भारत में फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के लिए एंडगेम क्या है?

24 May, 2021

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कोविड महामारी की शुरुआत के बावजूद टीकाकरण पूरे ज़ोर पर होने के बीच, भारतीय शेयर बाजार कोविड 2.0 के मामले में रुख सुकून वाला है।

हालांकि, भारत में पहले लॉकडाउन की घोषणा के बाद से ही फार्मास्युटिकल क्षेत्र एक साल से भी कम समय में दोगुना हो गया है। इसके अलावा, कुछ फार्मास्युटिकल शेयरों में इतनी तेज़ी आई है कि इसका कोई अंत नहीं दिख रहा है। दुनिया भर में, कुछ फार्मा शेयरों ने तिहरे अंकों वाले प्रतिशत में वृद्धि दर्ज की है, और कई अन्य हर दूसरे सप्ताह पिछले रिकॉर्ड उच्च स्तर ऊपर के स्तर पर पहुँच रहे हैं। तो भारत में फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के लिए एंडगेम क्या है? और इससे भी महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या कोई एन्डगेम है भी ?

2020 में तेज़ी के पीछे की कहानी

भारत के कई फार्मा स्टॉक ने 2020 में 70 प्रतिशत से अधिक का लाभ दर्ज किया, और दिसंबर 2020 में पहली बार ऐसा हुआ कि निफ्टी फार्मा ने मुनाफे के मामले में निफ्टी 50 सूचकांक को पीछे छोड़ दिया। दरअसल, निफ्टी फार्मा ने 4 गुना वृद्धि दर्ज़ की और चौथी तिमाही के आखिर तक करीब 55 प्रतिशत पर पहुंच गया। फार्मा शेयरों में तेज़ी में जहाँ व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों की मांग, कोविड संबंधी स्वास्थ्य देखभाल और हॉस्पिटल में भर्ती रोगी की देखभाल की सबसे बड़ी भूमिका रही वहीं स्टॉक मार्केट भी वैक्सीन की खोज और उस तेज़ी पर दांव लगा रहा था जो अन्य क्रिटिकल हेल्थकेयर प्रोसीज़र की मांग से आनी थी जो मरीज़ महीनों से टाल रहे थे। साथ ही फार्मा और टेक्नोलॉजी के बीच की कम होती दूरी ने दवाओं की खोज में तेज़ी लाई है, काम करने का नया नज़रिया आया है और यहां तक कि परिचालन दक्षता काफी बढ़ी है - इस सबसे 2020 में तेज़ी आई है। तो इस बार तेज़ी की क्या वजह रही है?

साल 2021 में अब तक

दुनिया भर में जेनेरिक दवाओं और मेडिकल उपकरणों की बढ़ती मांग से भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में तेज़ी आई - भारत कम कीमत पर इनकी डिलीवरी करने में सक्षम है। तेज़ी के आंकड़ों में इन मार्जिन का प्रमुख योगदान है। टीके के अर्थशास्त्र का इंडस्ट्री में विकास के बहुत कम योगदान है, लेकिन अन्य सामने न दिखने वाले फैक्टर ने 2021 की तेज़ी को प्रभावित किया है। इसके अलावा, रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर भारी-भरकम निवेश जिससे नई दवा की खोज को बल मिलता है, वह भी भारत की शीर्ष फार्मा कंपनियों में जारी हैं, और इस तरह यह सफलता की राह पर है। 

हालांकि, स्पष्ट रूप से ऐसे कुछ फैक्टर हैं जिनसे इस रुझान को को खतरा है। ईटी और आईबीएम के बीच हाल ही में हुई एक राउंडटेबल बैठक में भारत में तेजी से टीकाकरण की आवश्यकता पर ज़ोर डाला गया ताकि उस बरकरार रखा जा सके जो आखिरकार संक्रमण के जोखिम को कम करते हुए और वर्कफ़ोर्स की काम पर वापसी सुनिश्चित कर इकॉनमी को सुधार की दिशा में लाने में भूमिका अदा करेगा। इसके अलावा, एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्रेडिएंट की मैन्युफैक्चरिंग के बदतर हालात और टीके के उत्पादन की दर के मद्देनज़र विश्लेषक मैक्रो वेरिएबल के बारे में चिंतित हैं जिन्होंने महामारी की शुरुआत के बाद से फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री को गति दी जो महामारी की शुरुआत से ही तेज़ वृद्धि की फ़िराक में थी। 

आगे क्या होगा: क्या विकास के आंकड़े महामारी के बाद भी बने रहेंगे?

