क्रिप्टो, भारी उतार-चढ़ाव का फंदा, फोमो, और सारा आसमां

08 Jun, 2021

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इंटरनेट के प्रसार और दुनिया भर के समाचारों तक पहुंच ने लोगों के पैसे इन्वेस्ट करने की संभावना के लिहाज़ से गेम-चेंजर की भूमिका निभाई है।

भूमिका -

भारत में सोना, पारंपरिक रूप से सबसे लोकप्रिय इन्वेस्टमेंट रहा है और यहाँ घरों में सामूहिक रूप से जमा 25,000 टन सोने का सबसे बड़ा निजी स्टॉक है। हालांकि इन्वेस्टमेंट के तौर पर इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि यह नई संपत्ति का सृजन है और इसे सुरक्षित रखने के लिए पैसे खर्च होते हैं। भारतीय शेयर बाजार आज इन्वेस्टमेंट और ट्रेड के लिए लोकप्रिय स्थान हैं और ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा के कारण इन्वेस्टर और ट्रेडर दोनों के लिए इन बाज़ारों में ट्रेड करना आसान हो गया है। हालांकि यह महत्वपूर्ण है कि ये एकमात्र तरीके नहीं हैं जिनसे लोग अपने फंड को इन्वेस्ट या ट्रेड कर सकते हैं।

क्रिप्टोकरेंसी क्या है?

टेक्कीनोलॉजी की दुनिया हुई तरक्की और साथ ही स्मार्ट डिवाइस और नॉलेज दोनों की पहुंच ने आज क्रिप्टोकरेंसी को बेहद लोकप्रिय बना दिया है। क्रिप्टोकरेंसी को ऐसे समझें कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध वर्चुअल करेंसी है और जिसकी सुरक्षा क्रिप्टोग्राफी के ज़रिये होती है। सीक्योरिटी की इस परत से इस करेंसी को फोर्ज या डबल स्पेंड करना एकदम असंभव है। इसकी बनावट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई क्रिप्टोकरेंसी को ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के ज़रिये बनाया गया है जिससे बगैर एडिट किये सारी जानकारी रिकॉर्ड करने और जारी करने में मदद मिलती है। सीधे शब्दों में कहें तो यह टेक्नोलॉजी विभिन्न किस्म के एन्क्रिप्शन के ज़रिये करेंसी पर नियंत्रण रखती है। किसी भी फंड ट्रांसफर को वेरीफाय करने के लिए एन्क्रिप्शन तकनीक का अलग से उपयोग किया जाता है। ब्लॉकचेन से अंततः यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि हर लेन-देन ईमानदारी होता है। क्रिप्टोकरेंसी जो चीज़ सबसे अलग बनाती है, वह यह है कि इसका उपयोग सेंट्रल अथॉरिटी नहीं करती है। इसकी प्रासंगिकता यह है कि करेंसी के रूप में यह सरकार के किसी भी हस्तक्षेप या फेर-बदल के मामले में यह तकनीकी रूप से इम्यून है।

फिलहाल बाजार में कुछ सबसे प्रभावी क्रिप्टोकरेंसी में इथेरियम (ईटीएच), लिटकॉइन (एलटीसी), पोल्काडॉट (डॉट) और बिटकॉइन (बीसीएच) शामिल हैं, लेकिन ये यहीं तक सीमित नहीं हैं।

क्रिप्टोकरेंसी में इतना उतार-चढ़ाव क्यों होता है?

क्रिप्टोकरेंसी पहले दिन से ही भारी उतार-चढ़ाव के लिए जानी जाती है। इन्वेस्टर ने उछाल के दौरान बहुत पैसा कमाया है और जब बाज़ार टूटा तो उन्हें भारी नुकसान भी हुआ है। क्रिप्टोकरेंसी के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की वजह की जांच नीचे की गई है।

सट्टेबाजी की ताक़त - क्रिप्टोकरेंसी का उतर-चढ़ाव काफी हद तक इन्वेस्टर और ट्रेडर के सट्टे की प्रकृति से जुड़ा है जिनमें से कुछ बाज़ार में उछाल के साथ भारी मुनाफ़ा दर्ज़ करने की संभावना से सम्मोहित हैं। बड़े पैमाने पर सट्टे पर आधारित दांव लगाने से उतार-चढ़ाव वाले बाज़ार को और अस्थिर बनाते हैं।

ट्रेडर की जानकारी – शेयर बाजार और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट के उलट, क्रिप्टोकरेंसी डोमेन में इन्वेस्ट करने के लिए बहुत जानकारी जुटाने की ज़रुरत नहीं होती है। इन्वेस्टर के पास सिर्फ इंटरनेट और थोड़े से पैसे होने चाहिए। यही इस बाजार को कम कम या बगैर किसी अनुभव वाले ट्रेडर के लिए इतना आकर्षक बनाता है। इंस्टीच्यूशनलाइज्ड ट्रेडिंग मार्केट में शामिल लोग क्रिप्टोकरेंसी बाजार से बहुत सावधान और सतर्क रहते हैं और इसमें निवेश को जोखिम के तौर पर में देखते हैं। इसलिए इस डोमेन में औसत इन्वेस्टर को क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में की बारीकियों के बारे में कम जानकारी होती है। वे प्रचार, अनिश्चितता, संदेह, डर और ज़बरदस्त हेराफेरी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इस डोमेन के औसत ट्रेडर के विपरीत परिस्थितियों में शांत बने रहने की संभावना कम होती है जबकि अनुभवी ट्रेडर का खुद पर पूरा नियंत्रण होता है।

