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मौलिक विश्लेषण

8. बैलेंस शीट का विश्लेषण – प्रमुख रेशियो और उनकी गणना

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अब आप जानते हैं कि कंपनी की बैलेंस शीट को अच्छी तरह कैसे पढ़ा जाए। लेकिन उन सभी आंकड़ों का उद्देश्य क्या है? दरअसल, उनका उपयोग कई अहम रेशियो की गणना करने के लिए किया जा सकता है।  हम इस अध्याय में इन्हीं के बारे में पढ़ने वाले हैं।

आइए, हिंदुस्तान यूनिलीवर की बैलेंस शीट को लेते हैं और फाइनेंशियल रेशियो और आंकड़ों का उपयोग करके डाटा का पूरी तरह से विश्लेषण करें। यह विश्लेषण हमें कंपनी के प्रदर्शन और बाज़ार में उसकी स्थिति के बारे में कुछ अहम जानकारी देगा। 

आपके लिए, यहां वर्ष 2019-2020 की हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड की बैलेंस शीट की तस्वीर है। अब बिना किसी विलम्ब के आगे बढ़ते हैं, और बैलेंस शीट का विश्लेषण करते हैं।

महत्वपूर्ण वित्तीय आंकड़े, रेशियो और उनकी गणना

जैसा कि आप अब तक जानते हैं, बहुत सारे वित्तीय आंकड़े और गणनाएं हैं। हालांकि, उनमें से सभी एक निवेशक के रूप में आपके लिए उपयोगी नहीं हैं। इसलिए, हम केवल उन्हीं प्रमुख रेशियो और वित्तीय आंकड़ों को देख रहे हैं जो आपको बेहतर निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।

1. करेंट रेशियो

करेंट रेशियो एक तरलता रेशियो (लिक्विडिटी रेशियो) है जो एक कंपनी के अपने शॉर्ट टर्म या आमतौर पर एक वर्ष में चुकाए जाने वाले कर्ज़ और दायित्वों का भुगतान करने की क्षमता को मापता है। यह आपको बताता है कि क्या कंपनी के पास छोटी अवधि में बकाया राशि को चुकाने के लिए पर्याप्त करेंट/ तरल एसेट है। करेंट रेशियो का फ़ॉर्मूला  निम्नानुसार है:

करेंट रेशियो = करेंट एसेट ÷ करेंट लायाबिलिटी  

एचयूएल के लिए, करेंट एसेट की कुल राशि ₹11,908 करोड़ है, जबकि करेंट लायाबिलिटी की कुल राशि ₹9,104 करोड़ है।

एचयूएल की करेंट रेशियो (वर्ष 2019-2020 के लिए) = 1.30

(₹11,908 करोड़ ÷₹ 9,104 करोड़)

1 से अधिक करेंट रेशियो (जैसे इस मामले में) से संकेत मिलता है कि कंपनी के पास छोटी अवधि की देनदारियाँ चुकाने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं।

2. इक्विटी पर रिटर्न/ रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE)

फंडामेंटल एनालिसिस में सबसे व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली रेशियो में से एक, इक्विटी पर रिटर्न रेशियो सिर्फ अपने शेयरधारकों से मिले फंड का उपयोग करके कंपनी के मुनाफा कमाने की क्षमता का पता लगाने में मदद करता है। यह आपको शेयरधारकों द्वारा निवेश किए गए प्रत्येक सौ रुपये पर कंपनी को मिलने वाले रिटर्न के बारे में जानकारी देती है। 

ROE जितना ज़्यादा होगा, कंपनी शेयरधारकों के फंड का उपयोग कर मुनाफा कमाने में उतनी ही अधिक कुशल होगी। यह रेशियो प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है और नीचे दिए गए फ़ॉर्मूले का उपयोग करके इसकी गणना की जा सकती है।     

इक्विटी पर रिटर्न (ROE) (% में) = (PAT ÷ शेयरधारकों की इक्विटी) x 100 

आइए 2019-2020 के लिए हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के ROE पर एक नज़र डालते हैं।