ईवाय की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत के फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री में ऐसे फैक्टर की वजह से भारी वृद्धि हुई है जो पूरी तरह से महामारी और महामारी की रोकथाम से जुड़े नहीं हैं। दरअसल यदि निफ्टी फार्मास्युटिकल इंडेक्स को बेंचमार्क के रूप में लिया जाता है, तो लॉकडाउन की घोषणा के ठीक बाद इंडस्ट्री ने 30 प्रतिशत से अधिक का गोता खाया था। बड़ी-बड़ी कंसल्टेंसी में मौजूद इंडस्ट्री के जानकारों ने सुझाव दिया है कि फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री अपने पिछले रिकॉर्ड से बेहतर प्रदर्शन इसलिए कर सकी कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट से लेकर लॉजिस्टिक्स, क्लिनिकल ट्रायल और ड्रग की खोज तक विभिन्न किस्म की फार्मास्युटिकल प्रोसेस में आधुनिकतम टेक्नोलॉजी को शामिल करती रही। 

महामारी की शुरुआत से ही फार्मास्युटिकल कंपनियों को सलाह दी गई है कि वे ऐसी टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट करें वे टचलेस मैन्युफैक्चरिंग कर सकें और अपनी लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की प्रक्रिया को मजबूत कर सकें।
इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स टेक्नोलॉजी का उपयोग, क्लाउड कंप्यूटिंग पर अमल करना शामिल है ताकि बिज़नेस ऑपरेशन से कभी भी, कहीं से भी जुड़ा जा सके, और अलग-अलग काम दूर से किया जा सके और जुड़ा जा सके। 

अब तक जिन कंपनियों ने ये इन्वेस्टमेंट किए हैं, वे भारत से बाहर रिकॉर्ड तेज़ी दर्ज़ कर रहे हैं। भारत में पूर्ण डिजिटलीकरण अभी दूर की कौड़ी है लेकिन अनुमान है कि इंडस्ट्री की वृद्धि 2021 और 2030 के बीच 12 प्रतिशत सीएजीआर की दर से होगी - और यह आने वाले समय में फार्मा क्षेत्र सकारात्मक नज़रिया पेश करता है। हालांकि संभव है कि वृद्धि के आंकड़े उतने अग्रेसिव नहीं होंगे जितने 2020 में रहे, लेकिन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के एंडगेम में इस दशक में मध्यम से अधिक वृद्धि के आसार अधिक हैं। 

पीछे मुड़कर देखें तो

यदि इस सदी की शुरुआत से - यानी 2000 से इंडस्ट्री के प्रदर्शन का विश्लेषण किया जाए तो इसमें आश्चर्यजनक रूप से 1000 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है, जिसका मतलब है कि यह अपने आकार के मुकाबले 10 गुनी हो गई है। ऐसा अमेरिका में 40 प्रतिशत से अधिक जेनेरिक दवा, ब्रिटेन में 25 प्रतिशत प्रेस्क्रिप्शन दवा और दुनिया भर में गैर-कोविड वैक्सीन की 60 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका के कारण संभव हुआ। 

जो इंडस्ट्री में निवेश करना चाह रहे हैं उनके लिए महत्वपूर्ण सवाल होगा - कि पूरी इंडस्ट्री पर दांव लगाया जाए या उन कंपनी पर जो एक बड़े आर्थिक संकट के समय में अग्रणी बनकर उभरी हैं। हालांकि जवाब इन्वेस्टर के प्रोफ़ाइल और उसकी जोखिम झेल पाने की ताकत पर निर्भर करेगा लेकिन पिछले कुछ साल में विकास के संकेतक के रूप में उभरे कुछ जो रणनीतिक उपाय हैं उनमें रिसर्च और खोज को तेज करने और सप्लाय चेन मजबूत करने में किया गया निवेश शामिल है ताकि लचीलेपन और जोखिम के लिए तैयार रहा जा सके। इनके अलावा महामारी के बाद की स्थितियों में लीडरशिप की स्थिति जब मज़बूत होगी तो इन्वेस्टमेंट के फैसलों में मजबूत ट्रैक रिकॉर्ड निश्चित रूप से योगदान होगा।

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