भरोसे पर निर्भर - क्रिप्टोकरेंसी की डिजिटल प्रकृति का मतलब है कि इसका कोई फिजिकल स्वरूप नहीं है। इसके बजाय, इसकी कीमत पूरी तरह से मांग और आपूर्ति पर निर्भर है। अधिकांश क्रिप्टोकरेंसी की आपूर्ति पूर्व निर्धारित या अनुमानित होती है, इसलिए उनकी कीमतें इस बात से नियंत्रित होती हैं कि उनमें कितनी दिलचस्पी रही है और कितने लोग करेंसी खरीदना चाहते हैं। नतीजतन,करेंसी की कीमत उस भरोसे पर निर्भर है जो लोग उसमें जताते हैं। ऐसे में लोगों का इस पर से भरोसा उठ जाता है और वे अपनी करेंसी बेचने का मन बना सकते हैं जिससे इसकी कीमत लुढ़क सकती है।

बेहद कम मार्केट ऑपरेशन - क्रिप्टोकरेंसी अब तक इन्वेस्टर और ट्रेडर की प्राथमिकता और दिलचस्पी नहीं बनी हैं। हाल ही में क्रिप्टोकरेंसी का बाजार दो ट्रिलियन डॉलर से अधिक का हो गया, यह अभी भी वैल्यूएशन के लिहाज़ से सोने के बाजार से पीछे है। सोने का बाज़ार कुल 7.9 ट्रिलियन डॉलर का है और अमेरिकी बाज़ार इसका 14 गुना है जिसकी वैल्यूएशन 28 ट्रिलियन डॉलर है। अपेक्षाकृत छोटे उभरते बाजार के रूप में, छोटी इकाइयों में क्रिप्टोकरेंसी की कीमत पर असर डालने की क्षमता अधिक होती है।

टेक्नोलॉजी के उपयोग को परफेक्शन दिया जा रहा है - विभिन्न किस्म की क्रिप्टोकरेंसी की मदद के लिए उपयोग की जाने वाली ब्लॉकचेन और इससे जुड़ी टेक्नोलॉजी में अभी परफेक्शन लाया जा रहा है। समस्या ब्लॉकचेन की स्केलेबिलिटी से लेकर नेटवर्क कंजेशन और लेन-देन की बढ़ती लागत तक है।  कहा जा रहा है कि टेक्नोलॉजी में हुई प्रगति को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

मीडिया की भूमिका - क्रिप्टोकरेंसी की कीमतों को प्रभावित करने में मीडिया प्रमुख भूमिका निभाता है। इससे संबंधित ख़बरें करेंसी में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकती हैं। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कई इन्वेस्टर और ट्रेडर उन ख़बरों की बहुत छान-बीन नहीं कर पाते क्योंकि हो सकता है कि ये किसी विश्वसनीय स्रोत न आये हों।

ये सभी फैक्टर क्रिप्टोकरेंसी के बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ाते हैं जो बगैर किसी समय-सीमा के किसी भी दिशा में जाने के लिए जाने जाते हैं। विशेषज्ञों को इस बाज़ार की चाल का अनुमान लगाने में अभी काफी समय लगेगा।

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में इन्वेस्ट करना -

क्रिप्टोकरेंसी के बाज़ारों में निवेश करने के इच्छुक लोगों को इसकी अस्थिरता से जुड़े नुकसान के बारे में पता होना चाहिए। मशहूर हस्तियों के समर्थन से विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी की कीमत प्रभावित होती है। मसलन डॉगकॉइन को ही लें, जिसमें इलॉन मस्क के प्रमोट करने से उछाल दर्ज़ हुई। कहा जा रहा है कि ऐसे एंडोर्समेंट से ये करेंसी कहां जाएंगी इसका कोई अता-पता नहीं है। इसका मतलब यह है कि इस करेंसी के वैल्यूएशन में नाटकीय रूप से गिरावट आ सकती है। बड़ी रकम इन्वेस्ट करने से पहले लोगों को अपनी पसंदीदा क्रिप्टोकरेंसी की मौजूदा क्रिप्टो टेक्नोलॉजी को समझने का प्रयास ज़रूर करना चाहिए। इसके अलावा बड़ी मात्रा में इन्वेस्ट करने से पहले उन्हें इसके बाज़ार रुझान और इसी तरह की और करेंसी की जांच-परख ज़रूर करनी चाहिए और समझना चाहिए कि इनमें इतना उतार-चढ़ाव क्यों आता है।

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