एचयूएल का ROE (वर्ष 2019-2020 के लिए) (% में )= 83.90%

[(₹6,738 करोड़ ÷ ₹8,031 करोड़) x 100]

यहां, एचयूएल के शेयरधारकों की ₹8,031 करोड़ की इक्विटी में इक्विटी शेयर कैपिटल (₹216 करोड़ रुपये) और अन्य इक्विटी (₹7,815 करोड़), दोनों के मूल्य शामिल हैं।

83.90% का इक्विटी पर रिटर्न का मतलब है कि कंपनी ने शेयरधारकों द्वारा निवेश किए गए प्रत्येक सौ रुपये पर ₹83.90 बनाए हैं।

3. एसेट पर रिटर्न/ रिटर्न ऑन एसेट (ROA)

एसेट पर रिटर्न के रेशियो से यह पता चलता है कि एक कंपनी राजस्व अर्जित करने के लिए अपने एसेट का उपयोग करने में कितनी कुशल है। एसेट पर एक उच्च रिटर्न संकेत करता है कि एक कंपनी राजस्व अर्जित करने के लिए अपने एसेट का उपयोग करने में सक्षम है। इसे प्रतिशत में दर्शाया जाता है और इसकी गणना इस फ़ॉर्मूले के उपयोग करके की जाती है:

एसेट पर रिटर्न (ROA) (%में) = (नेट आय÷ कुल औसत एसेट) x 100 

जहां, 

कुल औसत एसेट= (करेंट वर्ष के कुल एसेट+ पिछले वर्ष की कुल एसेट) ÷ 2

यहां, एचयूएल के मामले में, कुल औसत एसेट = ₹18,733.5 करोड़ 

(₹19,602 करोड़ + ₹17,865 करोड़) ÷ 2

आपको P&L स्टेटमेंट में प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) के रूप में नेट आय मिलेगी। HUL के लिए, यह ₹6,738 करोड़ है (नीचे दी गई तस्वीर देखें)।

अब, वर्ष 2019-2020 के लिए  हिंदुस्तान यूनिलीवर के एसेट पर रिटर्न की गणना करने के लिए फ़ॉर्मूले को लगाते हैं।

HUL का ROA (वर्ष 2019-2020 के लिए) (% में) = 35.96%

(₹6,738 करोड़ ÷ ₹18,733.5 करोड़) x 100

4. नियोजित पूंजी पर रिटर्न/ रिटर्न ऑन कैपिटल इम्प्लॉइड  (ROCE)

निवेशकों द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक और बहुत लोकप्रिय लाभकारिता रेशियो है, नियोजित पूँजी पर रिटर्न। ये कंपनी की नियोजित पूँजी पर लाभकारिता का रेशियो बताती है। ROE के विपरीत, जहां केवल शेयरधारकों के फंड शामिल होते हैं, ROCE में कंपनी के कर्ज़ दायित्वों को भी शामिल किया जाता है।

नियोजित पूँजी पर रिटर्न  (ROCE) जितना अधिक होता है, कंपनी की लाभकारिता क्षमता उतनी ज्यादा रहती है। यह रेशियो प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है और नीचे दिए गए फ़ॉर्मूले के द्वारा निकला जा सकता है। 

नियोजित पूँजी पर रिटर्न (ROCE) (% में) = [EBIT ÷कुल नियोजित पूँजी] x 100

जहां, 

कुल नियोजित पूँजी = कुल एसेट- करेंट लायाबिलिटी 

5. डेट टू इक्विटी रेशियो

सबसे लोकप्रिय लेवरेज रेशियो में से एक, डेट टू इक्विटी रेशियो किसी कंपनी की इक्विटी के मुकाबले उसके कर्ज़ को आंकता है। 1 से अधिक डेट टू इक्विटी रेशियो का मतलब है कि किसी कंपनी के पास इक्विटी से अधिक कर्ज़ है, जबकि 1 से कम  रेशियो दर्शाता है कि इक्विटी का हिस्सा कर्ज़ से अधिक है। अगर डेट टू इक्विटी रेशियो 1 है तो के इसका मतलब है कि कंपनी में ऋण और इक्विटी बराबर हैं।

