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आंकड़ों से आगे : ड्यू डिलिजेंस

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जब आप एक कंपनी में लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो ठीक तरह से उस कंपनी का फाइनेंशल एनालिसिस और मूल्यांकन करना ज़रूरी हो जाता है। हालांकि  सिर्फ आंकड़े पर ही आपका फोकस नहीं होना चाहिए, बल्कि ड्यू डिलिजेंस, या यूँ कहें कि अहम जानकारियों का परीक्षण भी आपके निवेश के फ़ैसलों का अहम हिस्सा होना चाहिए। ड्यू डिलिजेंस एक जांच है जो कि आपको किसी कंपनी को बेहतर जानने मे मदद कर सकती है। 

उदाहरण के लिए, इनवेस्टमेंट बैंकों पर एक नज़र डालें। जब भी वह किसी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदना चाहते हैं या किसी व्यवसाय को ही खरदीना चाहते हैं, तो वह फाइनेंशल एनालिसिस के साथ विस्तृत ड्यू डिलिजेंस अभ्यास भी करते है। कभी-कभी, वह एक कदम आगे जाकर, लीगल और अकाउंटिंग ड्यू डिलिजेंस के लिए बेहतरीन पेशेवर फर्म्स को भी नियुक्त करते हैं। इस तरह, उन्हें एक कंपनी के बारे में जानने लायक सारी चीज़ें पता लग जाती है, जिससे वह उस कंपनी का आसानी से मूल्यांकन कर सकते हैं।

एक निवेशक के रूप में, यह ज़रूरी है कि आप भी इन सभी कारकों पर गौर करें। और क्योंकि आप अपनी मेहनत से कमाए पैसे का एक बड़ा हिस्सा निवेश कर रहे हैं, तो आपको भी यह अभ्यास करना चाहिए ताकि आप एक अच्छी और स्थिर कंपनी में निवेश कर सकें। इसलिए, इस अध्याय में, हम ड्यू डिलिजेंस के कुछ ऐसे पॉइंट्स को समझेंगे, जिन्हें आपको एक निवेशक के रूप में निवेश करने से पहले ध्यान में रखना चाहिए। चलिए, सबसे पहले कानूनी या लीगल ड्यू डिलिजेंस के साथ शुरुआत करें।

लीगल ड्यू डिलिजेंस

लीगल ड्यू डिलिजेंस में एक कंपनी के कानूनी पहलुओं की गहन परीक्षा करना शामिल होता है। इसे यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि कंपनी किसी भी तरह से, लागू क़ानूनों, नियमों और विनियमों का उल्लंघन नहीं करती है। एक कंपनी जो कानून का पालन नहीं करती है, चाहे वह यह जानबूझकर ऐसा करती हो या अनजाने में, खुद के लिए बड़े कानूनी मुक़द्दमों के लिए दरवाज़े खोल देती है, जिससे कंपनी का बहुत धन बर्बाद हो जाता है। 

तो, आइए कुछ प्रमुख कानूनी मुद्दों पर एक नज़र डालते हैं, जिन्हें आपको किसी कंपनी में निवेश करने से पहले जाँचना चाहिए।

उद्योग और कंपनी को नियंत्रित करने वाले कानून

जिस इंडस्ट्री के अंतर्गत कंपनी काम करती है, उस इंडस्ट्री के लिए बनाए गए विभिन्न प्रमुख कानूनों को आधार बनाकर कंपनी की जांच करना, आपके ड्यू डिलिजेंस को शुरू करने के लिए एक अच्छी जगह हो सकती है। इससे आपको पूरी इंडस्ट्री की बहुत सारी जानकारी तो मिल ही सकती है साथ ही यह भी पता लग सकता है कि इसे कैसे रेग्युलेट किया जाता है। इससे आपके लिए यह जाँचना भी आसान हो जाता है कि कंपनी नियमों का पालन कर रही है या नहीं ?

