6. एल्गोरिथम ट्रेडिंग: परिचय

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अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग में एक कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग किया जाता है जो किसी ट्रेड के लिए निर्धारित निर्देशों के सेट का पालन करता है। यह ट्रेड सिद्धांतिक तौर पर, इतनी तेज गति और फ्रिक्वेंसी पर मुनाफा कमा सकता है जो मानव व्यापारी के लिए असंभव है।

निर्देशों का यह परिभाषित सेट समय, कीमत, मात्रा या किसी गणितीय मॉडल पर आधारित होता हैं। व्यापारी के लिए लाभ के अवसरों के अलावा, एल्गो-ट्रेडिंग बाजार को अधिक तरल और व्यापार को ज्यादा व्यवस्थित बनाता है क्योंकि ये व्यापारिक गतिविधियों  से मानवीय भावनाओं के प्रभाव को हटा देता है।

एल्गोरिथम ट्रेडिंग का अभ्यास

मान लीजिए कि एक व्यापारी इस आसान से व्यापार मानदंड का पालन करता है:

एक स्टॉक के 50 शेयर खरीदें जब इसकी 50-दिवसीय मूविंग एवरेज 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से ऊपर जाए। स्टॉक के शेयर तब बेचें जब उसका 50-दिवसीय मूविंग एवरेज 200-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे चला जाए।

अब इन दो सरल निर्देशों का उपयोग करके, एक कंप्यूटर प्रोग्राम स्वचालित रूप से स्टॉक की कीमत की निगरानी करेगा और परिभाषित शर्तों को पूरा करने पर खरीद और बिक्री का ऑर्डर देगा। अब व्यापारियों को लाइव कीमतों और ग्राफ की निगरानी करने या मैन्युअल रूप से ऑर्डर करने की जरूरत नहीं है। एल्गोरिथम ट्रेडिंग सिस्टम, ट्रेडिंग अवसर की सही पहचान करके स्वचालित रूप से ऐसा करता है। 

एल्गोरिथम ट्रेडिंग रणनीतियाँ

एल्गोरिथम ट्रेडिंग की किसी भी रणनीति के लिए एक ऐसे अवसर की जरूरत होती है जो बेहतर आय या लागत कम करने में लाभदायक है। एल्गो-ट्रेडिंग में उपयोग की जाने वाली सामान्य व्यापारिक रणनीतियाँ निम्नलिखित हैं:

ट्रेंड-फॉलोइंग स्ट्रेटर्जी

सबसे आम एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग रणनीतियाँ मूविंग एवरेज, चैनल ब्रेकआउट, प्राइस लेवल मूवमेंट और संबंधित तकनीकी संकेतकों के ट्रेंड्स का पालन करती हैं। एल्गोरिथम ट्रेडिंग के माध्यम से लागू होने वाली यह सबसे आसान और सरल रणनीति हैं क्योंकि इन रणनीतियों में किसी भी तरह का अनुमान या मूल्य पूर्वानुमान लगाना शामिल नहीं है। ट्रेड को, पसंदीदा ट्रेंड के होने पर शुरू किया जाता है, जिन्हें भविष्यवाणियों के विश्लेषण की जटिलता के बिना ही एल्गोरिदम के जरिये लागू करना आसान और सरल है। 50- और 200-दिवसीय मूविंग एवरेज का उपयोग करना एक लोकप्रिय ट्रेंड-फॉलोइंग स्ट्रेटर्जी है।

आर्बिट्राज के अवसर

एक बाजार में कम कीमत पर डुयल लिस्टेड स्टॉक)को खरीदने और इसे दूसरे बाजार में उच्च कीमत पर बेचने से जो कीमतों का अंतर आता है  वह  रिस्क फ्री प्रॉफ़िट या आरबिट्राज कहलाता है। इसी प्रक्रिया को  स्टॉक बनाम फ्यूचर्स इंस्ट्रूमेंट के केस में भी उपयोग किया जा सकता है क्योंकि उनमें भी समय-समय पर मूल्य अंतर मौजूद होते हैं। ऐसे मूल्य अंतर की पहचान करने के लिए एक एल्गोरिथ्म को लागू करने और कुशलतापूर्वक ऑर्डर देने से कई लाभदायक अवसरों का फायदा उठाया जा सकता है।

इंडेक्स फंड रिबैलेंसिंग

इंडेक्स फंड को उनकी होल्डिंग को संबंधित बेंचमार्क सूचकांकों के बराबर लाने के लिए एक निर्धारित अवधि होती है। यह एल्गोरिदमिक ट्रेडर के लिए लाभदायक अवसर पैदा करता है, जो उन अपेक्षित ट्रेडों से मुनाफा कमाते हैं जो इंडेक्स फंड के रीबैलेंसिंग से ठीक पहले इंडेक्स फंड में शेयरों की संख्या के आधार पर 20 से 80 आधार अंक के मुनाफे की गुंजाईश रखते हैं। इस तरह के ट्रेड के समय पर निष्पादन और सर्वोत्तम मूल्यों के लिए इन्हें एल्गोरिथम ट्रेडिंग सिस्टम के माध्यम से शुरू किया जाता है। 