इस रेशियो की गणना इस तरह से कर सकते हैं:

डेेट टू इक्विटी रेशियो = कुल लायाबिलिटी ÷ कुल इक्विटी    

आप एक कंपनी की बैलेंस शीट में इन मूल्यों को देख सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए नीचे दी गई तस्वीर पर एक नज़र डालें।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड के लिए डेट टू इक्विटी रेशियो

एचयूएल (वर्ष 2019-2020 के लिए) के डेट टू इक्विटी रेशियो= 1.44

(₹11,571 करोड़  ÷ ₹31 8,031 करोड़)

6. डेट टू एसेट रेशियो

डेट टू इक्विटी रेशियो की तरह, यह रेशियो किसी कंपनी के एसेट के मुकाबले उसके ऋण को निर्धारित करती है। यह एक लेवरेज रेशियो है जो आपको एक कंपनी के उन एसेट्स का प्रतिशत बताती है जिन्हें ऋण के माध्यम से फंड किया गया है। डेट टू एसेट रेशियो जितना कम होगा, उतना बेहतर होगा।

इस रेशियो की गणना नीचे दिए फ़ॉर्मूले की मदद से की जाती है:

डेट टू एसेट रेशियो % = (कुल लायाबिलिटी ÷ कुल एसेट) x 100

इस फ़ॉर्मूले को HUL की बैलेंस शीट में उपलब्ध डाटा पर लागू करें, तो हम पाते हैं 

एचयूएल के डेट टू एसेट रेशियो (वर्ष 2019-2020 के लिए) (% में) = 59.02

[(₹11,571 करोड़ ÷ ₹19,602 करोड़) x 100]


59.02% के डेट टू एसेट रेशियो से पता चलता है कि HUL के स्वामित्व वाले 59.02% एसेट ऋण पूँजी द्वारा फंड किए गए है।

7. इक्विटी गुणक/ मल्टीप्लायर

डेट टू एसेट रेशियो का ही एक अलग रूप, इक्विटी मल्टिप्लायर उन एसेट की मात्रा निर्धारित करता है जो शेयरधारकों की इक्विटी द्वारा फंड किए गए हैं। इक्विटी मल्टिप्लायर जितना कम होगा, उतना बेहतर रहेगा। इसकी गणना नीचे दिए गए फ़ॉर्मूले का उपयोग करके की जा सकती है:

इक्विटी मल्टिप्लायर= कुल एसेट ÷ कुल इक्विटी

इस फ़ॉर्मूले के आधार पर, एचयूएल का इक्विटी मल्टिप्यालर इस प्रकार है:

एचयूएल का इक्विटी मल्टिप्लायर (वर्ष 2019-2020 के लिए) = 2.44

(₹19,602 करोड़ ÷ ₹8,031 करोड़)

इसका स्पष्ट मतलब है कि इक्विटी के प्रत्येक रुपये के लिए, एचयूएल के पास 2.44 रुपये के एसेट हैं।

8. फिक्स्ड एसेट टर्नओवर

फिक्स्ड एसेट टर्नओवर एक कंपनी की संचालन आय और इसकी फिक्स्ड एसेट के बीच संबंध स्थापित करता है। यह रेशियो कुशलता का एक संकेतक है और इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कोई कंपनी अपने फिक्स्ड एसेट जैसे प्लांट, उपकरण, मशीनरी और कैपिटल वर्क इन प्रॉग्रेस(CWIP) का उपयोग करके कितनी बिक्री करती है। फिक्स्ड एसेट का कारोबार जितना अधिक होगा, उतना ही बेहतर होगा। इस फ़ॉर्मूले का उपयोग करके फिक्स्ड एसेट टर्नओवर की गणना की जा सकती है:

फिक्स्ड एसेट टर्नओवर = बिक्री से मिली आय÷ फिक्स्ड एसेट

जहां,

फिक्स्ड एसेट = (प्रॉपर्टी / प्लांट/ उपकरण + कैपिटल वर्क- इन- प्रॉग्रेस (CWIP)+ गुडविल + अन्य अमूर्त एसेट)