इसके साथ ही आप, इंडस्ट्री को प्रभावित करने वाली नितियों और कानूनों में हुए नए परिवर्तनों को भी देख सकते है। और इससे आपको यह देखने को मिलेगा कि उन बदलावों ने कंपनी को किस तरह से प्रभावित किया है। उदाहरण के तौर पर,  अभी हाल ही में कॉरपोरेट टैक्स को 30% के बेस रेट से घटाकर 22% कर दिया गया था, ये नीतियों में बदलाव से कंपनी पर होने वाले सकारात्मक प्रभाव का एक अच्छा उदाहरण है।  

मेमोरेंडल और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन

मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AOA) किसी कंपनी के बेहद ज़रूरी दस्तावेज़ होते हैं जो स्पष्ट रूप से बताते हैं कि कंपनी क्या-क्या करने के लिए अधिकृत है। यह आमतौर पर हर कंपनी के लिए अलग-अलग होते हैं। मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में कंपनी के उद्देश्यों के बारे में लिखा होता है, जबकि आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन (AOA) में यह लिखा होता है कि कंपनी अपने कार्यों या उद्देश्यों को किस तरह से पूरा करेगी।

इन दस्तावेज़ों में कंपनी को बनाने के उद्देश्यों के एक पूरे सेट के बारे में लिखा होता है। अगर कंपनी कोई भी काम कर रही है या भविष्य में करना चाहती है तो वह सभी काम या उद्देश्य MOA और AOA में लिखे होने ही चाहिए। उदाहरण के लिए, अगर किसी कंपनी के MOA में उसका मुख्य उद्देश्य दोपहिया वाहनों का निर्माण करना लिखा हुआ है और कंपनी एक ऐसी गतिविधि करती है जिसमें वह मोबाइल बना रही है, तो इसे सीधे-सीधे कंपनी के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। इसलिए, यह एक ऐसी चीज़ है जिसे आपको लीगल ड्यू डिलिजेंस के अभ्यास के दौरान बहुत ही ध्यान से जाँचना चाहिए।

निदेशक मंडल द्वारा और एनुअल जेनेरल मीटिंग में लिए गए निर्णय

कंपनी जब भी कोई बड़ा और ज़रूरी व्यावसायिक निर्णय लेती हैं तो उसे इन निर्णयों को या तो बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग में या फिर शेयरहोल्डर्स की वार्षिक आम बैठक यानी एनुअल जेनेरल मीटिंग में पारित करवाना होता है। इसीलिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग और एनुअल जेनेरल मीटिंग के मिनटों को जाँचना बहुत ज़रूरी होता है।   

इस तरह से, आप खुद को कंपनी के वर्तमान या भविष्य से जुड़े व्यावसायिक निर्णयों के बारे में सूचित रख सकते हैं। आप यह सारी जानकारी बड़ी ही आसानी से स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर जाकर ले सकते हैं, क्योंकि सभी लिस्टेड कंपनियाँ को अपनी सभी मीटिंगों में हुए निर्णयों की जानकारी को वेबसाइट पर दर्ज करवाना क़ानूनन ज़रूरी है।

मौजूदा और भविष्य के संभावित मुकदमे

कानूनी मुकदमे कंपनी के पैसे और संसाधनों के लिए एक बहुत बड़ी परेशानी बन सकते हैं। और इसीलिए आपका यह जाँचना बहुत ज़़रूरी है कि जिस कंपनी में आप निवेश करना चाह रहे हैं वह किसी कानूनी विवाद में तो उलझी हुई नहीं है। अगर कंपनी के ऊपर कोई केस चल रहा है, तो उसके बारे में आपको पता होना ही चाहिए।

और जब आपको मुकदमे के बारे में पूरी जानकारी होती है तो आप काफी हद  तक यह अंदाज़ा लगा सकते है कि निर्णय कंपनी के पक्ष में जाएगा या नहीं। अगर एक कंपनी के खिलाफ बहुत से केस चल रहे हैं तो आमतौर पर उसमें निवेश करना एक खराब विकल्प होता है। और अगर आपको लगता है कि कंपनी नियमों और कायदों की पालना नहीं कर रही है और इसी वजह से कंपनी के ऊपर भविष्य में शायद कोई मुकदमा किया जा सकता है, तो आपको इन सभी के बारे में भी पता होना चाहिए।

ज़्यादातर बिज़नेस, खासकर वह कंपनियाँ जो उत्पादन करती हैं, उन्हें, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सुरक्षा गाइडलाइंस का बहुत कड़ाई से पालन करना होता है। इनमें अगर कंपनी कोई भी चूक करती है तो कंपनी के ऊपर केस फाइल हो सकता है और इससे कंपनी को बहुत नुकसान झेलना पड़ सकता है।

