एलआईसी आईपीओ का गेम प्लान

05 Mar, 2021

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भारतीय शेयर बाजार में हाल में आईपीओ ने खुदरा और संस्थागत निवेशकों को कुछ ज़्यादा ही आकर्षित किया है।

पिछले साल, महामारी के कारण सेंसेक्स के 34 प्रतिशत से अधिक अंक लुढ़कने के बाद बेहतरीन सुधार की शुरुआत हुई और कई नई कंपनियों के आईपीओ आये। भारत में जो कुछ सबसे बड़े आईपीओ आये हैं उनमें डीएलएफ, रिलायंस पावर, केयर्न इंडिया और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस शामिल हैं। लेकिन ऐसा किसी ने भी नहीं देखा है कि जो 2021 में शेयर बाजार में होने वाला है - और यह है सरकार की अपनी कुछ होल्डिंग के व्यवस्थित विनिवेश की योजना के तहत भारतीय जीवन बीमा निगम का शेयर बाज़ार में उतरना । 

कुछ विशेषज्ञ इस आईपीओ को भारतीय शेयर बाजारों में आब तक आये आईपीओ की मां कह रहे हैं, जबकि दूसरे इसे मेगा लिस्टिंग का नाम दे रहे हैं - कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इसे क्या कहते हैं, लिस्टिंग की प्रक्रिया को बाधारहित बनाने के लिए विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं। साथ ही निष्पक्षता लाने और उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए कुछ नए नियम बनाए जा रहे हैं। बाज़ार जब तक इस बड़ी घटना के लिए तैयार हो रहा है तब तक आइये कुछ मुख्य बातों और बिंदुओं पर बात करते हैं जिन्हें आपको ध्यान में रखना होगा। 

भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एलआईसी जैसी भारी-भरकम विशाल पूंजीकरण वाली कंपनी को समायोजित करने के लिए लिस्टिंग के नियमों में कुछ बदलाव किए हैं। मूल रूप से, सेबी ने कहा है कि आईपीओ जारी करने वाली कंपनी को अब 10,000 करोड़ रूपये और 1,00, 000 करोड़ रूपये से अधिक की राशि पर 5 प्रतिशत की पेशकश करनी होगी। तो इस निर्देश के अनुसार आईपीओ का आकार क्या होगा? चलिए पता करते हैं। 

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, एलआईसी का मूल्यांकन 8-15 लाख करोड़ रुपये के बीच है। हालाँकि ज़्यादातर लोग अभी अनुमान लगाने में व्यस्त हैं, लेकिन फिर भी हम इस पेशकश के पैमाने को समझने के लिए मोटा सा अंदाज़ा लगा सकते हैं। यदि बाजार मूल्यांकन 8,00,000 करोड़ रुपये है, तो एलआईसी की पेशकश का आकार 45,000 करोड़ रुपये का होगा। लेकिन यदि इससे ऊपर वाला आंकड़ा अधिक सटीक है, तो ऑफ़र का आकार 80,000 करोड़ रूपये होगा। जैसा कि आप देख सकते हैं, यह आईपीओ अब तक आये सारे आईपीओ को पीछे छोड़ देगा, और यह इस साल का और आने वाले कई साल का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। दरअसल कुछ विशेषज्ञों ने यहां तक कहा है कि इस आकार का आईपीओ भारी मात्रा में अर्थव्यवस्था से नकदी सोखेगा। 

हमने इशू का आकार पर नज़र डाल ली, लेकिन इशू आएगा कब और किन श्रेणियों में कितनी पेशकश की जाएगी? वित्त मंत्री ने बजट घोषणा में संकेत दिया था कि आईपीओ निश्चित रूप से वित्त वर्ष 2021-22 में आएगा। लेकिन डिपार्टमेंट ऑफ़ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (डीआईपीएएम) ने संकेत दिया है कि आईपीओ इस साल की तीसरी तिमाही के आसपास आएगा - इसका मतलब है अक्टूबर 2021 के आसपास। ठीक है कि बहुत समय नहीं बचा है। तो फिर श्रेणियों के अनुसार इशू के आकार की समीक्षा करते हैं। 