गणितीय मॉडल-आधारित रणनीतियाँ

डेल्टा-न्यूट्रल व्यापार रणनीति जैसे साबित हो चुके गणितीय मॉडल, ऑप्शन के संयोजन और अंतर्निहित सिक्योरिटी पर व्यापार करने की अनुमति देते हैं। (डेल्टा न्यूट्रल एक पोर्टफोलियो रणनीति है जिसमें पॉजिटिव और नेगेटिव डेल्टा ऑफसेट करने वाली कई पोजीशन शामिल होती हैं - यह एक एसेट, आमतौर पर मार्केटेबल सिक्योरिटी, की कीमत में बदलाव की तुलना इसके डेरिवेटिव की कीमत में बदलाव से करने वाली रेशियो है- ताकि सिक्योरिटी का समग्र रूप से डेल्टा का कुल 0 हो। 

ट्रेडिंग रेंज (मीन रिवर्जन)

मीन रिवर्जन रणनीति इस अवधारणा पर आधारित है कि किसी एसेट की उच्च और निम्न कीमतें एक अस्थायी घटना है जो समय-समय पर उनके मीन मूल्य (एवरेज वैल्यू) पर निर्भर करती है। किसी प्राइस रेंज को पहचान और परिभाषित कर और उसके आधार पर एक एल्गोरिथ्म को लागू करना, ट्रेड को तब स्वचालित रूप से ऑडर देने की अनुमति देता है जब किसी एसेट की कीमत इसकी निर्धारित सीमा से अंदर और बाहर निकलती है।

वॉल्यूम वेटेज एवरेज प्राइस (वीडब्ल्यूएपी)

वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य रणनीति एक बड़े आर्डर को कई भागों में तोड़ती है और स्टॉक-विशिष्ट ऐतिहासिक वॉल्यूम प्रोफाइल का उपयोग करके बाजार में ऑर्डर के छोटे-छोटे निर्धारित भाग जारी करती है। इसका उद्देश्य वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य  के करीब ऑर्डर को निष्पादित करना है।

टाइम वेटेज एवरेज प्राइस (टीडब्लयूएपी)

टाइम वेटेड औसत मूल्य रणनीति एक बड़े आर्डर को कई भागों में तोड़ती है और शुरुआती और अंतिम टाइम समय के बीच समान रूप से विभाजित टाइम स्लॉट का उपयोग करके बाजार में ऑर्डर के छोटे-छोटे निर्धारित भाग जारी करती है। इसका उद्देश्य शुरूआती और अंतिम के समय के बीच औसत मूल्य के करीब ऑर्डर को निष्पादित करना है जिससे बाजार प्रभाव कम से कम हो।

 वॉल्यूम का प्रतिशत (पीओवी)

जब तक ट्रेड ऑर्डर पूरा नहीं होता, तब तक यह एल्गोरिथ्म परिभाषित भागीदारी रेशियो के अनुसार और बाजारों में कारोबार किए गए वॉल्यूम के अनुसार आंशिक ऑर्डर भेजना जारी रखता है। संबंधित “स्टेप्स स्ट्रेटर्जी’ उपयोगकर्ता के बाजार के संस्करणों के परिभाषित प्रतिशत पर आर्डर भेजती है और जब स्टॉक मूल्य उपयोगकर्ता द्वारा परिभाषित स्तरों पर पहुंचता है तो, इस भागीदारी दर को बढ़ाता या घटाता है।

इम्प्लिमेंटेशन शॉर्टफॉल

इम्प्लिमेंटेशन शॉर्टफॉल स्ट्रेटर्जी का उद्देश्य वास्तविक समय के बाजार में ट्रेड ऑफ करके ऑर्डर की निष्पादन लागत को कम करना है, जिससे ऑर्डर की लागत को बचाया जा सके और विलंबित निष्पादन की अवसर लागत से लाभ मिल सके। रणनीति लक्षित भागीदारी दर को बढ़ाएगी जब स्टॉक की कीमत अनुकूल रूप से बढ़ जाती है और जब स्टॉक की कीमत प्रतिकूल रूप से चलती है तो इसे कम कर देती है।

सामान्य ट्रेडिंग एल्गोरिदम से परे

एल्गोरिदम के कुछ विशेष वर्ग हैं जो अन्य "घटनाओं" की पहचान करने का प्रयास करते हैं। इन्हे "स्निफिंग एल्गोरिदम" कहा जाता है - उदाहरण के लिए, एक सेल-साइड मार्केट मेकर में एक बड़े ऑर्डर के बाय-साइड के किसी भी एल्गोरिदम के होने की पहचान करने की अंतर्निहित बुद्धिमता होती है। एल्गोरिदम के जरिये इस तरह की पहचान बाजार निर्माता को बड़े ऑर्डर के अवसरों की पहचान करने और उच्च कीमत पर ऑर्डर भरने से उन्हें फायदा पहुंचने में मदद करेगी। इसे कभी-कभी हाई-टेक फ्रंट-रनिंग के रूप में पहचाना जाता है।