एचयूएल के मामले में, फिक्स्ड एसेट टर्नओवर निम्नानुसार है:

फिक्स्ड एसेट = ₹5,569 करोड़ 

(₹4,625 करोड़ + ₹513 करोड़ + ₹36 करोड़ + ₹395 करोड़)

फिक्स्ड एसेट टर्नओवर = 6.87 

( ₹38,273 करोड़ ÷ ₹5,569 करोड़) 

9. वर्किंग कैपिटल टर्नओवर

जो फंड एक कंपनी को अपने रोज़मर्रा के संचालन के लिए चाहिए होते हैं, आमतौर पर उसे वर्किंग कैपिटल कहते हैं। वर्किंग कैपिटल टर्नओवर रेशियो से पता चलता है कि एक कंपनी वर्किंग कैपिटल के प्रत्येक रुपये के लिए कितना राजस्व कमाती है। ज्यादा वर्किंग कैपिटल टर्नओवर एक अच्छा संकेत है, क्योंकि इसका मतलब है कि एक कंपनी वर्किंग कैपिटल के प्रत्येक रुपए पर अधिक राजस्व उत्पन्न करती है। इसकी गणना के लिए नीचे दिया गया फ़ॉर्मूला इस्तेमाल किया जा सकता है।

वर्किंग कैपिटल टर्नओवर = ऑपरेटिंग राजस्व ÷ औसत वर्किंग कैपिटल

जहां, 

वर्किंग कैपिटल  = करेंट एसेट - करेंट लायाबिलिटी

औसत वर्किंग कैपिटल = (चालू वर्ष की वर्किंग कैपिटल + पिछले वर्ष की वर्किंग कैपिटल) ÷ 2

अब जब आप फ़ॉर्मूला जानते हैं, तो चलिए, HUL की कार्यशील पूँजी का पता लगाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं:

एचयूएल की वर्किंग कैपिटल (वर्ष 2019-2020 के लिए) =₹ 2,804 करोड़ 

(₹11,908 करोड़ - ₹9,104 करोड़)

एचयूएल की वर्किंग कैपिटल (वर्ष 2018-2019 के लिए) = ₹3,021 करोड़ 

(₹11,374 करोड़ - ₹8,353 करोड़)

एचयूएल की औसत वर्किंग कैपिटल = ₹2,912.5 करोड़ 

[(₹2,804 करोड़ + ₹3,021 करोड़) )÷ 2]

वर्किंग कैपिटल टर्नओवर = 13.32

(₹38,785 करोड़ ÷ ₹2,912.5 करोड़)

13.32 के वर्किंग कैपिटल टर्नओवर का मतलब है कि एचयूएल वर्किंग कैपिटल के प्रत्येक रुपये के लिए ₹13.32 राजस्व कमाती है।

10. इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो

इन्वेंट्री टर्नओवर रेशियो यह निर्धारित करता है कि किसी कंपनी ने कितनी बार तैयार माल को बेचा और इनवेंट्री को फिर से स्टॉक किया है।  इसकी गणना आमतौर पर एक निर्धारित समय अवधि के लिए की जाती है। इन्वेंट्री टर्नओवर रेशियो की गणना करने का फ़ॉर्मूला नीचे दिया गया है:

इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो = बेचे गए माल की लागत(COGS) ÷ औसत इनवेंट्री

इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो की गणना के लिए कुछ संस्थाएं COGS के बजाय बिक्री से अपने राजस्व का उपयोग कर सकती हैं। उस स्थिति में फ़ॉर्मूला हो जाता है:

इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो  =बिक्री से मिला राजस्व ÷औसत इनवेंट्री  

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड ने दूसरे फ़ॉर्मूले का इस्तेमाल किया है। तो, इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो की गणना इस तरह की गई है।

एचयूएल की औसत इनवेंट्री= ₹2,529 करोड़ 

[(₹2,636 करोड़ + ₹2,422 करोड़) ÷ 2]