इस आईपीओ में एक और दिलचस्प प्रावधान है कि एलआईसी के कुल इशू के 10 प्रतिशत हिस्से के हकदार होंगे। इसलिए यदि इशू का आकार 55,000 करोड़ के आसपास है, तो इस प्रावधान के तहत एलआईसी के पॉलिसीधारक कुल इशू के 5,500 करोड़ रूपये के शेयर के हकदार होंगे। इस प्रक्रिया में, कई नए डीमैट खाते खुलने की संभावना है - क्योंकि इस इशू को खरीदने के लिए पॉलिसीधारकों के पास डीमैट खाता होना चाहिए। फिलहाल भारत में लगभग 4.5 करोड़ डीमैट खाते हैं - इस साल के आखिर तक, अकेले एलआईसी के इशू में एक करोड़ अतिरिक्त डीमैट खातों खुलने की उम्मीद है। 

अब आखिरी और सबसे बड़ा सवाल आता है - क्या आपको आईपीओ सब्सक्राइब करना चाहिए? हालांकि निर्णायक फैसले के लिए बहुत जल्दी है - क्योंकि बाजार की स्थिति हमेशा समय के साथ बदलती और विकसित होती रहती है, हाँ, कुछ टिप्पणी ज़रूर की जा सकती है। हाल के दिनों में, दो साधारण बीमा निगम (जनरल इंश्योरेंस कंपनियां) बाज़ार में आये - जीआईसी रे और एनआईए कंपनी लिमिटेड। ये दोनों ऑफर ग्राहकों के लिए निराशाजनक रहे। एनआईए के शेयर 770-800 रूपये के मूल्य दायरे में पेश किये गए थे, लेकिन फिलहाल इस लेख के लिखे जाने के समय तक 159 रूपये पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, जीआईसी रे के शेयर 912 रूपये पर पेश किये गए थे, लेकिन फिलहाल (यह लेख लिखने के समय तक) 197 रुपये पर कारोबार कर रहा है।
लेकिन ऐसे शेयरधारक जिन्होंने आईपीओ जारी होने के बाद एक निश्चित समयसीमा तक अपना निवेश बनाए रखा, उन्हें बोनस शेयर जारी किये जाने से उतना नुकसान होता नहीं दीखता जितना इन आंकड़ों से लग सकता है - या ऐसा दीखता है? यहां तक कि यदि आपने भी एनआईए का आईपीओ सब्सक्राइब किया होगा तो आपने यह 770 रुपये प्रति शेयर में खरीदा होगा, जबकि फिलहाल इसकी कीमत 318 रूपये है उसी तरह बोनस शेयर जारी होने के कारण। लेकिन अभी भी 58 प्रतिशत से अधिक का भारी-भरकम नुकसान है। दूसरी तरफ, जीआईसी के निवेशकों को 56 प्रतिशत का नुकसान हुआ। 

हालाँकि, एलआईसी से अधिकांश लोगों को कुछ अलग तरह की उम्मीद है, बस एलआईसी के विशाल आकार और बाजार पूंजीकरण के कारण। दरअसल कुछ लोगों का कहना है कि एलआईसी के कार्यबल की उत्पादकता में मामूली वृद्धि से भी कंपनी की वृद्धि और आय में भारी बढ़ोतरी होगी। एलआईसी में फिलहाल 22 लाख एजेंट हैं - और यदि हर एजेंट हर साल एक अतिरिक्त पॉलिसी बेचता है तो कंपनी की बिक्री में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। हमारा सुझाव है कि सब्सक्राइब करने न करने के फैसले के लिए टेक्निकल दृष्टिकोण अपनाएँ। निवेश के बेहतरीन विकल्पों पर और जानकारी की तलाश में हैं? तो हमारी वेबसाइट www.angelbroking.com पर लॉग इन करें,और जानकारी हासिल करते रहें!

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