एल्गोरिथम ट्रेडिंग के लिए तकनीकी आवश्यकताएं

कंप्यूटर प्रोग्राम का उपयोग करके एल्गोरिथ्म को लागू करना एल्गोरिथम ट्रेडिंग का अंतिम घटक है जिसमें बैकटेकिंग (पिछले स्टॉक-मार्केट प्रदर्शन की ऐतिहासिक अवधियों पर एल्गोरिदम को आज़माकर देखना कि क्या इसका उपयोग करना लाभदायक होगा) भी शामिल है। चुनौती ये है कि चुनी गई रणनीति को एक एकीकृत कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया में बदलना होता है, जिसमें ऑर्डर देने के लिए ट्रेडिंग खाते का एक्सेस हो। एल्गोरिथम ट्रेडिंग के लिए निम्नलिखित आवश्यकताएं हैं:

  • कंप्यूटर-प्रोग्रामिंग का ज्ञान  ताकि आवश्यक ट्रेडिंग रणनीति को प्रोग्राम करने वाले प्रोग्रामर या पूर्व-निर्मित ट्रेडिंग सॉफ्टवेयर नियुक्त किया जा सके।
  • ऑर्डर देने के लिए नेटवर्क कनेक्टिविटी और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच।
  • मार्केट डाटा फीड तक पहुंच जिनकी निगरानी एल्गोरिदम द्वारा ऑर्डर देने के अवसरों को पहचाने के लिए की जाएगी।
  • वास्तविक बाजारों पर लाइव होने से पहले सिस्टम के बुनियादी ढाँचे को एक बार टेस्ट करने की क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर।
  • बैकटेस्टिंग के लिए, एल्गोरिथम में लागू नियमों की जटिलता के आधार पर ऐतिहासिक डाटा की उपलब्ध्ता।

एल्गोरिथम ट्रेडिंग के लाभ

  1. बाजार के प्रभाव को कम करना

एक बड़ा ट्रेड संभावित रूप से बाजार मूल्य को बदल सकता है। इस तरह के ट्रेड को एक विकृति व्यापार या डिस्टॉर्शनरी ट्रेड के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह बाजार मूल्य को बिगाड़ता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए, व्यापारी आमतौर पर बड़े पोजीशन लेते हैं जो बाजार में, चरणों में हलचल ला सकते हैं। 

एक ट्रेडिंग एल्गोरिदम इस परेशानी को शेयरों को खरीदकर और तुरंत यह जाँच करके कम कर सकता है कि क्या खरीद का बाजार मूल्य पर कोई प्रभाव पड़ा है या नहीं। यह ट्रेड को पूरा करने के लिए आवश्यक लेनदेन की संख्या और व्यापार को पूरा करने में लगने वाले समय को भी कम कर सकता है।

  1. नियम आधारित निर्णय लेने को सुनिश्चित करता है

व्यापारी और निवेशक अक्सर भावुकता और भावना में बह जाते हैं और उन बातों और न्यूज़ को मानने से मना कर देते हैं जो उनकी व्यापारिक रणनीतियों से मेल नहीं खाती है या उनकी उपेक्षा करती हैं। उदाहरण के लिए हम 2008 में हुए ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस को लेते हैं, उस समय वित्तीय बाजारों ने यह स्पष्ट संकेत दिये थे कि एक बहुत बड़ा वित्तीय संकट आने वाला है। हालांकि, बहुत से निवेशकों ने इन संकेतों को नजरअंदाज कर दिया क्योंकि वे 2000 के दशक के बीच के "बुल मार्केट उन्माद" में फंस गए थे और वह यह मानने के लिए तैयार ही नहीं थे कि ऐसा कोई संकट आ भी सकता है। एल्गोरिदम इस समस्या को यह सुनिश्चित करके हल करता है कि सभी ट्रेड नियमों के पूर्व निर्धारित सेट का पालन करें।

निष्कर्ष

अब जब हम अल्गोरिदमिक ट्रेडिंग की बारीकियों को समझते हैं, तो आइए अगले अध्याय में एलगोरिदमिक ट्रेडिंग के अभ्यास को सीखें।

अब तक आपने पढ़ा

  • एल्गोरिदम ट्रेडिंग ट्रेडों को निष्पादित करने के लिए रणनीतियों को नियोजित करने के लिए प्रक्रिया- और नियम-आधारित एल्गोरिदम का उपयोग है।
  • इसकी लोकप्रियता 1980 के दशक से काफी बढ़ी है और संस्थागत निवेशकों और बड़ी व्यापारिक फर्मों द्वारा विभिन्न उद्देश्यों के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • हालांकि यह तेजी से निष्पादन समय और कम लागत जैसे लाभ प्रदान करता है, एल्गोरिदम ट्रेडिंग फ्लैश क्रैश और तरलता के तत्काल नुकसान का कारण बनकर बाजार की नकारात्मक प्रवृत्तियों को तेज कर सकता है।
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