एचयूएल का इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो= 15.13

(₹38,273 करोड़ ÷ ₹2,529 करोड़)

इससे पता चलता है कि एक वित्तीय वर्ष (2019-2020) में एचयूएल अपने तैयार माल के पूरे स्टॉक को लगभग 15 बार बेचने और इनवेंट्री को स्टॉक करने में कामयाब रहा है।

11. इनवेंट्री दिनों की संख्या/ इनवेंट्री नंबर ऑफ डेज़

इनवेंट्री नंबर ऑफ डेज़, एक कंपनी द्वारा अपनी इन्वेंट्री को बिक्री के ज़रिए नक़दी में बदलने के समय को निर्धारित करता है।  कम इनवेंट्री नंबर ऑफ डेज़ का मतलब है कि एक कंपनी अपने माल को नक़दी के लिए, जल्दी से बेचने में सक्षम है, जिसका प्रभावी रूप से मतलब है कि उसका माल डिमांड में है। आप इस फ़ॉर्मूले  का उपयोग करके इसकी गणना कर सकते हैं:

इनवेंट्री नंबर ऑफ डेज़ = 365 ÷ इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो 

एचयूएल के लिए इनवेंट्री नंबर ऑफ डेज़ इस प्रकार है:

एचयूएल के लिए इनवेंट्री नंबर ऑफ डेज़(वर्ष 2019-2020 के लिए) = 24.12 (365 ÷ 15.13)

इससे पता चलता है कि हिंदुस्तान यूनिलीवर को अपनी इन्वेंट्री को नक़दी में बदलने में लगभग 24 दिन लगते हैं।

12. प्राप्य खाता टर्नओवर/ अकाउंट्स रिसिवेबल टर्नओवर

अकाउंट्स रिसिवेबल टर्नओवर इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो के समान हैं। यह निर्धारित करता है कि कोई कंपनी कितनी बार अपने देनदारों से नक़दी इकट्ठा करती है। ज़्यादा अकाउंट्स रिसिवेबल टर्नओवर अच्छा संकेत है क्योंकि इसका मतलब है कि कंपनी अक्सर नक़दी वसूलती है। इस फ़ॉर्मूले का उपयोग करके इस रेशियो की गणना की जा सकती है:

अकाउंट्स रिसिवेबल टर्नओवर= बिक्री से मिला राजस्व ÷ औसत प्राप्य खाते

आइए एक नज़र डालते हैं कि मौजूदा वर्ष में एचयूएल ने कैसा प्रदर्शन किया है:

औसत प्राप्य अकाउंट = ₹1,359.5 करोड़ 

[(₹1,046 करोड़ + ₹1,673 करोड़) ÷ 2]

एचयूएल का औसत प्राप्य अकाउंट (वर्ष 2019-2020 के लिए) = 28.15

( ₹38,273 करोड़ ÷ ₹1,359.5 करोड़) 

यह  दर्शाता है है कि एचयूएल ने वर्ष 2019-2020 में लगभग 28 बार अपने देनदारों से नक़दी वसूली है।

13. औसत वसूली अवधि

औसत वसूली अवधि एक कंपनी द्वारा अपने देनदारों से नक़दी वसूलने  में लगने वाले समय को निर्धारित करती है। कम औसत वसूली अवधि एक अच्छा संकेत है क्योंकि इसका मतलब है कि कंपनी जल्दी से नक़दी वसूलने में सक्षम है। इस फ़ॉर्मूले का उपयोग करके इसकी गणना की जा सकती है:

औसत वसूली अवधि = 365 ÷ अकाउंट्स रिसिवेबल टर्नओवर

एचयूएल के लिए वर्ष 2019-2020 के लिए औसत वसूली अवधि 12.96 (365 ÷ 28.15) है। इससे पता चलता है कि कंपनी को अपने देनदारों से भुगतान वसूलने में लगभग 13 दिन लगते हैं।