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बकाया टैक्स भुगतान और अन्य कानूनी दायित्व

कराधान यानी टैक्सेशन एक और ऐसी चीज़ है जहाँ आपको ड्यू डिलिजेंस अभ्यास करने पर ध्यान देना चाहिए। एक कंपनी, टैक्स संरचना या नियमों में आए बदलावों की वजह से किसी अप्रत्याशित कर समस्याओं से घिर सकती है। या कुछ ऐसे बकाया टैक्स भुगतान भी हो सकते हैं, जिन्हें कंपनी को अधिकारियों को देना होता है। बकाया कर देनदारियों के भुगतान में देरी होने से कंपनी पर जुर्माना लग सकता है और साथ ही साथ, टैक्स पर ज्यादा ब्याज भी लग सकता है, और इससे कंपनी को बहुत नुकसान होने की संभावना होती है।

कुछ मामलों में, आयकर अधिकारी पिछले अकाउंटिंग वर्षों के लिए अतिरिक्त कर भुगतान करने की मांग भी कर सकते हैं। ऐसा तब होता है जब आयकर विभाग कंपनी द्वारा क्लेम किए गए कुछ खर्चों पर छूट देने से मना कर दे और ऐसे में कंपनी की टैक्स लाइबलिटी बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में ज़्यादातर कंपनियाँ आयकर विभाग की ऐसी मांगों को मानने से मना कर देती हैं और कोर्ट में इस फैसले से लड़ने की कोशिश करती है। अगर आप इस क्षेत्र के मामलों को देखेंगे तो पाएंगे कि इससे कई बार कंपनी की वित्तीय स्थिति पर खराब प्रभाव भी पड़ जाता है।   

कॉर्पोरेट प्रशासन की नीतियाँ

कॉरपोरेट गवर्नेंस नीतियों को बहुत अच्छे से जाँचने से कई बड़े मुद्दे आपके सामने जाते है। आपको याद होगी कि कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट में कॉरपोरेट गवर्नेंस का एक सेक्शन था। यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस की नीतियों के बारे में जानने का शायद सबसे अच्छा स्रोत है।

कॉर्पोरेट गवर्नेंस बहुत मुश्किल कॉन्सेप्ट है। इसमें कई सेक्शन और सब-सेक्शन होते है। इसे अच्छे से देखने पर आपको कभी-कभी ऐसे मुद्दे और ख़ामियों के बारे में जानने का मौका मिलेगा, जिन्हें शुरुआत में ही सही ना किया जाए तो बाद में बड़ी मुश्किल आ सकती है। 

अगर कोई कंपनी एक साल में कॉर्पोरेट सामाजिक ज़िम्मेदारी (CSR) गतिविधियों पर सही मात्रा में खर्च नहीं करती तो, आमतौर पर इसे कॉर्पोरेट गवर्नेंस के नियमों की अवहेलना माना जाता है। या, कंपनी निर्धारित नियमों के अनुसार संबंधित पार्टी लेन-देन की जानकारी का खुलासा नहीं करती है, तो यह फिर से एक कॉर्पोरेट गर्वनेंस  का मुद्दा बन जाता है जिसे उचित रूप से संबोधित किया जाना चाहिए। इस तरह की चीज़ों पर नज़र रखें। 

प्रबंधन में महत्वपूर्ण बदलाव

जब किसी कंपनी द्वारा सामना की गई परेशानियों को बताने की बात आती है, तब कंपनी के प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों में हुए बदलाव एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। लीगल ड्यू डिलिजेंस करते समय, मैनेजमेंट में हुए बदलाव और उनके कारणों पर हमें बहुत ध्यान देना चाहिए।  

कभी-कभी, ऐसे इस्तीफ़े या निदेशकों का हटना कॉर्पोरेट प्रशासन की विफलता का संकेत हो सकता है। उदाहरण के लिए, येस बैंक लिमिटेड के मामले में, 2018 और 2019 में, कई प्रमुख प्रबंधकीय कर्मी, जो वर्षों से कंपनी से जुड़े थे, वे तुरंत, एक के बाद एक, कंपनी छोड़ते गए। यह गंभीर चूक और कॉर्पोरेट प्रशासन में विफलता का एक प्रारंभिक संकेत था, जिसका प्रभाव तब दिखा जब कुछ समय बाद कंपनी के शेयरों का मूल्य 80% कम हो गया। 

