदार ही नहीं मिला।

इससे क्या पता चलता है, यही कि इस मामले में, सोना अचल संपत्ति की तुलना में अधिक तरल या लिक्विड साबित हुआ। दूसरे शब्दों में, सोने को बेचने और खरीदने के लिए बाज़ार हमेशा तैयार रहता है।

इस तरह, हर निवेश तरलता के अलग-अलग स्तरों के साथ आते हैं। अपने पोर्टफोलियो के लिए निवेश का चयन करने से पहले इस बात को भी ध्यान में रखने की ज़रूरत होगी।  

रिस्क, अस्थिरता और तरलता के बीच संबंध

क्या ये तीनों चीज़ें संबंधित हैं? जी हां, आइए देखें कि कैसे।

अस्थिरता और रिस्क

  • किसी एसेट की अस्थिरता जितनी अधिक होती है,  वह निवेश के विकल्प के रूप में उतना ही जोखिम भरा होता है।
  • इसके विपरीत, कम अस्थिरता वाले एसेट में निवेश करना ज़्यादा सुरक्षित हो सकता है।

तरलता और रिस्क

  • संपत्ति जितनी ज्यादा लिक्विड होती है, उसमें रिस्क उतना ही कम होता है, क्योंकि उस निवेश को बेचना आसान होता है।
  • इसके विपरीत, जितना कम तरल एक एसेट होता है, उसमें निवेश करना उतना ही जोखिम भरा हो सकता है।

निष्कर्ष

रिटर्न से आगे बढ़कर देखने पर आपको आपके व्यक्तिगत निवेशक प्रोफाइल के लिए उपयुक्त निवेश योजना बनाने में मदद मिलती है। लक्ष्य निर्धारित कर और अपने रिस्क- रिटर्न प्रोफ़ाइल पर आधारित फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में और जानने के लिए स्मार्ट मनी से जुड़े रहें। 

अब तक आपने पढ़ा

  • अपेक्षित रिटर्न वे रिटर्न होते हैं जिसकी उम्मीद आप अपने निवेश से करते हैं।
  • निवेश पोर्टफोलियो से अपेक्षित रिटर्न की गणना करने के लिए, आपको निवेश की गई राशि की रेशियो को उससे अपेक्षित रिटर्न से गुणा करना होता है।
  • शेयर बाज़ारों में अस्थिरता का मतलब एक निर्धारित अवधि के लिए एसेट की कीमत में परिवर्तन से है।
  • एसेट की कीमत में बार-बार भारी बदलाव का मतलब है कि वह अधिक अस्थिर या वोलाटाइल है, जबकि कीमत में मामूली बदलाव का मतलब है कि यह कम अस्थिर है।
  • आम शब्दों में, किसी निवेश से जुड़ा जोखिम आपके उस निवेश पर पैसा खोने की संभावना है।
  • रिस्क दो प्रकार के हो सकते हैं: अव्यवस्थित रिस्क और व्यवस्थित जोखिम।
  • अव्यवस्थित रिस्क स्वाभाविक रूप से किसी उद्योग, खंड या सुरक्षा के साथ जुड़ा हुआ रिस्क होता है।
  • व्यवस्थित जोखिम पूरे बाज़ार या उस कंपनी से जुड़े सेगमेंट में नुकसान की संभावना है।
  • तरलता बिना मार्केट वैल्यू में बदलाव के, किसी एसेट को नक़दी में परिवर्तित करने की क्षमता है।
  • हर निवेश तरलता के विभिन्न स्तरों के साथ आते हैं। अपने पोर्टफोलियो के लिए निवेश का चयन करने से पहले आपको इसे आकने की ज़रूरत होगी। 
  • किसी एसेट की अस्थिरता जितनी अधिक होती है, यह निवेश के विकल्प के रूप में उतना ही जोखिम भरा होता है।
  • इसके विपरीत, कम अस्थिरता वाले एसेट में निवेश करना अधिक सुरक्षित हो सकता है।
  • एसेट  जितना अधिक लिक्विड होता है, उसका जोखिम उतना ही कम होता है, क्योंकि उस निवेश को बेचना आसान होता है।
  • इसके विपरीत,  एसेट जितना कम तरल हो, उसमें निवेश करना उतना ही जोखिम भरा हो सकता है।
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