निष्कर्ष

तो यहाँ कंपनी की बैलेंस शीट पर आधारित रेशियोज़ का ये अध्याय खत्म होता है। लेकिन ये सफर यहाँ समाप्त नहीं होता है, क्योंकि हमारे पास अभी कैश फ्लो स्टेटमेंट को समझना बाकी है। वह स्टेटमेंट क्या दर्शाता है? और उस स्टेटमेंट से जुड़े रेशियो क्या हैं? ये कुछ चीजें हैं जो स्मार्ट मनी के अगले अध्याय में सीखने को मिलेंगी। 

अब तक आपने पढ़ा 

  • करेंट रेशियो एक तरलता (लिक्विडिटी) रेशियो है जो एक कंपनी के छोटी अवधि ( जो आमतौर पर एक वर्ष होती है) के ऋण और देनदारी के भुगतान करने की क्षमता को मापता है।
  • करेंट रेशियो = करेंट एसेट ÷ करेंट लायाबिलिटी
  • फंडामेंटल एनालिसिस में सबसे व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले रेशियो में से एक, इक्विटी पर रिटर्न रेशियो आपको सिर्फ शेयरधारकों के फंड का उपयोग करके मुनाफा कमाने की कंपनी की क्षमता निर्धारित करने में मदद करता है। यह आपको शेयरधारकों द्वारा निवेश किए गए प्रत्येक सौ रुपये पर कंपनी के कमाए रिटर्न की जानकारी देती है। 
  • इक्विटी पर रिटर्न (ROE) (% में) = (PAT ÷ शेयरधारकों की इक्विटी) x 100
  • एसेट पर रिटर्न यह अनुमान लगाता है कि कोई कंपनी राजस्व अर्जित करने के लिए अपनी संपत्ति का उपयोग करने में कितनी कुशल है।
  • रिटर्न ऑन एसेट (ROA) (% में) = (कुल आय ÷ कुल औसत एसेट) x 100 
  • नियोजित पूँजी पर रिटर्न, कंपनी द्वारा नियोजित पूंजी पर कंपनी की लाभकारिता निर्धारित करता है। ROE के विपरीत, जहां केवल शेयरधारकों के फंड शामिल होते हैं, ROCE में कंपनी के ऋण दायित्वों को भी शामिल किया है।
  • नियोजित पूंजी पर रिटर्न (ROCE) (% में) = [EBIT ÷ नियोजित पूँजी] x 100
  • किसी कंपनी का डेट टू इक्विटी रेशियो उसकी इक्विटी के मुकाबले उसके ऋण के रेशियो को निर्धारित करता है। 1 से अधिक डेट टू इक्विटी रेशियो का मतलब है कि एक कंपनी के पास इक्विटी से अधिक ऋण है, जबकि 1 से कम रेशियो यह दर्शाता है कि इक्विटी का हिस्सा ऋण से अधिक है।
  • डेट टू इक्विटी = कुल लायाबिलिटी÷ कुल इक्विटी
  • डेट टू एसेट रेशियो (%में) = (कुल लायाबिलिटी÷ कुल इक्विटी) x 100
  • इक्विटी मल्टीप्लायर= कुल एसेट÷ कुल इक्विटी
  • फिक्स्ड एसेट टर्नओवर = बिक्री से राजस्व ÷ फिक्स्ड एसेट
  • वर्किंग कैपिटल टर्नओवर रेशियो से पता चलता है कि एक कंपनी वर्किंग कैपिटल के प्रत्येक रुपये के लिए कितना राजस्व कमाती है।
  • वर्किंग कैपिटल टर्नओवर = संचालन राजस्व ÷ औसत वर्किंग कैपिटल 
  • इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो = बेचे गए माल की लागत (COGS) ÷ औसत इनवेंट्री
  • इन्वेंट्री टर्नओवर रेशियो = बिक्री से राजस्व ÷ औसत इनवेंट्री
  • इनवेंट्री नंबर ऑफ डेज़= 365 ÷ इनवेंट्री टर्नओवर रेशियो
  • प्राप्य खाता टर्नओवर = बिक्री से राजस्व ÷ औसत प्राप्य अकाउंट 
  • औसत वसूली अवधि = 365 ÷ प्राप्य खाता टर्नओवर
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