अकाउंटिंग ड्यू डिलिजेंस

तो जैसा कि आपने देखा कि ऊपर लीगल ड्यू डिलिजेंस के बारे में बताया गया है, चलिए, अब ड्यू डिलिजेंस अभ्यास के दूसरे सेक्शन के बारे में जानते है - अकाउंटिंग ड्यू डिलिजेंस। जब हम अकाउंटिग डिलिजेंस के बारे में बात करते हैं, तो हम आंकड़ों पर फोकस नहीं करते है। इसके बजाय आपको कंपनी में लागू अकाउंटिंग नीतियों को देखना चाहिए।

किसी कंपनी की अकाउंटिंग नीतियां आपको कंपनी राजस्व और खर्चों को पहचानने के तरीके, और उनके स्वीकृत अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के अनुरूप होने से जुड़ी बहुत सी जानकारी देती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख पॉइंट्स को बताया गया है, जिन्हें अकाउंटिंग ड्यू डिलिजेंस का संचालन करते समय ध्यान में रखना चाहिए:

  • कंपनी द्वारा लागू की गई अकाउंटिंग नीतियाँ, खासकर उस क्षेत्र से जुड़ी नीतियाँ जहाँ कानून कंपनी को अलग-अलग नीतियों का पालन करने की छूट देता है। 
  • कंपनी के स्वामित्व और लीज़ पर लिए गए एसेट
  • किसी उपकरण के खराब होने या उसकी अवधि पूरी होने पर उसे बदलने में लगने वाली लागत 
  • राजस्व की पहचान, इन्वेंट्री प्रबंधन और मूल्यांकन और प्राप्य खातों का मूल्यांकन और वर्गीकरण करने से जुड़ी अकाउंटिंग नीतियाँ
  • मौजूदा ऋण देनदारियाँ और अन्य आकस्मिक प्रावधान
  • कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट
  • कंपनी के शेयरों का स्वामित्व और शेयरधारिता का पैटर्न 

निष्कर्ष

इस अध्याय में इतना ही इसके अगले अध्याय में हम कुछ ऐसे कारकों पर नज़र डालेंगे जो मूल्यांकन को प्रभावित करते हैं। ये कर लेने के बाद हम डिस्काउंटेड कैश फ्लो (DCF) पद्धति से अपना खुद का मूल्यांकन मॉडल बनाना सीखेंगे।

 अब तक आपने पढ़ा

  • एक निवेशक के रूप में, यह ज़रूरी है कि आप किसी भी कंपनी में निवेश करने का निर्णय लेने से पहले ड्यू डिलिजेंस का अभ्यास करें।
  • लीगल ड्यू डिलिजेंस में कंपनी के कानूनी पहलुओं की गहन परीक्षा करना शामिल है।
  • लीगल ड्यू डिलिजेंस में आपको उन कानूनों की जांच करने की आवश्यकता होती है जो इंडस्ट्री और कंपनी को नियंत्रित करते हैं।
  • आपको MOA और AOA और निदेशक मंडल द्वारा एनुअल जेनेरल मीटिंग में लिए गए निर्णय को भी देखने की ज़रूरत होती है।
  • मौजूदा और संभावित मुकदमों, बकाया कर भुगतान और अन्य कानूनी दायित्वों, कॉर्पोरेट प्रशासन नीतियों और प्रबंधन में महत्वपूर्ण परिवर्तनों की जाँच लीगल ड्यू डिलिजेंस के भाग के रूप में की जाती है।
  • अकाउंंटिंग ड्यू डिलिजेंस में आपको कंपनी में लागू अकाउंटिंग नीतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
  • अकाउंटिंग डिलिजेंस आपको कंपनी राजस्व और खर्चों को पहचानने के तरीके, और उनके स्वीकृत अकाउंटिंग स्टैंडर्ड के अनुरूप होने से जुड़ी बहुत सी जानकारी देता है।
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